होटल में मेहमानों की अकलमंदी! हर बार नहीं चलता जुगाड़
कहते हैं, "अतिथि देवो भवः" – लेकिन जब अतिथि अपना दिमाग घर छोड़कर आते हैं, तो देवता भी माथा पकड़ लेते हैं! होटल के रिसेप्शन पर काम करने वालों के लिए, हर दिन एक नई कहानी होती है। कभी किसी को कमरे में खाना चाहिए, कभी कोई ठंडा पानी मांगता है, और कभी-कभी तो कुछ ऐसे मेहमान आ जाते हैं, जो नियम-कानून को मजाक समझ लेते हैं। आज की कहानी ऐसे ही "अक्लमंद" मेहमानों की है, जिनकी हरकतें सुनकर आप भी कहेंगे – भाई, इतना भी मासूम मत बनो!
होटल का नियम: कमरे में जितने लोग, उतना ही आराम
अब सोचिए, आपने चार कमरे बुक किए, हर कमरे में दो-दो बड़े – यानी कुल आठ बड़े। सुनने में सब ठीक लगेगा। पर असली ट्विस्ट तब आया जब साथ में पाँच बच्चे भी निकले – और वो भी बिना बताए! वजह? "अगर बच्चों को गिनाते तो होटल अलग कमरे दे देता, इसलिए नहीं बताया!" अरे भई, होटलवाले कोई आपकी जेब काटने नहीं बैठे, हर होटल के अपने नियम-कायदे होते हैं।
एक बार एक मेहमान बोले, "हम तो हमेशा ऐसे ही करते हैं!" तो रिसेप्शनिस्ट ने भी हँसते हुए जवाब दिया – "भैया, नियम बदलेंगे नहीं, चाहे आप कितनी भी बार जुगाड़ लगाओ।"
बच्चों को इंसान न मानना – ये कौन सी तर्कशक्ति है?
अब ये तो हद ही हो गई! एक मेहमान ने तो यहाँ तक कह दिया – "मेरी एक साल की बेटी इंसान थोड़ी है, उसे क्यों गिनना?" भाई, अगर बच्चा इंसान नहीं है, तो फिर क्या है – लड्डू है क्या? होटल में आग-भड़कने या कोई इमरजेंसी होने पर हर एक जान गिनती है। एक कमेंट में किसी ने खूब लिखा – "होटल को जानना जरूरी है कि कमरे में कितनी आत्माएँ हैं!" (वैसे भारतीय शादियों में भी लोग 'आत्माओं' की गिनती कम ही करते हैं – जब तक बिरयानी कम न पड़ जाए!)
जुगाड़ के चक्कर में नियमों की बैंड
कई मेहमान सोचते हैं – "सोफे पर सुला देंगे, फर्श पर गद्दा डाल देंगे, और क्या चाहिए!" कुछ तो रिसेप्शनिस्ट से ऐसे पूछते हैं, जैसे होटल के पीछे गद्दों का गोदाम छुपा रखा हो। एक कमेंट में किसी ने मजाकिया अंदाज में लिखा – "हाँ-हाँ, पीछे स्टोर में बिस्तर छुपा कर रखे हैं, बस आप ही के लिए!"
दरअसल, होटल स्टाफ का काम बेचना है, न कि आपको परेशान करना। जैसे एक और कमेंट में लिखा गया, "अगर मैं आपको दूसरा कमरा बेच सकता, तो क्यों मना करूँगा? आखिर मुझे भी पैसे कमाने हैं!" लेकिन लोग फिर भी बार-बार पूछते हैं – "पक्का एक्स्ट्रा गद्दा नहीं है? एक बार और देख लीजिए न!"
सुरक्षा से बड़ा कोई मजाक नहीं
यहाँ बात सिर्फ आराम या पैसे की नहीं है, सुरक्षा सबसे बड़ी चीज़ है। होटल में हर कमरे में तय सीमा से ज्यादा लोग रहने लगें, तो फायर मार्शल या प्रशासन जुर्माना लगा सकता है। एक बार एक कर्मचारी ने मेहमान को सीधा कह दिया – "अगर आपको नियम तोड़ना है, तो फायर ब्रिगेड में जाकर $690 देकर रसीद ले आइए, फिर बात करेंगे!"
होटल वाले जान जोखिम में डालकर, सिर्फ आपकी "जिद" के लिए, नियम नहीं तोड़ सकते। एक अनुभवी कर्मचारी ने कमेंट में लिखा – "मैंने फायर सेफ्टी में 100% नंबर पाए हैं, किसी की जिद में अपनी नौकरी नहीं गँवाऊँगा!"
जिंदादिली और थोड़ी सी अक्ल – यही है असली मेहमानदारी
कई लोग ऐसे भी हैं, जो नियम समझते हैं और होटल स्टाफ की इज्जत करते हैं। एक कमेंट में किसी ने लिखा – "मैंने हमेशा कमरे की क्षमता देखकर ही बुकिंग की है, अगर जरूरत हो तो दूसरा होटल या बड़ा कमरा चुनता हूँ।" होटल कर्मचारी भी ऐसे मेहमानों को "समझदार और भला इंसान" कहकर धन्यवाद देते हैं – और ये होना भी चाहिए।
कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा – "अगर आप रेस्टोरेंट में भी बच्चों को सीट नहीं देते, तो टेबल छोटा पड़ जाएगा!" यानी ये समस्या सिर्फ होटल तक सीमित नहीं, हर जगह है।
निष्कर्ष: नियम तोड़ो मत, जुगाड़ से बचो – वरना खुद ही फँसोगे
अंत में यही समझिए – होटल के नियम सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होते। बच्चों को "इंसान" न मानना, या जुगाड़ से ज्यादा लोग कमरे में घुसा देना, आपकी खुद की मुश्किलें बढ़ा सकता है। और सबसे बड़ी बात – होटल कर्मचारी भी इंसान हैं, उनकी भी नौकरी है और जिम्मेदारी है। अगली बार जब कहीं जाएँ, तो गिनती सही रखिए, बच्चों को भी गिनिए, और होटलवालों की दुविधा समझिए।
आपका क्या अनुभव है? कभी आपने या आपके किसी जानने वाले ने ऐसा जुगाड़ लगाया है? या कोई मजेदार होटल किस्सा? नीचे कमेंट में ज़रूर शेयर कीजिए – और हाँ, अगली बार होटल बुक करते वक्त "आत्माओं" की गिनती पूरी करिए!
मूल रेडिट पोस्ट: i am shocked by guests stupidity