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होटल बुक करने से पहले समझिए, “फुल सर्विस” और “एक्सटेंडेड स्टे” में फर्क!

आधुनिक सुविधाओं के साथ आरामदायक लंबी अवधि का होटल कमरा।
होटल की विभिन्न प्रकारों को जानें! यह जीवंत तस्वीर एक आरामदायक लंबी अवधि के होटल कमरे को दर्शाती है, यह समझते हुए कि आप किस प्रकार की आवास बुक कर रहे हैं ताकि कोई आश्चर्य न हो।

भैया, क्या कभी आपने सोचा है कि होटल में घुसते ही कोई आपका सामान उठाएगा, कपड़े अलमारी में टांग देगा, और सुबह-सुबह नाश्ते के साथ बाथरोब तथा चप्पल भी आपके कमरे में लाकर देगा? अगर हां, तो आज की कहानी आपके लिए ही है! होटल की दुनिया में जितनी किस्म की सर्विस होती हैं, उतनी ही किस्म की उम्मीदें लेकर लोग आते हैं। लेकिन उम्मीदों के घोड़े अगर बहुत तेज़ दौड़ जाएं, तो क्या होता है, ये सुनिए इस मजेदार वाकये में।

कहां की महारानी, कहां का होटल!

हाल ही में एक होटल में कुछ मेहमान आए, जिन्होंने होटल स्टाफ की नाक में दम कर दिया। अब आप सोचेंगे, “अरे भैया, मेहमान तो भगवान होते हैं!” सही बात है, लेकिन अगर भगवान खुद ही भूल जाएं कि वे किस मंदिर में आए हैं, तो पंडित जी भी परेशान हो सकते हैं। हुआ यूं कि ये मेहमान समझ बैठे कि वे किसी पाँच सितारा, फुल सर्विस होटल में ठहरे हैं, जबकि असल में वह एक “एक्सटेंडेड स्टे” होटल था। यानी, वो होटल जहाँ लोग लंबा समय बिताते हैं, खुद के खाने-पीने और छोटे-मोटे काम खुद ही निपटाते हैं। वहाँ कोई बेहरा-बेलबॉय नहीं होता, न ही हर पल सेवा में हाज़िर कोई बटलर!

उम्मीदें सातवें आसमान पर, हकीकत ज़मीन पर

मेहमानों ने होटल में रात के एक बजे चेक-इन किया। आते ही बोले, “हमारा सामान गाड़ी से निकालकर कमरे में रखवाइए, फिर कपड़े अलमारी में टांगिए, और सूटकेस कहीं स्टोर कर दीजिए।” अब होटल स्टाफ ठहरे सीधे-सादे लोग, बोले – “बहनजी, हमारे यहाँ तो खुद ही सामान उठाना होता है!” मेहमान का चेहरा देखिए, जैसे किसी मेट्रो में सीट न मिले। अगली सुबह फोन घनघनाया – “रूम में बोतलबंद पानी क्यों नहीं है? बाथरोब, चप्पल और नाश्ता हमारे कमरे में क्यों नहीं आ रहा?” तब स्टाफ ने बड़ी विनम्रता से समझाया, “मैडम, ये फुल सर्विस होटल नहीं है, आपको नीचे आकर ही ब्रेकफास्ट लेना होगा, और बाथरोब-चप्पल यहाँ नहीं मिलते।”

“फ्री में पजामा मिलेगा?” – ग्राहक की मांगें और कम्युनिटी की हँसी

मजेदार बात तो तब हुई, जब रात के साढ़े तीन बजे मेहमान फिर पहुँचे रिसेप्शन पर– “मुफ्त में स्वेटपैंट और चप्पल चाहिए!” स्टाफ ने दोबारा समझाया कि भैया, यहाँ ऐसी कोई सर्विस नहीं है। मेहमान बोले, “हमारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों हो रहा है? हम तो हमेशा फाइव स्टार होटल में रहते हैं, वहाँ सब मिलता है।” अब यहाँ Reddit कम्युनिटी के लोग भी हँसी रोक न सके। एक ने लिखा, “भैया, पाँच सितारा छोड़िए, तीन सितारा में भी कोई आपका सामान नहीं खोलता।” दूसरे बोले, “भला कौन चाहता है कि कोई और उसके कपड़े निकाले और अलमारी में रखे? अरे, अपनी चड्डी कोई और छुए, ये किसे पसंद है!” किसी ने तो मजाक में कह दिया, “फ्री पजामा चाहिए तो जेल चले जाओ, वहाँ ट्रैकसूट जरूर मिलेगा!”

एक कमेंट में किसी ने भारतीय होटलों का जिक्र किया – “सुना है इंडिया में कुछ होटल में बटलर सामान खोल देते हैं।” लेकिन भैया, वो भी गिनती के ही होते हैं, और वहाँ भी सब कुछ फ्री नहीं मिलता।

होटल बुकिंग के ये सबक याद रखिए

अंत में, खुद होटल स्टाफ ने सलाह दी – “अगली बार वही होटल बुक करो जिसमें पहले ठहरे हो, नहीं तो नए होटल में फोन करके पूछ लो कि कौन-कौन सी सर्विस मिलती है। और भाई, अगर फाइव स्टार जैसी सर्विस चाहिए तो डिस्काउंट वेबसाइट से बुकिंग मत करना!” कम्युनिटी ने भी यही कहा – “हर होटल में फाइव स्टार वाली ठाठ-बाठ मत ढूंढो, बजट देखो और होटल की वेबसाइट पर जाकर अच्छे से पढ़ लो।”

एक टिप्पणीकार ने तो भारतीय घरों की बात छेड़ दी – “अपने ही घर में जितना आराम है, उतना किसी होटल के राजा-महाराजा कमरे में भी नहीं मिलेगा। इसलिए उम्मीदें कम रखो, मजे करो!”

निष्कर्ष: होटल की सर्विस और आपकी उम्मीदें – दोनों की अपनी जगह है!

तो दोस्तों, अगली बार जब भी होटल बुक करें, पहले जान लें कि आप कहाँ जा रहे हैं – होटल है या धर्मशाला, फाइव स्टार है या एक्सटेंडेड स्टे। अपनी उम्मीदें और होटल की हकीकत का मेल बिठाना सीख लीजिए, वरना कहीं ऐसा न हो कि सुबह-सुबह आप भी रिसेप्शन पर खड़े होकर “फ्री स्वेटपैंट” मांगते मिलें!

आपका क्या अनुभव रहा है होटल बुकिंग में? कभी आपको भी ऐसी अजीब मांग करने का मन हुआ या किसी ने आपके सामने किया हो? कमेंट में जरूर बताइए! और हाँ, अगली बार होटल में जाएं तो खुद ही अपना सूटकेस खोलिए – मजा भी आएगा और कपड़ों की सेटिंग भी अपने हिसाब से रहेगी!


मूल रेडिट पोस्ट: Know What Kind of Hotel You're Booking!!