होटल में साल का पहला 'खड़ूस' मेहमान – एक रात की अनोखी दास्तान
होटल रिसेप्शन का काम वैसे तो हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे मेहमान आ जाते हैं जो आपकी सहनशीलता की हर हद पार कर देते हैं। आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं एक ऐसी कहानी, जिसमें साल का पहला 'खड़ूस' (यानि असभ्य) मेहमान हमारे नायक के होटल में आया और फिर जो हुआ, वह किसी बॉलीवुड कॉमेडी से कम नहीं!
जब मेहमान ने बनाया रिसेप्शनिस्ट को परेशान करने का मिशन
तो जनाब, कहानी की शुरुआत होती है एक देर रात की कॉल से। एक साहब फोन पर बोले, “मेरी होटल में बुकिंग है, मैं फ्लाइट लेट हो जाने के कारण एयरपोर्ट फँस गया हूँ। रेंटल कार भी नहीं मिली, क्योंकि ऑफिस बंद हो गया। आप अपनी होटल की शटल भेज दो।”
अब भारत में तो ज़्यादातर होटल्स शटल नहीं चलाते, पर पश्चिमी देशों के बड़े होटल्स में ये आम है। लेकिन हमारे नायक के होटल में ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। उन्होंने शांति से समझाया, “साहब, हमारे यहाँ शटल नहीं है। लेकिन एयरपोर्ट की अपनी शटल है, या फिर आप Uber ले सकते हैं।”
अब यहाँ से असली ड्रामा शुरू हुआ। फोन पर 10 सेकंड की चुप्पी, फिर बोले – “माफ़ कीजिए, मैं आपको समझ नहीं पाया।”
फिर से समझाया, फिर वही रटा-रटाया जवाब। तीसरी बार तो रिसेप्शनिस्ट को लगने लगा कि साहब सुनना ही नहीं चाहते। आख़िरकार, उन्होंने ‘ठीक है’ बोलकर फोन काट दिया।
बियर की बोतल और एक मिनट की देरी – जब नियमों ने जीत हासिल की
करीब 45 मिनट में वो साहब और उनका सहकर्मी होटल पहुँच गए। रिसेप्शनिस्ट ने चेक-इन की प्रक्रिया शुरू की, बस आईडी चेक किया था, अब कार्ड का इंतज़ार था। इतने में साहब होटल की गेस्ट स्टोर की तरफ़ दौड़ पड़े, क्यूँकि बियर खरीदने के लिए सिर्फ़ पाँच मिनट बचे थे।
रिसेप्शनिस्ट आवाज़ लगाते रहे – “पहले कमरा अलॉट करा लीजिए, फिर खरीद लीजिए।” मगर साहब कहाँ सुनने वाले! दो बियर लेकर वापस आए और बोले, “इनका बिल मेरे कमरे में जोड़ दो।”
यहाँ भी नियम आड़े आ गए – चेक-इन बिना कार्ड के पूरा नहीं हो सकता, तो कमरे पर बिल कैसे लगे? साहब ने ऐसे घूरा, जैसे रिसेप्शनिस्ट ने कोई गुनाह कर दिया हो। आख़िरकार कार्ड दिया, चेक-इन हुआ, मगर अब बियर बेचने का समय एक मिनट ऊपर हो चुका था। सिस्टम ने पेमेंट ही एक्सेप्ट नहीं किया।
अब शुरू हुआ साहब का असली गुस्सा – “तुम्हारी वजह से समय निकल गया!” और गुस्से में अपने कमरे में चले गए, बेचारे सहकर्मी को वहीं छोड़ कर।
अगली सुबह की 'शटल' जाँच – जब सच सामने आया
सुबह होते ही साहब फिर रिसेप्शन पर प्रकट हुए। इस बार नए स्टाफ से बोले – “मुझे एयरपोर्ट जाना है, हमारी होटल की शटल बुला दो।”
यह कहते हुए ऐसे देख रहे थे, जैसे अब रिसेप्शनिस्ट झूठ में पकड़ा जाएगा। लेकिन जब नई रिसेप्शनिस्ट ने भी साफ़ कहा, “सॉरी सर, हमारे पास शटल नहीं है,” तो साहब का चेहरा देखने लायक था!
गुस्से में बड़बड़ाते हुए बोले, “मैं कॉर्पोरेट में शिकायत करूँगा!” और चल दिए।
यहाँ एक कमेंट की याद आ गई – “ऐसे लोगों को हमेशा लगता है कि कॉर्पोरेट में शिकायत करना कोई बड़ा हथियार है। मगर असल में, होटल का झंडा कोई छीनने नहीं आता, न ही होटल स्टाफ पर कोई एक्शन होता है। ज़्यादातर बार तो शिकायत बस कागज़ पर रह जाती है।”
एक और कमेंट में तो किसी ने मज़ाक में लिखा, “साहब के व्यवहार के बारे में कंपनी की HR को एक ईमेल भेज दो – अब इनकी बुकिंग कभी मंजूर नहीं होगी, और होटल के दरवाज़े से ही लौटा दिया जाएगा!”
होटल स्टाफ का नजरिया – भारतीय संदर्भ में सीख
अब सोचिए, अगर ये घटना भारत के किसी होटल में होती तो?
हमारे यहाँ भी अक्सर ऐसे मेहमान मिल जाते हैं, जिन्हें लगता है कि होटल स्टाफ उनकी हर बात पर सर झुका लेगा। मगर नियम तो नियम हैं!
एक लोकप्रिय कमेंट के मुताबिक, “कुछ लोग ऐसे बर्ताव इसलिए करते हैं क्योंकि पहले उन्हें फायदा हुआ है। पर हर बार ये चाल नहीं चलती।”
कुछ ने तो ये भी कहा – “इतनी देर तक कोई खड़ूस नहीं आया? भाग्यशाली हो भाई!”
यहाँ तक कि किसी ने मज़ाकिया अंदाज़ में जोड़ दिया, “ऐसे लोगों के लिए डबल-प्लाई टॉयलेट पेपर रखना चाहिए!”
कैसे निपटें ऐसे मेहमानों से?
भारतीय होटल इंडस्ट्री में भी यह बड़ा सबक है – नियमों की जानकारी और सख्ती ही आपकी ढाल है।
ऐसे मेहमानों से न उलझें, न डरें। विनम्रता से अपनी बात दोहराएँ, और जरूरत पड़े तो सीनियर या कंपनी को इन्वॉल्व करें।
सबसे ज़रूरी – खुद को दोषी न समझें। हर ग्राहक राजा नहीं होता, और हर बात मनवाना भी जरूरी नहीं।
निष्कर्ष – आपकी राय क्या है?
तो दोस्तों, यह थी साल के पहले खड़ूस मेहमान की कहानी।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा अनुभव हुआ है, जहाँ किसी ग्राहक या मेहमान ने बेवजह आपको परेशान किया हो?
अपनी कहानियाँ कमेंट में जरूर शेयर करें!
और याद रखिए – चाहे कोई कितना भी बड़ा साहब बन जाए, होटल के नियम और कर्मचारियों की इज़्ज़त सबसे पहले आती है।
अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो आगे जरूर पढ़ें – और अगली बार जब होटल जाएँ, तो रिसेप्शनिस्ट की मुस्कान को समझें और उनकी मेहनत की कद्र करें!
मूल रेडिट पोस्ट: The First Real Asshole Guest of the Year