होटल में बुकिंग का झंझट: जब क्रेडिट कार्ड ने कराया गड़बड़झाला!
हमारा देश जितना विविधताओं से भरा है, उतना ही रंग-बिरंगा है लोगों का यात्रा करने का तरीका। कोई छुट्टियों की पूरी तैयारी करता है, तो कोई ‘चलो यार, देखेंगे’ वाली मानसिकता लेकर निकल पड़ता है। लेकिन भाईसाहब, होटल बुकिंग के मामले में ये 'देखेंगे' वाला रवैया कभी-कभी भारी पड़ सकता है!
होटल की रिसेप्शन डेस्क पर बवाल: "इतना पैसा कार्ड में कहाँ रखें?"
जरा सोचिए, दो दिन की छुट्टी के बाद आप ऑफिस लौटते हैं और सामने होटल की लॉबी में बुजुर्ग मेहमानों की भीड़। सब अपने-अपने कमरों की जल्दी में, कोई चाबी के भाषा पर नाराज, कोई मिनीफ्रिज की ठंडक पर सवाल। ऐसे में शिफ्ट की शुरुआत ही एक झटके से हो जाए तो कैसा लगेगा?
हमारे आज के नायक (रिसेप्शनिस्ट) के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। पहली ही मेहमान जब पेमेंट टर्मिनल देखकर घबरा गईं—"इतना पैसा तो कार्ड में रखते नहीं, आज तो देने की उम्मीद भी नहीं थी!" अरे भई, होटलवाले कोई उधार की दुकान थोड़े हैं! ये तो वही बात हो गई जैसे मोहल्ले की दुकान से समोसा लेकर कह दो—"पैसे कल दूँगा!"
यहाँ एक कमेंट याद आया, जिसमें किसी ने मजाकिया तंज कसा—"भैया, मंगलवार को पेमेंट कर दूँगा, आज तो बर्गर खिला दो!" (जैसे हमारे यहाँ लोग कहते हैं, 'अगले हफ्ते पगार मिलेगी, तब दे दूँगा।') असल में ऐसे मेहमानों की उम्मीदें और होटल के नियम, दोनों अलग-अलग रेल की पटरी हैं!
होटल के सख्त नियम और ग्राहकों की उम्मीदें: कभी नहीं मिलतीं
अब जरा होटल की पॉलिसी पर नजर डालें। मेहमानों को लगता है कि पेमेंट तो चेकआउट पर होगी, लेकिन होटलवाले पहले ही प्री-ऑथराइजेशन (यानि कार्ड पर रकम ब्लॉक) कर लेते हैं ताकि पैसे की गारंटी रहे। जैसे हमारे यहाँ शादी-ब्याह में पहले एडवांस दे देते हैं, बाकी पैसा विदाई पर!
लेकिन कुछ लोग सोचते हैं—"मैं तो इमानदार हूँ, होटल वाले मुझ पर भरोसा कर लें।" ऐसे में एक कमेंट करने वाले ने बढ़िया उदाहरण दिया—"अगर बर्थडे केक पहले से बुक किया है, तो बेकरीवाले भी पहले पेमेंट माँगते हैं। वरना कोई दूसरा ग्राहक आकर खरीद लेगा!"
अक्सर यही होता है—अगर कार्ड डिक्लाइन हो गया, तो होटल न रुकता है न इंतजार करता है। एक कमेंट में बताया गया कि कई फ्रंट डेस्क वाले 6-7 बजे शाम को कार्ड चार्ज करते हैं और अगर डिक्लाइन हो तो बिना देरी के बुकिंग कैंसिल करके रूम किसी और को दे देते हैं। आखिर होटलवालों के लिए हर कमरा एक 'परिशेबल वस्तु' है—आज नहीं बिका तो गया काम से!
ग्राहकों की जिम्मेदारी: यात्रा से पहले कार्ड, पैसे और दिमाग, सब दुरुस्त रखें!
