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होटल की लॉबी का चूल्हा: जब मेहमानों ने बना दी आग की महफ़िल!

गर्माहट का आनंद लेते मेहमानों के साथ आरामदायक लॉबी का फायरप्लेस, कार्टून-3D शैली में चित्रित।
इस मनमोहक कार्टून-3D चित्रण में, हमारा लॉबी फायरप्लेस गर्माहट और आराम का एहसास दिलाता है, जो मेहमानों के लिए सही माहौल तैयार करता है। कभी-कभी, वे उत्साह में आकर आग को जलाए रखने की जिम्मेदारी ले लेते हैं—जैसे उस यादगार घटना में जब हॉकी पिता ने ऐसा किया था!

भारत में अगर कोई होटल या गेस्टहाउस जाता है, तो सबसे पहली उम्मीद यही होती है कि वहाँ घर जैसी गर्मजोशी और आराम मिले। सोचिए, अगर होटल की लॉबी में असली लकड़ी का चूल्हा लगा हो — उसकी गर्माहट और लकड़ी की खुशबू, मानो पहाड़ों के किसी गेस्टहाउस में बैठकर चाय पी रहे हों! लेकिन कभी-कभी, मेहमान भी इतने 'घरवाले' हो जाते हैं कि होटल को अपना ही घर समझ बैठते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ एक होटल में, जहाँ मेहमान लॉबी के चूल्हे को ही अपना समझ बैठ गए।

चूल्हे की गर्मी या परेशानी?

इस होटल की लॉबी में असली लकड़ी वाला चूल्हा था—वह भी विदेशी तरीके का, जो यहाँ भारत में आमतौर पर गाँवों या पहाड़ी होटलों में दिखता है। इसका माहौल इतना आरामदायक बनाता कि मेहमान खिंचे चले आते। लेकिन, जैसे हमारे यहाँ कुछ लोग शादी या पार्टी में खुद ही परोसने लगते हैं, वैसे ही यहाँ के मेहमान भी चूल्हे की देखभाल खुद करने लगे।

एक बार हॉकी टूर्नामेंट के दौरान, एक नशे में धुत पिता ने दरवाज़ा ठीक से बंद नहीं किया और जलती लकड़ी का गोला बाहर निकल आया। स्टाफ को कुछ मिनट बाद धुएँ की महक आई—सामने देखा तो लॉबी के बीचोंबीच आग जल रही थी! सोचिए, अगर भारत में ऐसा होता तो क्या होता? शायद किसी अंकल ने तुरंत बाल्टी पकड़ ली होती, या फिर होटल वाले ने 'भैया, ये मत करिए!' कहकर डांट लगा दी होती।

मेहमानों का 'मदद' करने का अंदाज़

हमें तो अक्सर शादी-ब्याह या त्योहारों में लोग खुद ही किचन में घुस जाते हैं—"भइया, ज़रा आटा दे दो, पूड़ी बना लेंगे!"—लेकिन होटल में ऐसी आज़ादी शायद ही कोई उम्मीद करे। लेकिन यहाँ के मेहमानों ने इस चूल्हे को भी अपनी दादी का चूल्हा समझ लिया! एक बार एक मेहमान ने पूरा चूल्हा लकड़ी से भर डाला, आग इतनी तेज़ हो गई कि पूरी लॉबी भट्टी जैसी तपने लगी। वहाँ बैठे सारे मेहमानों के पसीने छूट गए, पर मज़ा सबको आ रहा था!

समुदाय के एक सदस्य ने बढ़िया टिप्पणी की: "जैसे हमारे यहाँ लोग बारात में बिन बुलाए किचन में घुस जाते हैं, वैसे ही ये लोग होटल में घुस गए!" कोई कह रहा था, "भाई, होटल का चूल्हा है, गाँव का नहीं!"

