होटल में सोशल मीडिया पर बैन: डेस्क के पीछे की अनसुनी कहानी
सोचिए, आप अपने ऑफिस पहुँचते हैं दो दिन की छुट्टी के बाद। जैसे ही दरवाज़ा खोलते हैं, बॉस आपको एक चिट्ठी थमा देते हैं – “अब से ऑफिस में सोशल मीडिया का इस्तेमाल बिल्कुल मना है!” अब बताइए, काम का माहौल तो जैसे अचानक स्कूल जैसा हो गया। न फेसबुक, न इंस्टा, न टिकटॉक, और तो और लाइव आना भी पूरी तरह बैन! ये कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की नहीं, बल्कि एक होटल के फ्रंट डेस्क स्टाफ की सच्ची दास्तान है, जो आजकल पूरे इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
अचानक आया सोशल मीडिया का तुगलकी फरमान
अब आप सोच रहे होंगे, आखिर ऐसी क्या आफत आ गई कि सोशल मीडिया पर इतनी सख्ती करनी पड़ी? असल में, होटल के कर्मचारियों को बताया गया कि किसी और प्रॉपर्टी से कोई मुकदमा आ गया है – न कोई साफ जानकारी, न कंपनी का लेटरहेड, न ही कोई ठोस वजह। बस एक चिट्ठी आई और सबको हस्ताक्षर करना था कि अब से ड्यूटी के दौरान किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आना या लाइव जाना सख्त मना है।
कर्मचारी बेचारे हैरान – “भाई, हम तो दिनभर खाली बैठे रहते हैं, काम भी चार घंटे में सिमट जाता है, बाकी समय तो उँगलियाँ गिनते रहते हैं। अब न फोन, न सोशल मीडिया... क्या करें?” एकदम वही हाल, जैसे भारतीय दफ्तरों में अचानक नोटिस लग जाए – “अब से ऑफिस में चाय पीना मना है!” पूरे स्टाफ के बीच खुसर-पुसर शुरू – “कहीं किसी ने वायरल वीडियो तो नहीं बना दिया?”
क्या सोशल मीडिया पर बैन वाकई ज़रूरी है?
इस मुद्दे पर होटल स्टाफ के बीच खूब बहस छिड़ी। कुछ लोगों का कहना था कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करके, खासकर जब किसी गेस्ट से बहस हो जाती है, तो कम-से-कम अपनी बात तो सामने आ जाती है। जैसे एक कमेंट में कहा गया, “भैया, सबूत के लिए रिकॉर्डिंग करना और कंटेंट के लिए बनाना अलग-अलग बात है। रिकॉर्ड करो, लेकिन पोस्ट मत करो।”
दूसरी ओर, कुछ अनुभवी लोगों का कहना था – “अगर कोई मेहमान मारपीट पर उतारू हो जाए, तो फोन निकालकर वीडियो बनाने से अच्छा है सिक्योरिटी या मैनेजर को बुलाओ। होटल में सीसीटीवी लगे हैं, वही काफी हैं, सोशल मीडिया के लिए रिकॉर्डिंग करना तो उल्टा नुकसान करवा सकता है।” एक ने तंज कसते हुए लिखा, “अगर आप होटल में जाते हो और सामने वाला आपकी वीडियो बना रहा हो, तो क्या आप वहाँ रुकना चाहोगे?”
यहाँ तक कि कुछ ने इसे निजता का उल्लंघन भी बताया – “हर किसी को अपनी प्राइवेसी चाहिए होती है। सब कुछ सोशल मीडिया पर डालना ज़रूरी नहीं। होटल ब्रांड की छवि भी तो देखो।”
भारतीय नौकरीपेशा संस्कृति में ऐसे फरमान – नई बात नहीं!
अगर हमारे यहाँ की ऑफिस लाइफ देखें, तो ऐसी तुगलकी घोषणाएँ कोई नई बात नहीं। कभी “अब से पान मसाला खाना मना”, कभी “मोबाइल लाना सख्त मना”, तो कभी “ऑफिस में गपशप बंद करो” – ऐसे फरमान आते रहते हैं। कुछ लोग तो इस पर हँसी-मज़ाक भी करते हैं – “भैया, अब बिना मोबाइल के क्या जिएँगे?” जैसे किसी ने मज़ाक में लिखा – “एक ऑफिस में तो ‘ड्रग्स बैन’ का नोटिस आ गया, सब मज़ाक उड़ाने लगे कि अब काम कैसे होगा!”
असल में, बड़े-बड़े होटलों में तो पहले से ही मोबाइल पर पाबंदी रहती है, लेकिन छोटे होटल या दफ्तरों में अक्सर लोग फोन पर वीडियो देखते या सोशल मीडिया चलाते मिल जाते हैं। लेकिन जब बात कंपनी की प्रतिष्ठा और गेस्ट की निजता की आती है, तो सख्ती ज़रूरी हो जाती है।
सबक और सोच – सोशल मीडिया, निजता और जिम्मेदारी
आजकल हर कोई चाहता है कि उसकी आवाज़ सुनी जाए, लेकिन ये भी तो सही है कि हर बात शेयर करना ज़रूरी नहीं। एक कमेंट में लिखा था – “कभी-कभी सोशल मीडिया पर डालने से किस्सा ही उल्टा पड़ जाता है, कंट्रोल आपके हाथ से निकल जाता है।” और सच कहें तो, ऑफिस का माहौल परिवार जैसा होता है – वहाँ के नियम-कायदे सबकी भलाई के लिए होते हैं।
अगर आपको कोई समस्या है, तो कंपनी से औपचारिक रूप से बात करें, सुझाव दें कि सीसीटीवी की गुणवत्ता बढ़ाई जाए, या इमरजेंसी के लिए उचित व्यवस्था हो। लेकिन सोशल मीडिया पर गेस्ट की वीडियो डालना – ये भारतीय मूल्यों और प्रोफेशनलिज़्म दोनों के खिलाफ है।
निष्कर्ष – आपके ऑफिस में क्या है मोबाइल पॉलिसी?
दोस्तों, आज की ये होटल स्टोरी सिर्फ सोशल मीडिया या मोबाइल के बैन की नहीं, बल्कि ऑफिस में जिम्मेदारी, निजता और भरोसे की भी है। तो अगली बार अगर आपके ऑफिस में ऐसा कोई नोटिस लगे, तो घबराएँ नहीं – हो सकता है, कुछ ही हफ्तों में सब पुराने ढर्रे पर लौट आए! आखिर, जुगाड़ और ढील-ढाल भारतीय नौकरीपेशा संस्कृति का हिस्सा है ही।
आपके ऑफिस में मोबाइल या सोशल मीडिया को लेकर क्या नियम हैं? कभी कोई अजीब नोटिस आया हो तो शेयर कीजिए – कौन जाने, आपकी कहानी अगली बार यहाँ छप जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: NEW SOCIAL MEDIA RULES FOR ALL OUR PROPERTIES.