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होटल में हॉकी वीकेंड का हंगामा: मेहमान, मैनेजर और बच्चों की टोली

बच्चों का होटल के हॉलवे में हॉकी खेलना, जिससे मेहमान निराश हैं।
बच्चों द्वारा हॉलवे में हॉकी खेलते हुए की गई इस जीवंत तस्वीर में होटल के मेहमानों की निराशा का एहसास होता है।

कभी आपने किसी होटल में शांति की उम्मीद की है और वहां बवाल ही बवाल मिला हो? सोचिए, आप लंबी यात्रा के बाद होटल के कमरे में पहुँचें और रात को चैन की नींद लेना चाहें, लेकिन गलियारे में बच्चों की हॉकी टीम पूरा स्टेडियम बना दे! कुछ ऐसा ही हुआ एक नाइट ऑडिट कर्मचारी के साथ, जिसकी कहानी Reddit पर वायरल हो गई।

होटल या हॉकी स्टेडियम? बच्चों की मस्ती ने उड़ाई नींद

हम भारतीयों के लिए होटल का मतलब है ठहरने की जगह, थोड़ा आराम, और कभी-कभी थोड़ा-बहुत शोर-शराबा भी चलता है। लेकिन सोचिए, अगर होटल की गलियों में बच्चे हॉकी के जाल (नेट) लगाकर मैच खेलें, तो क्या होगा? यही हुआ उस रात, जब होटल में तीन अलग-अलग बच्चों की हॉकी टीम ठहरी थी। शुक्रवार की रात को गलियारे में हॉकी मैच चला – वो भी पूरे जोश में!

एक मेहमान जो काफी समय से उस होटल में ठहरे थे, उन्होंने बच्चों को कई बार समझाया कि भाई, खेलने का समय नहीं है, रात है, सोने दो! लेकिन बच्चों पर तो मस्ती सवार थी, ना बच्चों ने सुना, ना उनके माता-पिता ने। बाकी मेहमानों ने भी चुप्पी साध ली – सोच रहे होंगे कि शायद माता-पिता संभाल लेंगे। लेकिन हुआ उल्टा, शांति तो कहीं दिखी ही नहीं।

होटल स्टाफ की बेरुखी: ‘फोन देखो, बाकी सब भूल जाओ!’

अब आप सोचेंगे, होटल का स्टाफ क्या कर रहा था? तो जनाब, स्टाफ तो अपने फोन में ही मग्न था। रात की शिफ्ट में जिम्मेदारियां निभाने के बजाय सभी मोबाइल स्क्रीन में खोए रहे। Reddit पोस्ट लिखने वाले कर्मचारी (OP) ने तो गुस्से में साफ-साफ लिखा, “हमारे फ्रंट डेस्क वाले तो बस आलसी हैं, फोन घूरते रहते हैं, और बाकी सब भगवान भरोसे है।”

एक मज़ेदार कमेंट में किसी ने लिखा – “होटल के पास ताकत है! अगर चाहे तो पूरी हॉकी टीम को बैन कर दे, टीम को बता दे कि अब से उनके लिए होटल की बुकिंग बंद। जब हॉकी वालों के पास रहने के लिए जगह ही नहीं होगी, तो उनकी सांसें ही अटक जाएँगी!” ये बात सच भी है। आखिर होटल की इज्ज़त और बाकी मेहमानों की शांति ज्यादा ज़रूरी है या सिर्फ ज्यादा बुकिंग की उम्मीद में सब सह लेना?

नियम कड़े करो, नहीं तो निकालो बाहर!

कई पाठकों ने सुझाव दिया कि होटल को टीम बुकिंग के वक्त ही शर्तें कड़ी करनी चाहिए – जैसे हर कमरे में ‘Acceptable Use Agreement’ साइन करवाओ, पब्लिक एरिया में शराब पूरी तरह बैन, रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक शांति, बिना निगरानी के बच्चे बिल्कुल नहीं। और अगर नियम तोड़े, तो एक वार्निंग के बाद पूरी टीम बाहर – बिना रिफंड के! एक कमेंट तो और भी मजेदार था – “अगर नियम तोड़े, तो 5 मिनट में निकालो, चाहे तीन बजे रात हो, पुलिस बुलाओ, और कह दो – बाहर निकलो, अभी के अभी!”

OP ने भी माना कि जब वो ड्यूटी पर रहते हैं, तो ऐसी हरकतें बिल्कुल नहीं चलतीं – “मुझे तो धमकी देने में कोई हिचक नहीं, और अगर करना पड़े तो निकाल भी देता हूँ।” लेकिन जब मैनेजर खुद ही ढीले पड़ जाएँ, और स्टाफ को बोले ही ना कि नियम लागू करो, तो फिर क्या होगा? एक पाठक ने कहा, “जब बॉस को फर्क नहीं पड़ता, तो आपको क्यों पड़े!”

भारतीय होटल संस्कृति बनाम पश्चिमी अनुभव

हमारे यहाँ भी शादियों, पार्टियों, या स्कूल टूर्स में होटल में बच्चों की मस्ती आम बात है। लेकिन भारतीय माता-पिता आमतौर पर तेज आवाज़ या शरारत पर डांट देते हैं – “अरे बेटा, होटल है, चुप रहो, लोग सो रहे हैं!” मगर हर जगह ये अनुशासन नहीं दिखता। Reddit पोस्ट की कहानी बताती है कि अगर स्टाफ, मैनेजर और माता-पिता सब लापरवाह हो जाएँ, तो परेशानी तय है – चाहे देश कोई भी हो।

कुछ कमेंट्स में अनुभव साझा किए गए – जैसे एक महिला ने लिखा, “हमारे यहाँ भी हॉकी टीम आई थी, पूरा होटल पसीने और गियर की बदबू से भर गया था। अगले साल सबने गियर पार्किंग में रखा!” तो किसी ने कहा, “हमारी टीम की कोच इतनी सख्त हैं कि सब बच्चे उन्हें ‘मैम’ कहते हैं, और शांति बनी रहती है।”

अंत में – होटल की शांति सबसे जरूरी

कहानी के आखिर में OP ने तंज कसते हुए कहा, “जब मैं यहाँ से चला जाऊँगा, ये होटल तो डूब जाएगा।” कई लोगों ने सलाह दी: “अगर होटल प्रशासन नहीं सुनता, तो परेशान मेहमान खुद शिकायत लिखें, और कहें कि अगली बार यहाँ नहीं आएँगे।”

तो दोस्तों, अगर आप कभी होटल जाएँ और वहाँ हॉकी या कोई और मस्ती चल रही हो, तो खुलकर अपनी बात रखें। होटल में सबका हक है चैन की नींद का – चाहे वो हॉकी खिलाड़ी हों या लंबी यात्रा के बाद थके हुए यात्री। और होटल वालों को भी चाहिए कि नियमों पर सख्ती बरतें – तभी सबका अनुभव अच्छा रहेगा, वरना “होटल” कब “हॉकी स्टेडियम” बन जाएगा, पता ही नहीं चलेगा!

आपका क्या अनुभव रहा है ऐसे शोरगुल वाले होटलों में? कमेंट में जरूर बताइएगा, और ये कहानी अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!


मूल रेडिट पोस्ट: Hockey weekends