जब मेहमानों ने होटल को ही घर बना लिया

बात यहीं नहीं रुकी। हाल ही में एक पूर्वी यूरोपीय परिवार ने दस कमरे बुक कर लिए। ये परिवार इतना 'मौजूद' था कि हर जगह इनकी आवाज़, इनकी माँगें, और इनकी उपस्थिति महसूस होती थी। एक दिन रिसेप्शनिस्ट अपनी टेबल पर बैठा था, तभी अचानक खटपट की आवाज़ आई। देखा तो एक साहब पूरे इत्मीनान से कागज़, लकड़ी, सबकुछ चूल्हे में सजा रहे थे। रिसेप्शनिस्ट ने टोका, "सर, ये हमारा काम है, मेनेजमेंट नहीं चाहता कि मेहमान चूल्हे से छेड़छाड़ करें।" लेकिन साहब बोले, "मैं तो बस आग जला रहा हूँ!"

सोचिए, अगर हमारे यहाँ कोई होटल में खुद आग जलाने लग जाए, तो स्टाफ का क्या हाल हो? एक कमेंट में किसी ने लिखा, "अगला स्टेप क्या है, ये लोग खुद ही किचन में घुसकर खाना बना लेंगे?" और मज़े की बात, शाम को यही हुआ! परिवार के कुछ लोग किचन में घुसकर न्यू ईयर की पार्टी के लिए खाना बनाने लगे। मेनेजर ने गुस्से में आकर पूछा, "ये लोग किचन में क्या कर रहे हैं?"

होटल स्टाफ की दुविधा और कुछ सुझाव

ऐसी घटनाएँ सुनकर एक और कमेंट आया, "हमारे होटल में भी एक बार किसी ने लॉबी के चूल्हे में क्रिसमस ट्री डाल दिया था।" किसी और ने सलाह दी, "चूल्हे के आगे गेट लगाइए और ताला लगाइए, नहीं तो मेहमान अपनी मर्जी से कुछ भी कर देंगे।"

एक और मज़ेदार कमेंट था, "अगर होटल में किचन का दरवाज़ा लॉक नहीं होता, तो ये तो रोज़ की कहानी है!" इसका जवाब मिला, "भाई, हमारी किचन का दरवाज़ा तो ताले से बंद रहता है, वरना पता नहीं क्या-क्या हो जाए।"

किसी ने यह भी कहा, "लकड़ी का चूल्हा जितना खूबसूरत दिखता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। मेहमानों का उसमें हाथ डालना बिलकुल भी सुरक्षित नहीं।" यह बात बिलकुल सही है—होटल की सुरक्षा और बीमा दोनों के लिए खतरा!

भारतीय नज़रिए से कुछ सीख

हमारे यहाँ 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अतिथि होटल का मालिक बन जाए! होटल स्टाफ की मजबूरी यह है कि उन्हें मेहमानों के साथ विनम्रता भी रखनी है, पर साथ ही सुरक्षा का भी ध्यान रखना है।

शायद अब समय आ गया है कि ऐसे होटलों में चूल्हे के आगे बड़ा सा बोर्ड लगा दिया जाए—"कृपया, चूल्हे को छूना मना है।" या फिर, जैसा किसी ने सुझाव दिया, इलेक्ट्रिक चूल्हा लगा दिया जाए—कम से कम आग तो नहीं फैलेगी!

निष्कर्ष: आपकी राय क्या है?

तो दोस्तों, होटल की लॉबी का चूल्हा अगर आपको घर जैसा एहसास देता है, तो उसका आनंद लीजिए, लेकिन होटल का स्टाफ जो कर रहा है, उस पर भरोसा करिए। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा कोई मज़ेदार या हैरान कर देने वाला अनुभव हुआ है? कमेंट में ज़रूर बताइए और इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ शेयर करिए। कौन जाने, अगली बार जब आप होटल जाएँ, तो चूल्हे के पास बैठकर आपको भी कोई नई कहानी मिल जाए!


मूल रेडिट पोस्ट: The lobby fireplace