बहुत बार ऐसा देखा गया है कि लोग छुट्टियों पर निकल तो जाते हैं, लेकिन कार्ड में पैसे नहीं, या कार्ड की लिमिट कम। एक बैंक कॉल सेंटर कर्मचारी ने कमेंट में लिखा—"अक्सर लोग छुट्टी पर बस सौ डॉलर लेकर निकल पड़ते हैं, फिर चिल्लाते हैं कि कार्ड क्यों डिक्लाइन हो गया!"
यात्रा पर निकलने से पहले कार्ड की वैधता, लिमिट और बैंक को लोकेशन अपडेट करा लेना, ये तीनों बातें जरूरी हैं। कई बार बैंक, विदेश या नए शहर में ट्रांजेक्शन होने पर फ्रॉड के डर से कार्ड ब्लॉक कर देता है। ऐसे में होटल या बैंक से तुरंत बात करके दिक्कत सुलझाई जा सकती है—लेकिन ये तभी होगा जब आप समय पर अलर्ट रहें!
एक कमेंट में किसी अनुभवी यात्री ने सलाह दी—"हमेशा अपने कार्ड में पर्याप्त बैलेंस और एक-दो एक्स्ट्रा कार्ड रखें। कई बार बैंक खुद ही ट्रांजेक्शन को फ्रॉड मान लेता है, और कार्ड ब्लॉक कर देता है। मैंने तो पाँच-पाँच कार्ड लेकर घूमना शुरू कर दिया!"
होटल स्टाफ की मजबूरी: ‘हम भी इंसान हैं, लेकिन धंधा चलता रहना चाहिए’
कई पाठकों ने होटल कर्मचारी की मजबूरी समझी। एक कमेंट में लिखा—"होटलवाले किसी के निजी सचिव नहीं हैं; हर गेस्ट की जिम्मेदारी खुद की है।" होटलवाले अगर हर मेहमान को एक्सट्रा समय देने लगें, तो बाकी इंतजार करते रहेंगे।
इस पर खुद पोस्ट लिखने वाले ने बताया कि अब से होटल में सख्त नियम हैं—अगर फोन करने के बाद भी कार्ड काम नहीं करता, तो बुकिंग तुरंत कैंसिल। पिछली बार उन्होंने एक परिवार को एक घंटे का वक्त दिया था, फिर भी नहीं आए तो रूम किसी और को दे दिया। बाद में परिवार नाराज हुआ, लेकिन होटल के नियम-कायदे के आगे किसी की दलील नहीं चलती।
मजेदार किस्से और सीख: "गर्मी" ही सबसे बड़ा इवेंट!
पोस्ट के आखिर में एक किस्सा—रिसेप्शन पर लाइन लगी थी, लोग पूछ रहे थे—"शहर में कोई इवेंट है क्या, इतनी भीड़ क्यों है?" जवाब था—भाई, इवेंट का नाम है 'गर्मी!' यही सीजन में हर होटल फुल रहता है, तो बुकिंग और पेमेंट में ज़रा भी लापरवाही न करें।
निष्कर्ष: अपनी जिम्मेदारी समझें, होटलवाले कोई गारंटी फ्री नहीं देते!
तो अगली बार जब आप होटल बुकिंग करें, तो कार्ड में पैसे, लिमिट और बैंक से सब क्लीयरेंस लेकर ही निकलें। होटलवाले भले मुस्कुराकर स्वागत करें, लेकिन ‘उधार का कमरा’ यहाँ नहीं मिलता! और अगर कभी होटलवाले सख्त हो जाएँ, तो उन्हें कोसने से पहले उनकी मजबूरी भी समझें। आखिर, कारोबार भी कोई चीज़ है!
आपकी कोई मजेदार होटल बुकिंग की याद या अनुभव है? नीचे कमेंट में जरूर साझा करें—शायद आपकी कहानी अगली पोस्ट में छप जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: 'I don't keep that much money on my cards I didn't expected having to pay' and a tightening of rules for declining credit cards