होटल में डिपॉजिट का झंझट: मेहमान समझें या होटलवाले रोएं?
भाई साहब, अगर आप कभी होटल में रुके हैं तो ये ‘इनसिडेंटल डिपॉजिट’ नामक बला ज़रूर देखी होगी। कई मेहमान तो ऐसे हैं जो चेक-इन के वक्त ऐसे हैरान होते हैं जैसे होटलवाला उनसे कुंडली मांग रहा हो। और फिर जब पैसे वापस मिलने में देर हो जाए तो होटल की घंटी बज-बजाकर ऐसे पूछते हैं – “भइया, मेरा पैसा कब लौटाओगे!”
कईयों को तो लगता है जैसे होटलवाले बिना मतलब के उनका पैसा दबा रहे हैं। पर जनाब, असली कसूरवार कौन है? होटल, बैंक या खुद आपकी लापरवाही? आज इसी पर करेंगे दिलचस्प चर्चा, और बताएंगे होटल की रिसेप्शन डेस्क से लेकर बैंकों तक का असली खेल!
होटल डिपॉजिट: ये किस चिड़िया का नाम है?
चलिए, पहले ये समझ लेते हैं कि होटल में इनसिडेंटल डिपॉजिट आखिर है क्या। जब भी आप होटल में रुकते हैं, होटलवाले आपके कार्ड पर एक अमाउंट ‘होल्ड’ कर लेते हैं—इसे ही इनसिडेंटल डिपॉजिट कहते हैं।
ये पैसा होटल वाले आपकी कमीज़ फाड़ने, तौलिया चुराने या कमरे में पकोड़े तलने जैसी शरारतों के लिए सिक्योरिटी के तौर पर रखते हैं। अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो चेक-आउट पर ये अमाउंट वापस, वरना कटौती तय!
लेकिन, मज़ेदार बात यह है कि होटल सीधे-सीधे ये पैसा अपने पास नहीं रखता। वो तो बस ऑथराइज करता है यानी आपके अकाउंट में पैसा ब्लॉक हो जाता है, होटल के पास नहीं पहुंचता। चेक-आउट के बाद होटल तुरंत फंड रिलीज़ कर देता है, लेकिन असली खेल तो बैंक का है!
पैसे लौटाने में देरी: होटलवाले या बैंक का खेल?
अब आते हैं उस सबसे बड़े सवाल पर—“मेरा डिपॉजिट कब मिलेगा?”
अक्सर मेहमान चेक-आउट के दो घंटे बाद ही होटल पर चढ़ दौड़ते हैं – “अभी तक पैसे नहीं लौटाए!”
भाई, होटलवाले ने तो पैसे छोड़ दिए, अब आपकी बैंक की बारी है। बैंक वाले इसे 3-5 बिज़नेस डेज़ के लिए एडवांस में बैठा लेते हैं। क्यों? ताकि उस पैसे पर ब्याज कमा सकें।
रेडिट पर एक सज्जन ने खूब मज़ेदार कमेंट किया—“बैंकवाले होटलवालों को दोष देते रहते हैं, असल में पैसे वही दबाए बैठे हैं!”
एक दूसरे यूज़र ने लिखा, “अगर डेबिट कार्ड से पेमेंट करोगे तो बैंक तुम्हारे पैसे लटकाए बैठा रहेगा, लेकिन क्रेडिट कार्ड से करोगे तो जल्दी पैसा लौटता है—क्योंकि तब नुकसान बैंक का होता है!”
होटलवाले लाख सफाई दे दें, लेकिन ग्राहक का गुस्सा उन पर ही निकलता है। जैसे हमारे मोहल्ले की किरानेवाली बुआ जब भी सामान में कोई कमी निकले, हमेशा सप्लायर को नहीं, दुकानदार को ही कोसती हैं।
डिपॉजिट की रकम और ‘सरप्राइज़’ का खेल
अब ज़रा होटल डिपॉजिट की रकम पर भी नजर डालें। कई बार मेहमानों को लगता है कि डिपॉजिट तो बस 50-100 रुपये ही होगा, लेकिन जब होटलवाला 5000 रुपये का डिपॉजिट मांग ले, तो उनके चेहरे देखने लायक होते हैं!
रेडिट पर एक होटल कर्मचारी ने लिखा, “कई मेहमान ‘मैंने कभी डिपॉजिट नहीं दिया’ कहकर बहस करते हैं। फिर जब हम बताते हैं कि यही हमारी पॉलिसी है, तो वो बुकिंग कैंसिल करने की धमकी देते हैं। लेकिन 24 घंटे की कैंसिलेशन पॉलिसी के आगे उनका भी बस नहीं चलता!”
यहां एक सीख है—भाई, होटल बुक करने से पहले एक बार फोन कर के डिपॉजिट और इनसिडेंटल पॉलिसी जरूर पूछ लो, वरना होटलवाले के साथ-साथ खुद भी सिर पकड़कर बैठोगे।
देसी तजुर्बा और कुछ हँसी-मजाक
अब बात करते हैं अपने देसी तजुर्बे की। भारत में भी अब बड़े शहरों के होटल में ऐसी पॉलिसी आम हो चली है। लेकिन छोटे शहरों या धर्मशालाओं में तो आज भी “पैसा भरो, चाबी लो” वाला सिस्टम चलता है।
एक मज़ेदार किस्सा सुनिए—एक मेहमान ने होटल डेस्क पर आकर गुस्से में बोला, “पिछली बार तो कोई डिपॉजिट नहीं मांगा गया, आज क्यों? मैं तो हर होटल में बिना डिपॉजिट के ही रहता हूं!”
होटलवाले ने हंसते हुए जवाब दिया, “साहब, तब तो आप शायद 1972 में घूम रहे होंगे!”
रेडिट पर एक कमेंट तो लाजवाब था—“अगर होटल डिपॉजिट नहीं ले रहा, तो या तो वो बहुत ही ईमानदार है या फिर उसे आपके जाने की जल्दी है!”
निष्कर्ष: होटल बुक करते वक़्त इन बातों का रखें ध्यान
तो भैया, होटल बुकिंग का चक्कर भी अपने यूपी-बिहार के रेलवे टिकट जैसा ही है—पूछताछ कर लो, नहीं तो पछताओगे!
- होटल की डिपॉजिट/इनसिडेंटल पॉलिसी फोन करके जरूर पूछें
- क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करें, डेबिट कार्ड से नहीं
- डिपॉजिट वापस आने में समय लगे तो होटल को नहीं, बैंक को फोन घुमाएं
- बुकिंग से पहले होटल की पॉलिसी और रिफंड नियम जान लें
और हां, होटलवाले से दोस्ती रखें, क्या पता अगली बार चाय फ्री में मिल जाए!
आपका क्या अनुभव रहा होटल डिपॉजिट के साथ? अपने किस्से और मजेदार अनुभव कमेंट में जरूर बताएं।
अगली बार किसी होटल में जाएं तो मुस्कुराते हुए कहिए—“डिपॉजिट भी ले लीजिए, पर बिस्कुट साथ में दीजिए!”
मूल रेडिट पोस्ट: Deposits/Incidentals