हर गुरुवार को आने वाला ‘चीज़ वाला अंकल’ – लेकिन कभी खरीदी नहीं!
किराना दुकान में काम करने वालों की ज़िंदगी में हर दिन कुछ नया देखने को मिलता है। ग्राहक बड़े ही दिलचस्प होते हैं – कोई सब्ज़ी छाँटता है, कोई दाल में छूट देखता है, तो कोई नए बिस्कुट के पैकेट पर लाइन लगाए खड़ा रहता है। लेकिन सोचिए, अगर कोई ग्राहक हर हफ्ते, एक ही समय पर आए, और पूरा वक्त दुकान के सबसे महंगे सेक्शन – यानि चीज़ वाले हिस्से – में ही खड़ा रहे, लेकिन कभी कुछ खरीदे ही नहीं, तब क्या हो? ऐसी ही एक दिलचस्प कहानी है ‘चीज़ वाले अंकल’ की, जो अब हमारे दिलो-दिमाग़ में घर बना चुके हैं।
कौन हैं ये ‘चीज़ वाले अंकल’?
हमारे किराना स्टोर में हर गुरुवार शाम को कुछ नियमित ग्राहक आते हैं। लेकिन इन सबमें सबसे अलग हैं ये एक अंकल, जो हमेशा अकेले, बिना कोई टोकरी लिए, सीधे चीज़ के शेल्फ के पास पहुँच जाते हैं। वहाँ 10-25 मिनट तक बड़े ध्यान से हर पैकेट पढ़ते हैं, उठाते हैं, उलटते-पलटते हैं, और फिर सलीके से वहीं रख देते हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है मानो कोई पुराना दोस्त किताबों की दुकान में घंटे भर किताबों को सूँघता, पढ़ता लेकिन एक भी खरीदता नहीं।
शुरू-शुरू में मुझे लगा शायद अंकल साहब चीज़ के बहुत बड़े शौकीन हैं और इतने ध्यान से इसलिए देख रहे हैं कि कोई नई वैरायटी ट्राय करें। लेकिन हफ्तों तक यही सिलसिला चलता रहा – वो कभी भी चीज़ नहीं खरीदते। कभी-कभी वो बटर, दही या एक अदद नींबू लेकर ही काउंटर पर पहुँच जाते हैं। किसी दिन तो सिर्फ हुमुस की डिब्बी लेकर निकल गए!
रहस्य और सोशल मीडिया पर चर्चा
अब ये तो भारतीय दुकानों में भी होता है – कोई खाता है, कोई बस देख-देखकर दिल बहलाता है। Reddit पर जब इस कहानी को साझा किया गया, तो वहाँ भी लोगों के कयासों की बौछार लग गई। एक यूजर ने कहा, "अंकल शायद अकेले रहते हैं, मिलना-जुलना पसंद करते हैं, इसलिए यहाँ आकर बस इंसानी रिश्ता महसूस करते हैं।" ये बात अपने यहाँ की पान की दुकान, या मोहल्ले की चाय की गुमटी पर गप्प मारते बुजुर्गों जैसी ही तो है!
कुछ लोगों ने ये भी अंदाज़ा लगाया कि शायद अंकल की जेब ढीली नहीं है, चीज़ महंगा सामान है, तो बस मन मारकर देख लेते हैं। जैसे हमारे यहाँ मिठाई की दुकान पर बच्चे मुहँ लगा-लगाकर मिठाई देखते हैं – मगर खरीदना मुमकिन नहीं होता।
एक मजेदार टिप्पणी आई – "हो सकता है अंकल खुद घर पर ही चीज़ बनाते हों, और यहाँ आकर नई वैरायटी, सस्ता-महँगा, या पैकेजिंग देखकर रिसर्च करते हों!" सच कहें तो, देसी लोगों को कुछ नया बनाने या जुगाड़ करने में जो मज़ा आता है, उसकी मिसाल नहीं!
कुछ लोगों ने चुटकी ली – "कहीं ऐसा तो नहीं कि चीज़ खाने से हेल्थ प्रॉब्लम हो गई, अब बस पुरानी यादों के सहारे ही मन बहलाते हैं।" वैसे, हमारे यहाँ भी तो कई लोग शुगर की बीमारी के बाद मिठाई की दुकानों के सामने खड़े होकर ‘आँखों का मीठा’ चखते हैं!
इंसानी भावनाएँ और दुकानदार की दुविधा
एक टिप्पणी कुछ यूँ थी – “शायद अंकल को किसी अपने की याद आती है जो कभी चीज़ बहुत पसंद करता था। अब वो नहीं रहा, तो ये सेक्शन ही यादों की गली बन गया।” कितनी गहरी बात है! हम सबके दिल में कोई न कोई कोना तो पुरानी यादों का होता ही है, फिर चाहे वो हमारी पसंदीदा चीज़ हो या किसी अपने की कोई आदत।
दुकानदार भी सोचता है – "मैं समझ नहीं पाता कि इनका क्या चक्कर है, पर दुआ करता हूँ कि एक दिन इन्हें अपनी पसंदीदा चीज़ मिल ही जाए।" कहीं न कहीं, हम सब अपनी ज़िंदगी में कुछ न कुछ ढूँढ़ ही रहे होते हैं – कोई खोई चीज़, कोई बचपन की याद, या फिर महज़ सुकून।
भारतीय संदर्भ और अपनी दुकान की कहानियाँ
सोचिए, अगर आपके मोहल्ले की किराना दुकान में कोई अंकल ऐसे हर हफ्ते आते, तो क्या आप भी उत्सुक नहीं हो जाते? हमारे यहाँ भी तो कई बार कोई बुज़ुर्ग रोज़ दुकान पर आकर अखबार पढ़ते हैं, चाय का प्याला लिए बिना कोई सामान खरीदे ही निकल जाते हैं। या बच्चे हर शाम आइसक्रीम की दुकान के बाहर खड़े रहते हैं, लेकिन खरीदते सिर्फ त्योहारों पर ही हैं।
ये छोटी-छोटी बातें ही तो इंसान को इंसान बनाती हैं। कभी-कभी कोई ग्राहक सिर्फ देखने, बातें करने, या पुरानी यादों को जीने के लिए भी आ जाता है। शायद चीज़ वाले अंकल भी बस अपनी ही किसी ‘कहानी’ को जी रहे हैं।
निष्कर्ष: आपकी दुकान में भी है कोई ऐसा?
जैसे-जैसे मैंने इस कहानी के बारे में सोचा, मुझे लगा – हर दुकान, हर मोहल्ला, हर गली में ऐसे कुछ ‘रहस्यमयी ग्राहक’ होते हैं, जिनकी आदतें हमें चौंका भी जाती हैं और मुस्कुराने पर भी मजबूर कर देती हैं। क्या आपकी दुकान या कॉलोनी में भी कोई ऐसा है? क्या आपने कभी किसी ग्राहक को बस सामान देखते-देखते खोया हुआ पाया है?
अगर हाँ, तो नीचे कमेंट में अपनी कहानी जरूर साझा करें! कौन जाने, अगली बार आपकी कहानी भी किसी ब्लॉग में छा जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: We have a regular who has never once bought anything from our cheese section and I think about him more than I should