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होटल में अंडे और ठगी: जब ‘तीन पत्तियों’ वाले मेहमान ने मचाया बवाल

काउंटेसनाइटऑडिटर की हास्यपूर्ण अभिव्यक्तियों के साथ होटल के अनुभवों पर विचार करती एनीमे-शैली की चित्रण।
काउंटेसनाइटऑडिटर की अनोखी होटल कहानियों की दुनिया में डूबिए! यह जीवंत एनीमे-शैली की छवि उनके मजेदार रोमांचों की छवि प्रस्तुत करती है।

होटल का फ्रंट डेस्क सुनने में जितना साधारण लगता है, असलियत में वहां रोज़ नए-नए किस्से बनते हैं। कभी कोई मेहमान गुस्से में आग-बबूला हो जाता है, तो कभी कोई ऐसी अजीबोगरीब हरकत कर जाता है कि हंसी रोकना मुश्किल हो जाए। आज मैं आपको एक ऐसी ही मज़ेदार, हैरान कर देने वाली घटना सुनाने जा रही हूँ, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे—“भाई, होटल वाले भी क्या-क्या झेलते हैं!”

सुबह-सुबह कुकीज़ की तलाश और अजनबी की अदा

सोचिए, सुबह के 5 बजे, जब शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हो, होटल का रिसेप्शन एक अजीब सी शांति में लिपटा हो—तभी एक मेहमान नीचे आता है, और पूछता है, “भैया, कुकीज़ बनी हैं क्या?” अब भला इतनी सुबह कौन कुकीज़ बनाता है? हमने विनम्रता से मना किया और उन्हें बताया, “साहब, थोड़ी देर में नाश्ता लग जाएगा।” वो महाशय बाहर जाकर बैठ गए।

जब नाश्ते का वक़्त आया और शिफ्ट बदलने लगी, तो हमारी ब्रेकफास्ट सुपरवाइज़र (यहाँ हम उन्हें 'एस' कहेंगे) आईं और बोलीं, “ये आदमी कुछ अजीब है, ज़रा ध्यान रखना।” असल में, होटल में कई बार बाहर के लोग भी नाश्ते की लालच में घुस आते हैं, खासकर जब होटल खुला हो और सुरक्षा ढीली हो। एस सीधी टक्कर देने वाली नहीं थीं, तो मुझे ही ‘खलनायक’ बनने का जिम्मा मिला—या कहें, ‘खलनायिका’!

तीन पत्तियों की चालाकी: ठगी का देसी जुगाड़

मैं साहब के पास पहुँची और पूछा—“आप हमारे मेहमान हैं ना?” उन्होंने नाम और रूम नंबर बताया। मैंने फौरन डेस्क पर चेक किया—सब दुरुस्त। लेकिन साहब का मूड कुछ उखड़ा-सा था। एस ने भी उन्हें समझाया, “हमें कभी-कभी बाहर से आए लोगों पर नजर रखनी पड़ती है।” मगर असली मज़ा तो तब आया जब मेहमान बोले, “अब तो आपको मेरा कमाल दिखाना पड़ेगा।”

फिर क्या था, उन्होंने जेब से तीन मुड़ी-तुड़ी ताश की गड्डियां निकालीं और शुरू हो गए—‘तीन पत्तियों’ का देसी जादू! ये वही मशहूर ठगी का खेल है, जिसमें दो बार बिना पैसे के आपको जीतवा देते हैं, ताकि आप फँस जाएं। असली खेल तो तब शुरू होता है जब पैसे दांव पर लगें—फिर पत्ता बदल जाता है, और आप खाली हाथ रह जाते हैं।

यहाँ एक मजेदार कमेंट याद आया—एक पाठक ने लिखा, “तीन पत्तियों का असली खेल तो तभी चलता है जब एक बंदा इनका साथी बनकर भीड़ में आपको फुसला रहा हो। कई बार जेबकतरे भी आसपास रहते हैं।” और सच कहूँ तो, मेरे मन में भी यही डर था! मैंने तुरंत अपना पर्स चेक किया कि कहीं जेबतराशी तो नहीं हो गई।

होटल में डिजिटल जुगाड़ और नए जमाने की ठगी

अब ज़रा सोचिए, हमारे यहाँ डिजिटल चेक-इन का सिस्टम था, जिसमें मेहमान अपने फोन से ही चेक-इन कर लेते हैं और कमरे की चाबी भी मोबाइल में मिल जाती है। एक पाठक ने पूछा, “क्या आपके होटल में डिजिटल चेक-इन है?”—तो जवाब साफ था, “अब तो यही ट्रेंड है, पहली बार वेरिफिकेशन के बाद आप मोबाइल से सब कर सकते हैं।”

लेकिन इसका फायदा उठाकर हमारे तीन पत्तियों वाले मेहमान ने किसी और का कार्ड और जानकारी इस्तेमाल कर ली थी, और पूरी तरह फ्रॉड करके बिना रिसेप्शन गए ही रूम ले लिया। जब मैनेजमेंट को ये पता चला, तो साहब का नाम फौरन ‘डू नॉट रेंट’ लिस्ट में डाल दिया गया। मतलब, अब दोबारा आने का सवाल ही नहीं!

होटल की दुनिया: कभी हंसी, कभी सिरदर्द

समुदाय के एक और पाठक ने लिखा—“होटल में तो हर दिन कोई नई मुसीबत आती है। कभी कोई गेट के सामने ही गांजा पीता है, तो कभी चोरी-झगड़े के केस हो जाते हैं।” सच कहूँ, ऐसी घटनाओं के बाद तो मन करता है—काश, बसंत की छुट्टियों का भीड़भाड़ वाला सीजन जल्दी आ जाए, ताकि ये सब सिरदर्द थोड़ा कम हो!

एक और पाठक ने तीन पत्तियों के खेल का तोड़ भी बताया—“अगर आपको लगे कि पत्ता बदल दिया गया है, तो दो गलत पत्ते पलट दो, और कहो—‘ये तो नहीं है!’ फिर या तो उन्हें मानना पड़ेगा कि उन्होंने चीटिंग की, या पैसे देने पड़ेंगे। लेकिन ये दांव बस एक बार ही चलता है!” वाह, क्या जुगाड़ है!

निष्कर्ष: होटल वालों की ज़िंदगी, मज़ेदार भी, जोखिम भरी भी

तो भई, होटल की नौकरी सिर्फ मेहमानों को नाश्ता देना, कमरा दिखाना ही नहीं, बल्कि हर रोज़ एक नई फिल्म देखने जैसा है—जिसमें कभी आप विलेन बन जाते हैं, कभी जासूस, और कभी-कभी तो खुद अपनी ही कहानी के हीरो भी। तीन पत्तियों वाले साहब तो चले गए, लेकिन उनकी कहानी यादगार बन गई।

आपके साथ भी अगर होटल या किसी सार्वजनिक जगह पर ऐसी कोई अजीब घटना हुई हो, या आप किसी ठग के जाल में फँस गए हों, तो नीचे कमेंट में ज़रूर लिखिए। और हाँ, अगली बार होटल में नाश्ता करने जाएं, तो ज़रा इधर-उधर सरसरी नजर डालना मत भूलिएगा—कौन जाने, अगला ‘तीन पत्तियों’ वाला आपके पास ही बैठा हो!


मूल रेडिट पोस्ट: Scam And Eggs