होटल में गुस्से वाली मेहमान और लेडीबग्स की सेना: एक रिसेप्शनिस्ट की मजेदार आपबीती
सोचिए, आप होटल के रिसेप्शन पर खड़े हैं, काम में व्यस्त, तभी एक महिला अपने बुज़ुर्ग अंकल के साथ आती है। पहली नज़र में बड़ी मधुर, बड़ी विनम्र। मगर कहते हैं ना, "अच्छाई की चादर बहुत पतली होती है" – बस कुछ ही देर में सब बदल जाता है!
होटल की पहली झलक: मीठा बोल, तीखा मिज़ाज
जैसे ही महिला काउंटर पर आई, मैंने मुस्कुराकर उनका नाम और बुकिंग चेक की। रूम टाइप कन्फर्म किया – "टू बेड सुइट?"
महिला – "नहीं, ये तो सही नहीं है।"
मैंने माफी मांगी और तुरंत जांचा – कहीं बुकिंग में गलती तो नहीं? देखा तो, जैसा 'Suxpedia' (एक विदेशी ऑनलाइन बुकिंग वेबसाइट, कुछ-कुछ हमारे 'MakeMyTrip' या 'Goibibo' जैसी) ने भेजा था, वही रूम था – कोई बदलाव, कोई नोट नहीं।
महिला को बताया तो उनका चेहरा उतर गया। कहने लगीं, "मैंने तो दो डबल बेड्स वाला रूम बुक किया था।"
मैंने सुझाव दिया, "मैडम, आप Suxpedia से बात कीजिए, शायद वे कैंसिल करके सही रूम बुक करा दें।"
उन्होंने लंबी सांस ली, और आग्रह किया कि मैं नंबर दे दूं। अब Suxpedia का नंबर ढूंढ़ना तो जैसे 'पानी में छेद' – मैंने कहा, "मैडम, ऐप से ही संपर्क कीजिए।"
इंतज़ार, इंतज़ार और लेडीबग्स की एंट्री
अब शुरू हुआ इंतज़ार का लंबा सफर – 1 से 2 घंटे तक 'होल्ड' पर। उधर कस्टमर केयर वाले भी जैसे 'राम नाम की लूट' में लगे थे – कभी मुझे कॉल, कभी उन्हें, कभी फिर से होल्ड।
आखिरकार, महिला ने थक-हारकर वही सिंगल बेड वाला रूम लिया, जिसमें एक पुलआउट सोफा भी था – मगर चेहरा ऐसा जैसे मैंने उनका गहना गिरवी रख लिया हो!
सब कुछ शांत हुआ ही था कि थोड़ी देर बाद महिला फिर आईं – इस बार गुस्से में चाबी फेंकते हुए बोलीं, "रूम में कीड़े हैं!"
मैंने तुरंत समझदारी दिखाई, "कोई बात नहीं मैडम, आपको दूसरा रूम दे देता हूँ।"
पूछा, "आपको कौन-सा फ्लोर चाहिए, ऊपरी, निचला, या नजदीक?"
वो बीच में ही बोल पड़ीं, "मुझे बस ऐसा रूम चाहिए जिसमें कीड़े न हों!"
यहाँ कम्यूनिटी में एक यूज़र ने बढ़िया सवाल उठाया – "आखिर ये कौन-से कीड़े थे? बेडबग्स, फल मक्खियाँ या कुछ और?"
ऑरिजिनल पोस्टर ने जवाब दिया – "लेडीबग्स!"
हां, वही प्यारे, लाल-लाल से लेडीबग्स जो हमारे यहाँ 'भगवान की प्यारी गाड़ी' कहलाते हैं और शुभ माने जाते हैं।
एक और कमेंट आया – "लेडीबग्स? सच में?"
किसी ने तो मजाक में ये भी लिखा – "मुझे तो वो अच्छा शगुन लगते हैं!"
