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होटल में बदला: 'अगर मुझे नींद नहीं आई, तो तुम्हें भी नहीं आने दूँगा!

बुएनोस आयर्स के बजट होटल में चार युवा यात्री, अपने 90 के दशक के साहसिक अनुभवों को याद करते हुए।
चार दोस्तों का एक यादगार पल, जब वे बुएनोस आयर्स की अपनी अद्भुत 90 के दशक की यात्रा के रोमांच और अनपेक्षित होटल अनुभवों पर विचार कर रहे हैं।

कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसे पल आते हैं जब कोई आपके साथ बदतमीज़ी करता है, और दिल में बदला लेने की आग जल उठती है। आज की कहानी है चार ब्राज़ीली युवाओं की, जो 90 के दशक में अर्जेंटीना घूमने निकले थे। लेकिन उनका सफ़र एक मामूली होटल और एक चालाक टूर गाइड के कारण यादगार (या कहें, 'भूलने लायक नहीं') बन गया! आइए जानें, कैसे एक 18 साल के लड़के ने लगभग 50 साल के गाइड की रातों की नींद हराम कर दी।

सड़क से होटल तक: एक अजब-गजब यात्रा

1990 के दशक में, कोई Google या TripAdvisor नहीं था कि होटल या टूर गाइड की पड़ताल कर सको। हमारे चारों ब्राज़ीली दोस्त तो बस एक उरुग्वेयन (Uruguayan) टूर गाइड के भरोसे ही टूर पैकेज खरीद बैठे। बाकी 15 लोग भी उसी के जाल में थे। होटल कैसा था? बस, यूं समझ लीजिए - टेंट में सोने से थोड़ा ही अच्छा!

दिन में शहर घूमना, रात में क्लब जाना – यही प्लान था। अब अर्जेंटीना के क्लब तो आधी रात के बाद ही सजते हैं। तो सबने सोचा, होटल में थोड़ा झपकी मार लें, ताकी रात को जमकर मस्ती हो। लेकिन जब क्लब जाने की बारी आई, तो टैक्सीवाला जनाब तो जैसे पूरी दुनिया घुमा के लाया! नाइल नदी, न्यूज़ीलैंड, ट्रांस-साइबेरियन – सब पार करवा दी। क्लब तो मिला, पर कहां? एकदम शहर से दूर, नदी के किनारे! मज़ेदार बात – टिकट तो गाइड के पास थे, और वो हमारे पहुंचने तक कब का अंदर जा चुका था।

भेदभाव का कड़वा स्वाद और जज़्बाती बदला

क्लब के बाहर खड़े-खड़े जब उंगलियां थक गईं, मिन्नतें कर-कर के, कोई सुनवाई न हुई। लाइन में लगे लोगों तक ने पलट कर नहीं देखा। तभी कहानी में आया असली ट्विस्ट – हमारे एक दोस्त की मिश्रित नस्ल (mixed race) थी, और शायद इसी वजह से हमें घूरा जा रहा था। हमारे साथियों में से कुछ को तो यह तक समझ नहीं आया, लेकिन जिसने यह महसूस किया – उसके मन में गुस्सा उबलने लगा। फिर क्या था – "चलो, वापस चलते हैं! और कहीं मस्ती करेंगे!" यही सोचकर सब लौट पड़े।

पर ठंडे दिमाग से तो कोई सोया नहीं। गाइड की हरकतें याद कर-कर के नींद ही नहीं आई। अब असली देसी बदला यहीं शुरू होता है – जो शायद हर भारतीय पाठक को कहीं न कहीं अपना सा लगेगा!

देसी जुगाड़: नींद उड़ाओ, हिसाब बराबर करो!

रात के 3:30 बजे, जब पूरा होटल सपनों में खोया था, हमारे हीरो ने गाइड को फ़ोन घुमा दिया। गाइड ने नींद में फोन उठाया, और हमारा दोस्त चुपचाप फोन काट गया। फिर से कॉल, फिर से काटना - ऐसे कई बार किया, जब तक गाइड ने फोन की लाइन ही बंद नहीं कर दी। लेकिन असली देसी दिमाग तो यहीं नहीं रुकता!

अब पाजामा पहनकर, सीधा गाइड के कमरे की घंटी बजाई, और सीढ़ियों में छुप गया। गाइड बाहर निकला – "कौन है?" – कोई जवाब नहीं। जैसे ही वो दोबारा बिस्तर पर गया, फिर से घंटी! ये सिलसिला चलता रहा। आखिरकार सुबह 9 बजे, जब सबको लॉबी में मिलना था, गाइड की हालत देखती बनती थी – जैसे उम्र से 10 साल बड़ा हो गया हो! और हमारे हीरो की मुस्कान – जैसे बोर्ड एग्ज़ाम में टॉपर ने मास्टर को चुप करा दिया हो।

सार्वजनिक बहस और होटल से विदाई

अब सबसे मज़ेदार सीन – लॉबी में सबके सामने हमारे 'छोटे' हीरो ने कुर्सी पर चढ़कर, ऊँचे-लंबे गाइड से सवाल-जवाब करने शुरू कर दिए – "आज रात नींद अच्छी आई?" गाइड ने धक्का देने की कोशिश की, लेकिन सफाई कर्मचारी ने पकड़ लिया। फिर क्या – पूरा होटल तमाशा देख रहा था। आखिरकार, गाइड को होटल से बाहर निकाल दिया गया! बाकी ग्रुप ने टिकट ले लिए, और हमारे हीरो ने उस गाइड को फिर कभी नहीं देखा।

Reddit पर चर्चा: जनता का फैसला

अब बात Reddit की – जहां लोगों की राय भी उतनी ही दिलचस्प रही। एक पाठक ने लिखा, "कहानी तो जैसे फिल्म हो!" किसी ने कहा, "ये बदला तो वाकई क्रिएटिव था, और गाइड को पूरा-पूरा मिला।" वहीं, कुछ लोगों ने शक भी जाहिर किया – "इतना सब एक रात में हुआ, यकीन नहीं होता।" लेकिन जैसा हमारे देसी घरों में होता है, जहां हर कहानी पर 'मसाला' डालना जरूरी है, वैसे ही लेखक ने भी जवाब दिया – "भैया, 18 की उम्र की यादें हैं, टाइमलाइन में थोड़ा फर्क माफ करना!"

किसी ने अर्जेंटीना की नस्लभेद की सच्चाई पर भी बात की, तो एक और ने लिखा – "तुम्हारा अंदाज़ बड़ा मज़ेदार है, कहानी सच हो या न हो, पढ़ने में मज़ा आया!"

निष्कर्ष: कभी-कभी छोटा बदला भी बड़ा सबक दे जाता है

इस कहानी में आपको हंसी भी आएगी, गुस्सा भी आएगा और शायद अपने कॉलेज दिनों की शरारतें भी याद आ जाएंगी। असली बात ये है – जब कोई आपके आत्मसम्मान पर चोट करे, तो कभी-कभी एक छोटा सा बदला भी बड़ी राहत दे जाता है। और हां, चाहे कहानी में 'मसाला' हो या न हो, संदेश यही है – अगर कोई आपके साथ गलत करे, तो उसे चैन की नींद न लेने दें... देसी स्टाइल में!

आपका क्या ख्याल है – क्या कभी आपने भी ऐसा कोई छोटा बदला लिया है? या किसी की नींद उड़ाई है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें!


मूल रेडिट पोस्ट: If I don't get to sleep, so won't you (a hotel saga)