होटल में ऑनलाइन बुकिंग का झोल: जब मेहमान ने तीसरे पक्ष के चक्कर में किया बवाल
होटल में काम करने वाले फ्रंट डेस्क कर्मचारियों की जिंदगी जितनी रंगीन दिखती है, असल में उतनी ही सिरदर्द भरी भी होती है। खासकर जब मेहमान ऑनलाइन किसी थर्ड पार्टी साइट से बुकिंग करके आते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनका कमरा झटपट तैयार मिल जाए! अब सोचिए, आप होटल पहुंचे, रिसेप्शन पर खड़े हैं, और सामने वाला मेहमान कहता है—“भाई साहब, अभी-अभी श्मोटेल्स.कॉम से बुकिंग की है, हमारा कमरा दो!” और जब उन्हें बताया जाए कि बुकिंग दिखने में थोड़ा वक्त लगेगा, तो गुस्सा रिसेप्शन वाले पर ही उतार देते हैं।
यही किस्सा Reddit पर एक होटल कर्मचारी ने बड़े मजेदार अंदाज में साझा किया। तो आइए, जानते हैं होटल बुकिंग के इस ‘तीसरे पक्ष’ वाले झमेले के पीछे की असली कहानी—और इसमें छुपे वो सबक, जो हर भारतीय यात्री को जानने चाहिए!
ऑनलाइन बुकिंग: “अभी बुक किया है, कमरा दो!”
हमारे देश में भी ऑनलाइन बुकिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। लोग होटल के बाहर खड़े-खड़े मोबाइल पर सस्ती डील देखकर बुकिंग कर लेते हैं, और फिर सीधा रिसेप्शन पर हाजिर हो जाते हैं—जैसे जादू से कमरा तैयार हो जाएगा! Reddit पोस्ट के लेखक ने बताया—“एक कपल आया, बोला—‘अभी श्मोटेल्स.कॉम से बुक किया है।’ मैंने समझाया कि थर्ड पार्टी बुकिंग होटल सिस्टम में आने में 5 से 30 मिनट लग सकते हैं, लेकिन उन्हें मुझ पर ही गुस्सा आ गया।”
अब बताइये, दालान में खड़े होकर ऑनलाइन बुकिंग की और उम्मीद कर रहे हैं, जैसे रेलवे टिकट की Tatkal में सीट मिल गई हो! एक कमेंट में किसी ने बढ़िया लिखा—“मैडम, अच्छा रिजल्ट चाहिए तो सीधे होटल से बुकिंग कीजिए, हम सब आपकी मदद करेंगे।”
‘सस्ता’ का चक्कर और उम्मीदें फाइव स्टार वाली!
भारत में तो कहावत है—“सस्ती चीज में सौ नुक्स!” Reddit पर कई होटल कर्मचारी लिखते हैं कि ज़्यादातर मेहमान सस्ते थर्ड पार्टी रेट देखकर बुक करते हैं, लेकिन उम्मीदें होती हैं फाइव स्टार होटल जैसी। एक ने लिखा—“कल ही एक साहब आये, Wrexspeedia से सस्ती बुकिंग की थी, लेकिन मांग रहे थे—फर्स्ट फ्लोर, मुफ्त टूथब्रश, देर रात सर्विस, और कमरा भी वैसा जैसा फिल्मों में दिखता है!”
यानी, जेब में 100 रुपये और सपने ताजमहल के! अगर कमरा मनमाफिक न मिले, तो शिकायत भी कर देंगे—“कमरा छोटा है, डेकोर अच्छा नहीं, रिसेप्शन वाला रूखा है।” एक कर्मचारी ने लिखा, “भाईसाहब, आपने झाड़ू वाली अलमारी बुक की है, और उम्मीद कर रहे हैं पेंटहाउस!”
