होटल की रिसेप्शन पर 'मिस्टर राइट' का ड्रामा: क्या आप यहाँ नए हैं?
होटल की रिसेप्शन डेस्क पर हर दिन नए रंग-ढंग के मेहमान आते हैं। कोई शांति से चेक-इन करता है, तो कोई ऐसे बर्ताव करता है जैसे होटल उसी के नाम पर चले। लेकिन जब 'मिस्टर राइट' जैसे मेहमान आ जाएँ, तो मज़ा ही कुछ और है! आज की कहानी एक ऐसे ही 'मैं हमेशा सही हूँ' टाइप शख्स की है, जिसने होटल स्टाफ की नाक में दम कर दिया।
'मिस्टर राइट' की एंट्री: जब अतिथि खुद को मालिक समझ बैठे
जैसे ही 'मिस्टर राइट' रिसेप्शन पर पहुँचे, उनका तेवर ही कुछ अलग था। चेक-इन फॉर्मेलिटी के तहत जब स्टाफ ने उनसे आईडी माँगी, तो वो ऐसे चौंके जैसे पहली बार किसी ने उनसे आईडी पूछ ली हो। बोले, "ये तो बड़ा अजीब है! यहाँ तो बस नाम बताओ और रूम मिल जाता है।" अब भैया, हमारे यहाँ तो हर किसी से आईडी माँगना नियम है! भारत में भी तो होटल में कमरा लेने जाओ, पुलिस वेरिफिकेशन और आईडी की फोटो हर जगह चाहिए, वरना रिसेप्शन वाला घुमा देता है।
स्टाफ ने बड़े ही शांत स्वर में कहा, "सर, मैं हर गेस्ट से आईडी लेता हूँ। मैंने आपको आज पहली बार देखा है।" थोड़े मूड में आकर 'मिस्टर राइट' ने आईडी थमा ही दी। यहाँ तक तो सब ठीक, मगर आगे जो हुआ, वो असली नाटक था।
लॉयल्टी पॉइंट्स का झगड़ा: 'मुझे सब कुछ चाहिए!'
आईडी वेरिफाई करने के बाद, सिक्योरिटी डिपॉजिट के लिए कार्ड मशीन चालू की गई। तब मिस्टर राइट बोले, "मेरा लॉयल्टी नंबर जोड़ देना।" स्टाफ ने देखा कि उनकी बुकिंग किसी तीसरी पार्टी वेबसाइट (सोचिए, भारत में जैसे MakeMyTrip या Yatra से बुकिंग हो) से हुई थी। नियम के मुताबिक, ऐसी बुकिंग पर सीधा होटल से मिलने वाले लॉयल्टी पॉइंट्स नहीं मिलते। स्टाफ ने साफ़-साफ़ बताया, "सर, इस बुकिंग पर आपको सीधे पॉइंट्स नहीं मिलेंगे, लेकिन रिकॉर्ड में नंबर जोड़ सकता हूँ।"
मिस्टर राइट तुरंत बोले, "अरे, मुझे तो पहले भी पॉइंट्स मिले हैं! मैं पिछले महीने से हर हफ्ते यहाँ आ रहा हूँ!" अब यहाँ कमेंट्स में एक यूज़र बोले, "अगर आप ब्रांड के प्रति वाकई लॉयल हैं, तो सीधे होटल से बुकिंग करनी चाहिए, तभी असली फायदे मिलते हैं।" बिलकुल सही बात! सीधी बुकिंग पर ही होटल आपको 'रॉयल्टी' समझता है, वरना तीसरी पार्टी के गेस्ट तो बस गेस्ट ही रहते हैं।
खैर, स्टाफ ने उनका नंबर जोड़ दिया और देखा – वाकई वो हाई-टियर मेंबर हैं, तो 'वेलकम पॉइंट्स' मिलनी चाहिए। मगर मिस्टर राइट को तो पानी भी चाहिए था, स्नैक्स भी और पॉइंट्स भी! बोले, "मुझे हर बार स्नैक और ड्रिंक भी मिलती है।" अब होटल की पॉलिसी साफ़ थी – या तो वेलकम पॉइंट्स, या एक ड्रिंक। स्टाफ ने नरमी दिखाते हुए बोला, "आप चाहें तो पानी की बोतल दे सकता हूँ।" लेकिन मिस्टर राइट कहाँ मानने वाले थे – "नहीं, मुझे हमेशा दोनों मिलता है!" इस पर स्टाफ ने दोबारा नियम समझाए, और आखिर में मिस्टर राइट ने खीझकर सिर्फ पॉइंट्स ही लिए।
