होटल में काम करने वाले साहब, कैलेंडर की समझ भी है या सिर्फ रजिस्टर ही देखते हैं?
अरे भई, होटल की रिसेप्शन डेस्क पर काम करना कोई बच्चों का खेल नहीं! यहाँ तो हर रोज़ नए-नए किस्से बनते हैं, कभी कोई मेहमान अपने जूते ढूंढता है, कभी कोई तौलिया। लेकिन जो किस्सा आज सुनाने जा रहा हूँ, वो तो वाकई आपकी हँसी छुड़ा देगा और सोचने पर मजबूर भी कर देगा कि भला लोग ऐसे कैसे हो सकते हैं?
जब रात के 3 बजे बजा "होटल एक्सपर्ट" का डंका
तो जनाब, बात कुछ यूं है कि एक साहब, जो खुद को होटल इंडस्ट्री का बाप समझते हैं, रात के पूरे 3 बजे होटल में आ धमके। आते ही दो कर्मचारियों पर चिल्लाना शुरू कर दिया—जैसे मानो उनके बिना होटल चल ही नहीं सकता। वजह क्या? साहब बोले, "मुझे अभी कमरा चाहिए, मेरी बुकिंग है!" रिसेप्शन वाले बोले, “जनाब, आपकी बुकिंग तो कल से है, आज नहीं।” अब साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर—“मैं भी होटल में काम करता हूँ, मुझे मत बताओ!”
अब भाई, अगर आप वाकई होटल में काम करते हो, तो कम-से-कम इतना तो पता होना चाहिए कि होटल का चेक-इन टाइम कब होता है और कैलेंडर कैसे चलता है। लेकिन साहब तो जैसे तैसे अपनी ही धुन में थे। एक कमेंट में किसी ने बढ़िया तंज कसा, "लगता है साहब होटल में नहीं, मोनोपॉली खेलते हैं!"
24 घंटे रिसेप्शन का मतलब टाइम मशीन नहीं होता, जनाब!
अक्सर हमारे देश में भी लोग सोचते हैं कि होटल में 24 घंटे रिसेप्शन है तो जब चाहे आ जाओ, कमरा मिल जाएगा। लेकिन भाई, 24 घंटे रिसेप्शन का मतलब यह नहीं कि होटल वाले आपके लिए टाइम मशीन लेकर बैठे हैं! होटल वाले भी इंसान हैं, मशीन नहीं। जैसे एक दर्शक ने कहा, "अगर हर कोई रात के 3 बजे आकर बोले कि मेरी बुकिंग आज से है, तो क्या हमें किसी को उठाकर कमरे से बाहर निकालना पड़ेगा?"
एक और मजेदार कमेंट था—"अगर आप सच में होटल में काम करते हैं, तो इस तरह से चिल्लाते नहीं।" सच भी है, होटल की नौकरी में धैर्य और समझदारी सबसे जरूरी चीज़ है, वरना ग्राहक और कर्मचारी दोनों की नींद हराम हो जाएगी।
‘मैं भी होटल में काम करता हूँ’—सबसे पुराना झूठ!
होटल इंडस्ट्री में ये लाइन तो हर दूसरे दिन सुनने को मिलती है—“मैं भी होटल में काम करता हूँ!” अब इसमें सच्चाई हो या न हो, लेकिन सुनने में मजा जरूर आता है। एक कमेंट में किसी ने लिखा, “अगर सच में होटल में काम करते तो ऐसी बेवकूफी नहीं करते।” किसी और ने जोड़ा, “शायद वो होटल के मेन्टेनेंस में होंगे, रिसेप्शन का क्या पता।” और एक साहब ने तो साफ कह दिया, “हो सकता है उनके पिताजी होटल चलाते हों, बेटा तो बस नाम ही चला रहा है!”
हमारे यहां भी अक्सर कुछ लोग रिश्तेदारों का हवाला देकर नियम तोड़ने की कोशिश करते हैं—“भैया, मालिक मेरे चाचा लगते हैं!” लेकिन जब बात नियम की आती है, तो होटल वाले भी कह देते हैं, "भैया, नियम सबके लिए एक जैसे हैं!"
होटल की दुनिया: रातें बिकती हैं, दिन नहीं
यहाँ एक कमाल की बात कही गई—“होटल वाले दिन नहीं, रातें बेचते हैं!” यानी आपकी बुकिंग जिस दिन से है, उसी दिन दोपहर के बाद चेक-इन होता है और अगली सुबह चेक-आउट। अगर आप उससे पहले आना चाहते हैं, तो एडवांस बुकिंग या एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा।
एक अनुभवी कर्मचारी ने बढ़िया समझाया, “अगर होटल फुल है और कोई 3 बजे रात को आ जाए, तो क्या उसे किसी के कमरे में भेज दें?” सोचिए, अगर आपके साथ ऐसा हो, तो आपको कैसा लगेगा?
निष्कर्ष: होटल में समझदारी जरूरी है, न कि धमकियाँ
तो भैया, अगली बार जब आप होटल जाएं, तो कैलेंडर जरूर देख लें और बुकिंग की तारीख और समय समझ लें। 24 घंटे रिसेप्शन का मतलब यह नहीं कि आप जब भी चाहें, चले आएं और बवाल करें। होटल का स्टाफ भी इंसान है, उनके भी नियम हैं और सबसे जरूरी—सम्मान है।
आपका क्या अनुभव रहा है होटल में? कभी किसी ने आपके सामने भी ऐसी बेतुकी हरकत की है? या फिर आप खुद होटल में काम करते हैं और ऐसे 'होटल एक्सपर्ट्स' से दो-चार हुए हैं? कमेंट में जरूर बताएं और इस मजेदार किस्से को दोस्तों के साथ शेयर करें—शायद अगली बार कोई 'एक्सपर्ट' बनने से पहले दो बार सोचेगा!
मूल रेडिट पोस्ट: “I work in hotels”... then you should understand how calendars work, sir 🙃