क्लाइमेक्स: गुस्से की हद, फोटो खींचने का ड्रामा
खैर, मैंने महिला को बिलकुल दूसरी बिल्डिंग के हिस्से में रूम दिया, ताकि कीड़ों से दूर रहें, और बताया कि थोड़ा चलना पड़ेगा।
उन्होंने चाबी झपट ली, बड़बड़ाते हुए चल दीं।
कुछ देर बाद, वापस आकर पूछने लगीं – "कौन-सी लिफ्ट सही है?"
मैंने बताया, "दूसरी साइड वाली लिफ्ट आपके रूम के पास है।"
अब अचानक, नई शिकायत – "इतनी दूर चलवाओगे मेरे बुज़ुर्ग अंकल को? ये तो नाइंसाफी है!"
मैंने याद दिलाया, "मैडम, इसलिए तो पहले ही पूछा था आपकी पसंद जानने के लिए।"
बोलीं, "नहीं, आपने पूछा ही नहीं!" और फिर शुरू गुस्से की बौछार।
यहाँ एक यूज़र ने लिखा – "कुछ लोग तो जैसे बहस करने ही आते हैं। हर बार रूम में कोई न कोई कमी निकालेंगे, बस फ्री अपग्रेड चाहिए।"
एक और कमेंट – "ऐसे लोगों को एक-दो बार बाहर का रास्ता दिखाना जरूरी है, वरना दूसरों का जीना हराम कर देते हैं।"
मैंने आखिरकार फैसला लिया – "बस, अब बहुत हुआ। आप होटल छोड़ दीजिए।"
महिला बोलीं, "आप मुझे निकाल नहीं सकते!"
मैंने कहा, "बिलकुल निकाल सकता हूँ, और यही कर रहा हूँ।"
होटल की राजनीति – फोटो, निजता और नियम
अब हुआ असली ड्रामा – महिला ने मोबाइल निकाला, मेरी तरफ ताने और फ्लैश चमका।
मैंने पूछा, "मैडम, आपने मेरी फोटो ली क्या?"
वो अनसुनी करने लगीं – "मैं क्यों आपकी फोटो लूंगी!"
फिर भी मैंने दो-तीन बार पूछा, मगर जवाब नहीं मिला।
कम्यूनिटी में एक वकील ने जानकारी दी – "संयुक्त राज्य अमेरिका में, होटल का लॉबी पब्लिक स्पेस माना जाता है। वहाँ बिना अनुमति फोटो लेना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन भारत में ऐसी स्थिति में मैनेजमेंट से शिकायत की जा सकती है। वैसे भी, अचानक फोटो खींचना किसी की निजता का उल्लंघन है।"
होटल के कर्मचारियों का दर्द और पाठ
इस पूरी घटना से एक बात तो साफ है – होटल के रिसेप्शन पर काम करना, 'घर की मुर्गी दाल बराबर' नहीं, बल्कि 'घर की मुर्गी कबूतर बराबर' है!
किसी ने कमेंट किया – "आजकल के मेहमानों में आधे तो ऐसे हैं, जिन्हें हर चीज़ में शिकायत ही चाहिए।"
किसी और ने बढ़िया लिखा – "अगर हर बार ऐसे लोगों को सही जगह दिखा दी जाए, तो शायद दोबारा ऐसी हरकत ना करें।"
निष्कर्ष: होटल में ग्राहक भगवान है, लेकिन...
हर होटल कर्मचारी के लिए ये कहानी एक सबक है – विनम्रता जरूरी है, लेकिन अपनी सीमाएँ जानना भी।
और मेहमानगिरी करने वालों के लिए – होटल वाले भी इंसान हैं, उनके साथ भी इंसानियत से पेश आएँ।
कभी-कभी छोटी-छोटी बातें, जैसे लेडीबग्स या रूम की दूरी, बड़ी बहस का कारण बन जाती हैं, लेकिन समाधान हमेशा संवाद और समझदारी में ही है।
तो अगली बार जब होटल जाएँ, रिसेप्शनिस्ट को मुस्कुराकर 'नमस्ते' कहना मत भूलिएगा।
आपका कोई मजेदार होटल अनुभव हो, तो कॉमेंट में जरूर शेयर कीजिए!
मूल रेडिट पोस्ट: I will ignore you and then get mad at you because I ignored you. That makes sense.