होटल की वह अजीब रात: 'मेरे कमरे में बाथरूम ही नहीं है!
होटल में काम करना वैसे ही जितना आसान दिखता है, उतना होता नहीं। हर रोज़ नए-नए मेहमान, उनकी अलग-अलग मांगें और कभी-कभी ऐसी घटनाएँ, जो सिर खुजाने पर मजबूर कर दें। आज मैं आपको एक ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसने होटल के स्टाफ से लेकर ऑनलाइन फोरम तक सबको हंसी और हैरानी में डाल दिया।
एक शांत-सी शाम थी, रिसेप्शन पर सबकुछ सामान्य चल रहा था। तभी एक बुजुर्ग महिला मुस्कान बिखेरती आई और बिना किसी बुकिंग के कमरा माँगा। बातचीत में बड़ा अपनापन था, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि पूरा माहौल बदल गया...
बाथरूम की खोज और "गायब" होने की गुत्थी
महिला ने चेक-इन करते वक्त सबसे पहले पूछा, "क्या मैं कमरे का शॉवर इस्तेमाल कर सकती हूँ?" रिसेप्शनिस्ट ने भी बड़े आदर से जवाब दिया, "जैसे ही आप चेक-इन कर लें, कमरे की सारी सुविधाएँ आपकी हैं।" महिला बड़ी खुश हुई, लेकिन फिर बोली, "मैं तो एक घंटे में निकल जाऊँगी, ब्रेकफास्ट की जरूरत नहीं।" वैसे तो यह सवाल भी थोड़ा अजीब था, मगर होटल वालों के लिए ऐसे सवाल आम बात हैं।
कुछ ही देर में महिला फिर रिसेप्शन पर आई और बोली, "मैं चेक-आउट कर रही हूँ, क्योंकि कमरे में बाथरूम ही नहीं है!" अब रिसेप्शनिस्ट की हँसी छूटते-छूटते बची। उसने सोचा, शायद महिला को समझने में दिक्कत हो रही है, तो वह खुद कमरे तक गई। वहाँ जाकर देखा तो महिला अलमारी के स्लाइडिंग दरवाज़े को बाथरूम समझ रही थी! असली बाथरूम का दरवाज़ा भी स्लाइडिंग था, लेकिन महिला उसे खींचने की कोशिश कर रही थी, खोलने की नहीं। रिसेप्शनिस्ट ने दरवाज़ा स्लाइड करके दिखाया, तो महिला के चेहरे पर राहत के भाव आ गए।
"जनता का दरबार": कमेंट्स की महफिल
इस कहानी को Reddit पर साझा किया गया, तो वहाँ भी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने इसे मानसिक भ्रम या डिमेंशिया (स्मृति-भ्रंश) से जोड़कर देखा। एक यूज़र ने लिखा, "मेरी माँ को भी ऐसी ही दिक्कत है, कुछ मिनट बाद ही सब भूल जाती हैं।" किसी ने कहा, "शायद महिला फ्री में शॉवर लेकर निकलना चाहती थी, इसलिए बहाना बनाया।"
एक नर्स ने मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा, "हमारे यहाँ DNR (Do Not Resuscitate) का मतलब कुछ और है, मगर होटल वालों के लिए DNR यानी 'इस मेहमान को दोबारा बुकिंग मत देना'!" हिंदी में कहें तो, 'ना बचे ना बुकिंग मिले!'
कुछ लोगों ने अपने अनुभव भी बाँटे। किसी ने बताया, "हमारे होटल में भी एक बार किसी को दोबारा समझाना पड़ा कि दूसरा बेडरूम कहाँ है!" तो किसी ने मज़ाक उड़ाया, "अगली बार होटल में बाथरूम वाले कमरे माँगना, नहीं तो कहीं छत पर नहाना पड़े!"
क्या थी असली वजह? बीमारी, चालाकी या कुछ और...
कई पाठकों ने महसूस किया कि महिला की हरकतें डिमेंशिया या मानसिक बीमारी की ओर इशारा करती हैं। एक पुलिस वाले ने लिखा, "मानसिक बीमारियाँ समाज में इतनी अनदेखी हैं कि कभी-कभी ऐसे लोग खुद भी नहीं समझ पाते कि दिक्कत क्या है।"
पर कुछ लोगों ने इसे चालाकी भी माना। "हो सकता है महिला बस शॉवर और एक घंटे की नींद के लिए बहाना बना रही हो, ताकि पैसे न देने पड़ें," एक यूज़र ने लिखा।
मूल लेखक (OP) ने भी कहा, "हमारे होटल में उस दिन कमरे की कीमत $200 से भी ऊपर थी, ऐसे में कोई अगर दिमागी रूप से ठीक हो तो गाड़ी में ही सोना पसंद करेगा!"
होटल की नज़रों से: नियम, सहानुभूति और उलझन
होटल स्टाफ के लिए ऐसे मामले हमेशा दुविधा भरे होते हैं। नियम तो यही है – अगर आपने कमरे और उसकी सुविधाओं का इस्तेमाल किया, तो फ्री में चेक-आउट नहीं मिलेगा। लेकिन जब सामने वाला सच में परेशानी में हो, तो दिल भी पसीज जाता है। इस महिला ने न सिर्फ कमरे का शॉवर लिया, बल्कि बाद में लॉबी में सबके सामने जोर-जोर से शिकायत भी की, "मुझे चार्ज मत करना, मेरे कमरे में बाथरूम ही नहीं था!"
आखिरकार, होटल ने नियम के मुताबिक चार्ज किया और महिला ने ऑनलाइन एक तीखी शिकायत लिखी – "होटल के कमरों में बाथरूम नहीं, स्टाफ अभद्र, जातिवादी और लिंगभेदी है!" (शुक्र है, यह फर्जी अकाउंट था और होटल ने कमेंट हटवा दिया।)
अंत में – सीख और सवाल
यह घटना सिर्फ एक मज़ेदार या हैरान करने वाली कहानी नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती मानसिक बीमारियों और होटल स्टाफ की चुनौतियों की भी झलक है। कभी-कभी आगे से मुस्कराता चेहरा भी भीतर से परेशान हो सकता है। और होटल वालों को भी सीख मिलती है – हर मेहमान की मदद करें, लेकिन नियमों से भी समझौता न करें।
आपका क्या कहना है? क्या आपके साथ कभी ऐसी कोई अजीब घटना घटी है? कमेंट में ज़रूर बताइएगा! और अगली बार होटल जाएँ, तो बाथरूम का दरवाज़ा स्लाइड करके देखना न भूलें!
मूल रेडिट पोस्ट: My room doesn't have a bathroom, so I'm leaving and you better not charge me