बिचौलियों का खेल: मेहमान परेशान, होटलवाले हैरान
कई बार मेहमान सोचते हैं कि बुकिंग तो वेबसाइट पर तब हो गई, तो होटल में क्यों नहीं दिख रही? असल में, जब आप किसी थर्ड पार्टी ऐप या वेबसाइट से बुकिंग करते हैं, तो वो जानकारी होटल के सिस्टम में आने में थोड़ा वक्त लेती है। जैसे सरकारी दफ्तरों में एक फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल जाती है, वैसे ही यहाँ भी डेटा घूमता है।
एक कमेंट में लिखा गया—“थर्ड पार्टी से बुकिंग करोगे, तो इंतजार करना पड़ेगा। अगर जल्दी है, तो सीधे होटल से बुकिंग करो, सब झंझट खत्म।” लेकिन कई बार मेहमान मानते नहीं और रिसेप्शन वाले को ही दोष देने लगते हैं।
कुछ मेहमान तो होटल के सामने ही खड़े-खड़े थर्ड पार्टी साइट से बुकिंग करते हैं, और रिसेप्शनिस्ट से पूछते हैं—‘भैया, ये कैसे करना है?’ अब बताइए, जिसे खुद नहीं पता, वो अगर मौके पर ही बुकिंग करेगा, तो होटल वाला जादू थोड़े कर देगा!
होटल कर्मचारियों की पीड़ा और मेहमान का नजरिया
होटल कर्मचारी भी इंसान हैं, उन्हें भी दिक्कतें होती हैं। Reddit पोस्ट के लेखक ने लिखा—“अगर मेहमान शालीनता से पेश आता है, तो हम भी पूरी कोशिश करते हैं कि उसका काम जल्दी हो जाए। लेकिन अगर कोई बदतमीजी करे, तो मन करता है बाहर निकाल दें!”
एक और कमेंट में जर्मन कहावत का जिक्र किया गया—“जैसा बोलेगा, वैसा सुनेगा।” यानी, विनम्रता से पेश आएंगे तो सामने वाला भी मदद करेगा।
कुछ पाठकों ने ये भी बताया कि कभी-कभी सही होटल की वेबसाइट ढूंढना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि गूगल पर सबसे ऊपर ‘स्पॉन्सर्ड’ या बिचौलिए दिख जाते हैं। ऐसे में होटल का असली नंबर या वेबसाइट पहचानना जरूरी है—जैसे ‘hotelname.com’ देख लें, न कि ‘hotelname.discount-booking.com’!
सबक: सीधी बुकिंग में बरकत, बिचौलिया में झंझट!
इस पूरे किस्से से दो बातें साफ हैं—एक, अगर आपको सच में होटल में बिना झंझट के रहना है, तो सीधे होटल से बुकिंग करें। दो, रिसेप्शन वालों से विनम्रता से पेश आएं, तो आपकी समस्या जल्दी हल होगी।
एक मजेदार कमेंट में लिखा गया—“अगर सस्ता चाहिए, तो झंझट भी झेलना पड़ेगा। McDonald's से सस्ता बर्गर लेंगे, तो उम्मीद मत करें कि शेफ आपको होटल जैसा खाना परोसेगा!”
और हाँ, होटलवाले भी मजबूर हैं—कई बार थर्ड पार्टी बुकिंग से होटल को कम कमाई होती है, लेकिन मेहमान की शिकायतें वही झेलते हैं।
निष्कर्ष: अगली बार होटल बुकिंग करें, तो ये बातें याद रखें!
तो अगली बार जब आप कहीं घूमने जाएं और होटल बुक करें, तो सोच-समझकर चुनें। अगर वाकई चैन की नींद चाहिए, रिसेप्शन वाले का दिल जीतना है, और बेमतलब के झंझट से बचना है—तो सीधे होटल से बुकिंग करें। और अगर कभी थर्ड पार्टी बुकिंग करनी ही पड़े, तो थोड़ा धैर्य रखें, रिसेप्शनिस्ट पर गुस्सा न निकालें।
क्या आपके साथ कभी ऐसा अनुभव हुआ? या कोई मजेदार किस्सा होटल बुकिंग का? नीचे कमेंट में जरूर बताएं—शायद आपकी कहानी भी किसी का दिन बना दे!
मूल रेडिट पोस्ट: 3rd Parties