होटल की शिफ्ट बदलते ही बदल गई ज़िंदगी: मेरे सोमवार के मेहमानों की याद में
एक होटल के रिसेप्शन पर काम करने का अपना ही मज़ा है, लेकिन जब आप कॉलेज के साथ पार्ट टाइम जॉब कर रहे हों, तब ये मज़ा कई बार सिरदर्द भी बन जाता है। मैं पिछले छह महीने से एक होटल में काम कर रहा हूँ। मेरी शिफ्ट थी – वीकेंड की सुबह और सोमवार की रातें। इन दोनों शिफ्टों का मिज़ाज अलग-अलग था, लेकिन इन दोनों की अपनी-अपनी यादें थीं, अपने-अपने खास मेहमान।
होटल की दुनिया ऐसी है जैसे किसी चाय की दुकान के बाहर बैठकर रोज़ आने-जाने वालों को देखना। धीरे-धीरे कुछ चेहरे इतने अपने लगने लगते हैं कि वे मेहमान नहीं, परिवार से लगने लगते हैं।
वीकेंड की मुसीबतें और प्यारी मिस मैरी
अब बात करते हैं वीकेंड मॉर्निंग शिफ्ट की। आप सोच रहे होंगे कि होटल की सुबह कितनी सुकूनभरी होगी, लेकिन कसम से, ये सुबहें तो जैसे किसी रेलवे प्लेटफॉर्म की भीड़ जैसी होती हैं। ऊपर से मेरी एक "दुश्मन" – ब्रेकफास्ट काउंटर पर काम करने वाली एक महिला, जो अपने रंगभेदू विचारों के लिए मशहूर थी। उसकी वजह से तो कई बार लगता था कि होटल की नौकरी छोड़ दूँ! वैसे, हमारे देश में भी ऑफिस या दुकान पर ऐसे लोग मिल ही जाते हैं, जिनके बिना दिक्कतों की लिस्ट पूरी नहीं होती।
लेकिन इसी भीड़-भाड़ में मेरी मुलाकात हुई मिस मैरी से। बुज़ुर्ग लेकिन दिल की बहुत साफ़। हर शनिवार आतीं, देर से चेकआउट करतीं और हमेशा एक प्यारी मुस्कान के साथ कहतीं, "बेटा, आज फिर थोड़ा लेट हो गया, बुरा मत मानना।" ऐसे मेहमानों के लिए तो दिल से सेवा करने का मन करता है।
होटल के रेगुलर: हर शिफ्ट का अपना परिवार
सोमवार की रातें कुछ अलग थीं। इस दिन ज़्यादातर लोग काम के सिलसिले में आते – कंस्ट्रक्शन के मज़दूर, ट्रेन के कर्मचारी, और कुछ ऐसे लोग जो हर हफ्ते आते थे। जैसे 'हैरी' – एकदम शांत स्वभाव के, बात कम करते। शुरू-शुरू में लगा कि शायद मुझे पसंद नहीं करते, लेकिन फिर समझ आया कि बस अपने काम के आदमी हैं। उनकी टीम का एक सदस्य हमेशा एक जैसे कमरे मांगता – 107, 111, 115। वजह बड़ी दिलचस्प – होटल के कुछ कमरों की बनावट उल्टी थी और उसे बदलाब से कन्फ्यूजन हो जाता! शायद हमारे यहाँ भी कोई बार-बार आने वाला ग्राहक अपनी वही पसंदीदा जगह या मेज मांगता है।
एक और मेहमान थे डेव। वो कभी एडवांस में बुकिंग नहीं करते, बस होटल के पास पहुँचने से एक घंटा पहले फोन कर देते। मैं भी उनकी आदत पहचान गया, तो उनकी चाबी और रजिस्ट्रेशन कार्ड पहले ही तैयार कर देता। एक Reddit यूज़र ने बड़ा सही कहा – "रेगुलर मेहमानों के लिए तो हम कुछ भी कर गुजरते हैं, बस वो बदतमीज़ न हों।" सच कहूँ तो, रेगुलर मेहमानों के साथ रिश्ता भी वही होता है – भरोसे और अपनत्व का।
शिफ्ट बदलने का दर्द: नए लोग, नई कहानियाँ
अब बात आई असली बदलाव की – मेरी क्लास का टाइम बदल गया और मुझे सोमवार की जगह मंगलवार की दूसरी शिफ्ट करनी पड़ी। यकीन मानिए, ये छोटा सा बदलाव दिल को छू गया। जैसे कोई अपना मोहल्ला छोड़ रहा हो। Reddit पर एक और यूज़र ने लिखा – "अरे चिंता मत करो, हर शिफ्ट में अपने रेगुलर मिल ही जाते हैं।" और सच में, पहली ही मंगलवार को एक मेहमान ने मुझसे पुराने रिसेप्शनिस्ट के बारे में पूछा – अब वो मेरे नए जान-पहचान वाले बन सकते हैं!
वैसे, होटल की दुनिया में ये आम बात है। हमारे यहाँ भी दुकानदार अपने पुराने ग्राहकों को नाम से जानते हैं, उनके लिए सामान छुपा कर रखते हैं, और अगर कोई खास ग्राहक बिना बताए आ जाए तो उनके लिए खास इंतज़ाम भी कर देते हैं। एक Reddit कमेंट में किसी ने लिखा – "एक बार मेरा रेगुलर ग्राहक बिना बुकिंग के आ गया और होटल फुल था, तो मैंने फोन घुमा-घुमा कर किसी की बुकिंग कैंसिल करवाई, ताकि उसके लिए जगह बना सकूं!" सोचिए, ये अपनापन हर जगह मिलता है – चाहे होटल हो या किराने की दुकान।
होटल के किस्से: कभी हँसी, कभी गुस्सा
इन सब के बीच हंसी-मज़ाक भी चलता रहता है। किसी ने कमेंट किया – "शायद वो कमरा मांगने वाला आदमी नींद में चलता हो, इसलिए उल्टा कमरा मिल जाए तो दीवार से टकरा जाए।" ऐसी बातें पढ़कर दिल खुश हो जाता है। और, जो लोग सोचते हैं कि होटल का रिसेप्शनिस्ट बस चाबी थमाता है – उन्हें पता होना चाहिए कि ये लोग हर रोज़ लोगों की ज़िंदगी आसान बनाते हैं, कभी मुस्कान से, कभी छोटे-छोटे एहसानों से।
निष्कर्ष: रिश्तों का होटल, कहानियों की गलियाँ
शिफ्ट बदलना तो ज़रूरी था, लेकिन उन सोमवार के मेहमानों की याद हमेशा रहेगी। लेकिन जैसा हर कोई कहता है – "नई शिफ्ट, नए चेहरे, नई कहानियाँ।" होटल हो या ज़िंदगी, सफर तो आगे बढ़ना है; पुराने रिश्ते यादों में और नए दोस्त स्वागत में।
आपके यहाँ भी कोई ऐसा दुकानदार, टीचर या ऑफिस वाला है, जिससे मिलने की आदत पड़ गई हो? ऐसे अपनेपन के किस्से जरूर शेयर करें!
क्योंकि होटल हो या ज़िंदगी – असली मज़ा तो रिश्तों में है, रजिस्ट्रेशन कार्ड और चेकआउट में नहीं!
मूल रेडिट पोस्ट: Switching shifts, or “I miss my Monday guests”