होटल की रिसेप्शन से ग़ायब हुआ यूनिफॉर्म: चोरी, चालाकी या बस आलस?
होटल की दुनिया में रोज़ नए-नए किस्से बनते-बिखरते रहते हैं। कभी कोई मेहमान तौलिया चुरा ले जाता है, तो कभी साबुन की डिब्बी। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी ने रिसेप्शन के पीछे से कंपनी का यूनिफॉर्म ही गायब कर दिया? आज की कहानी है एक बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप की, उनके यूनिफॉर्म की और उससे जुड़ी ऐसी हरकत की, जिसे देखकर बड़े-बड़ों की भी हँसी छूट जाए।
होटल में 50 कमरों वाला कॉर्पोरेट ग्रुप और यूनिफॉर्म का खेल
पिछले साल हमारे होटल में एक जानी-मानी कंपनी के 50 से ज्यादा कमरे बुक थे। पूरे छह महीने तक, एक-से-एक यूनिफॉर्म में सजे-धजे, रोज़ाना होटल की लॉबी में घूमते-फिरते ये लोग किसी बारात से कम नहीं दिखते थे। काम का अनुशासन ऐसा कि सबका ड्रेस एक-सा और समय पर। अब भारत में भी ऑफिस ग्रुप्स में यूनिफॉर्म कोई नई बात नहीं, लेकिन अक्सर लोग खुद की शर्ट-पैंट ही पहन लेते हैं। यहाँ तो पूरा यूरोपियन ठाठ।
इसी ग्रुप में एक सज्जन अचानक नौकरी छोड़कर चले गए और यूनिफॉर्म अपने कमरे में ही छोड़ गए। ग्रुप लीडर ने हमें ईमेल किया कि कृपया यूनिफॉर्म उनके कमरे से निकालकर रिसेप्शन पर रख दें, ताकि वे ले सकें। हमने भी जिम्मेदारी से काम किया और यूनिफॉर्म सुरक्षित रखा।
रिसेप्शन पर 'जासूसी' और यूनिफॉर्म की चोरी
दो दिन बाद ग्रुप लीडर रिसेप्शन पर आए और यूनिफॉर्म के बारे में पूछा। हम दोनों रिसेप्शनिस्ट एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे – हमें लगा, शायद दूसरे ने यूनिफॉर्म दे दिया होगा। बड़ी ही विनम्रता से लीडर ने भरोसा दिलाया कि कोई बात नहीं, देख लीजिए।
अब शुरू हुआ असली तमाशा। सीसीटीवी फुटेज देखा गया। यूनिफॉर्म रिसेप्शन के पीछे रखा था, सामने से दिखता नहीं था। उसी दौरान एक और गेस्ट (जो इसी ग्रुप का था) लिफ्ट से निकला, लॉबी में घूमा और रिसेप्शन के पीछे झाँका। इधर-उधर देखकर, जैसे चोर मंदिर से प्रसाद चुराता है, वैसे ही यूनिफॉर्म उठाया और निकल गया! हमारे साथी रिसेप्शनिस्ट बस पाँच सेकंड बाद ही वहाँ लौटे, लेकिन तब तक 'मिशन यूनिफॉर्म' पूरा हो चुका था। एकदम बॉलीवुड स्टाइल – 'चोर पुलिस' का सीन।
कम्युनिटी की राय: चोरी या मजबूरी?
इंटरनेट की दुनिया में इस किस्से पर भी हज़ारों लोगों ने अपने-अपने अंदाज़ में राय दी। एक कमेंट में किसी ने कहा – "यूनिफॉर्म कंपनी का नहीं, बल्कि उस पुराने कर्मचारी का नुकसान था।" यानी, चोरी कंपनी से नहीं, उस बेचारे से हुई, जिसकी सैलरी से यूनिफॉर्म का पैसा कट जाता।
कई लोगों ने यह भी लिखा कि हो सकता है वो बंदा बस यूनिफॉर्म को धोने से बचना चाहता हो – "कपड़े बदलना कौन पसंद करता है, जब दो यूनिफॉर्म मिल जाएं!" एक और मज़ेदार कमेंट में लिखा गया, "सीसीटीवी के होते हुए भी चोरी करना – भैया, ये तो अपनी ही बगल में छुरी रखने जैसा है!"
कुछ ने गहरी बात भी कही – "अगर यूनिफॉर्म वापस नहीं मिलता तो हमें नई ड्रेस खरीदनी पड़ती, और वो भी तीन अंकों की कीमत में।" एक साहब ने तो अंदाजा लगाया कि कहीं ये किसी सीक्रेट मिशन या स्पेशल डिपार्टमेंट का यूनिफॉर्म तो नहीं था? आजकल हर जगह ड्रेस कोड का भी अपना महत्त्व है, खासकर सुरक्षा के मामलों में।
भारतीय संदर्भ: होटल, यूनिफॉर्म और गुनाह के किस्से
अब भारत में होटल रिसेप्शन के पीछे से कुछ चुराना? भैया, यहाँ तो रिसेप्शनिस्ट भी 'शेर की माँ' की तरह बैठती हैं – कोई सामने से कुछ उठाने की हिम्मत ही नहीं करता! वैसे, हमारे देश में भी ऑफिस के यूनिफॉर्म के पीछे कइयों की भावनाएँ जुड़ी होती हैं; कई बार लोग छोड़ते वक्त यूनिफॉर्म वापस नहीं करना चाहते – "यार, याद के तौर पर रख लेता हूँ!" लेकिन चोरी-चोरी, चुपके-चुपके उठाना? ये तो बस फिल्मी सीन में ही अच्छा लगता है।
कुछ लोग कहेंगे – "अरे, यूनिफॉर्म ही तो था, क्या फ़र्क़ पड़ता है?" लेकिन जब मामला कंपनी की साख, सिक्योरिटी और अनुशासन का हो, तो छोटी सी चूक भी बड़ी हो जाती है। यही कारण है कि होटल वालों ने उस गेस्ट को चेतावनी भी दी – "भाईसाहब, रिसेप्शन के पीछे झाँकने की इजाज़त किसी को नहीं!"
निष्कर्ष: होटल की दुनिया में कभी-कभी होती हैं फिल्मी हरकतें
बीस साल के अनुभव में होटल मैनेजर ने पहली बार ऐसा वाकया देखा, जब कोई मेहमान रिसेप्शन के पीछे से कुछ उठा ले गया। सोचिए, इतने सालों में किसी ने तौलिया, शैम्पू, तकिया – सब लिया, लेकिन रिसेप्शन से यूनिफॉर्म उठाना? सच में, 'दुनिया गोल है और इंसान की हरकतें उससे भी ज्यादा घुमावदार!'
तो पाठकों, क्या आपके ऑफिस या होटल में भी ऐसे यूनिफॉर्म वाले किस्से हुए हैं? या आपने भी कभी 'मुफ्त में ज्यादा कपड़े' पाने के लिए ऐसी जुगाड़ लगाई? नीचे कमेंट में जरूर लिखिए – आपकी कहानियाँ भी सुनना चाहेंगे!
मूल रेडिट पोस्ट: The missing uniform