'क्या आप यहाँ नए हैं?' - जब गेस्ट खुद को सुपरस्टार समझ बैठे
अब असली पंचलाइन आती है। मिस्टर राइट बोले, "क्या आप यहाँ नए हैं?" स्टाफ ने मुस्कराकर जवाब दिया, "मैं यहाँ दो साल से हूँ सर।" मिस्टर राइट ने ताना कसते हुए कहा, "मैंने तो आपको कभी नहीं देखा।" जैसे होटल का हर स्टाफ उन्हें रोज़ सलाम करता हो! भारत में भी अक्सर ऐसा होता है – बैंक में जाएँ, सरकारी दफ्तर में जाएँ, और अगर मनमुताबिक चीज़ न मिले तो 'क्या आप नए हैं' कहकर सामने वाले को नीचा दिखाने की कोशिश!
एक कमेंट पढ़कर तो हँसी छूट गई – "कुछ लोग बस फ्री में कुछ भी लेने का बहाना ढूँढते हैं।" सही बात है! एक और यूज़र ने लिखा, "अगर आप तीसरी पार्टी से बुकिंग करते हैं, तो उसी के गेस्ट हैं, होटल के नहीं। फ्री की उम्मीद मत रखिए।" सच पूछिए तो, होटल के स्टाफ भी इंसान हैं, हर बार सबका मन रखना मुमकिन नहीं।
स्टाफ की परेशानी और सीख: 'हमें भी कभी-कभी सख्त होना पड़ता है'
पोस्ट के आख़िर में लिखने वाले ने बड़ी ईमानदारी से कहा – "मैंने रिकॉर्ड चेक किया, वाकई ये गेस्ट पिछले महीने से हर हफ्ते आ रहे हैं, मगर हर बार किसी न किसी स्टाफ से उलझते हैं।" एक कमेंट में किसी ने सलाह दी – "ऐसे लोगों का सिस्टम में नोट डाल दो, ताकि अगली बार बाकी स्टाफ भी सतर्क रहें।" वाकई, हमारे यहाँ भी कई बार ऐसे 'प्रोफेशनल झगड़ालू' आ जाते हैं, जिनका मकसद बस फ्री चीजें हड़पना होता है।
कई कमेंट्स में लोगों ने यह भी कहा कि हर देश में होटल स्टाफ आईडी और कार्ड लेना जरूरी मानता है। भारत में भी यही नियम है – 'नाम बताओ और चाबी मिल जाए' वाली बात अब सिर्फ फिल्मों में ही होती है। असली जिंदगी में सुरक्षा और नियम ज़रूरी हैं।
निष्कर्ष: अतिथि देवो भवः, लेकिन नियम सबके लिए
इस किस्से से एक बात साफ़ है – गेस्ट का सम्मान ज़रूरी है, लेकिन नियम सबके लिए बराबर हैं। होटल हो, बैंक हो या कोई भी दफ्तर, नियमों का पालन जरूरी है। 'मिस्टर राइट' जैसे लोग हर जगह मिलेंगे, लेकिन स्टाफ का धैर्य और समझदारी ही असली जीत है। अगली बार जब आप कहीं चेक-इन करने जाएँ, तो याद रखिए – फॉर्मेलिटी भी जरूरी है, और थोड़ा सा विनम्र होना भी।
आपकी राय क्या है – क्या कभी आपने भी ऐसे किसी 'मिस्टर राइट' का सामना किया है? या खुद कभी ऐसी स्थिति में फँसे हैं? कमेंट में जरूर बताइए और शेयर कीजिए, ताकि अगली बार कोई 'मिस्टर राइट' आए, तो हर कोई तैयार रहे!
मूल रेडिट पोस्ट: 'Are you new here???'