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होटल की रिसेप्शन पर ठगी का ड्रामा: 'अगर तुम सच्चे साथी हो तो मुझे क्रेडिट कार्ड फ्रॉड करने दो!

अगर आपने कभी होटल की रिसेप्शन पर काम किया है या बस वहाँ खड़े होकर चाय पी है, तो आप जानते हैं – वहाँ हर तरह के लोग आते हैं! कोई हनीमून मनाने, तो कोई बर्थडे पार्टी के बहाने। लेकिन कभी-कभी ऐसे मेहमान भी टपक पड़ते हैं, जिनकी चालाकी और बहाने सुनकर आप सोचें, “भैया, ये तो बॉलीवुड फिल्मों के विलेन को भी पीछे छोड़ दें!” आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है – एक होटल के रिसेप्शनिस्ट की, जिसने ना सिर्फ होटल के नियमों की रक्षा की, बल्कि एक जबरदस्त ठग को भी अच्छे से जवाब दिया।

जब "दोस्ती" के नाम पर हुआ फ्रॉड का सौदा

शाम का वक्त था, रिसेप्शनिस्ट अपनी शिफ्ट शुरू ही कर रहा था कि अचानक से एक नई बुकिंग दिखी – ‘फ्रेंड्स एंड फैमिली’ डिस्काउंट पर। अब ऐसे रेट पर बुकिंग अक्सर उन्हीं लोगों को मिलती है जिनका कोई जानकार होटल में काम करता है। रिसेप्शनिस्ट ने सोचा, "शायद कोई भाई-भतीजा वीकेंड मनाने आया है।"

लेकिन दस मिनट में ही एक संदिग्ध-सा आदमी रिसेप्शन पर आ धमका, हाथ में मोबाइल – ट्रांसलेटर ऐप खोलकर। बातचीत की शुरुआत ही मोबाइल के जरिये हुई, और हर जवाब के लिए रिसेप्शनिस्ट को फोन में बोलना पड़ता। भाई साहब का नाम आईडी से मेल खा गया, पर असली खेल तब शुरू हुआ जब क्रेडिट कार्ड मांगा गया।

"क्रेडिट कार्ड नहीं है, लेकिन भरोसा तो है!"

आदमी बोला – "मेरे पास क्रेडिट कार्ड नहीं है।" पूछने पर पता चला, रूम उसकी गर्लफ्रेंड ने बुक किया है। अब रिसेप्शनिस्ट ने नियम समझाए, "जिसने बुकिंग की है, उसी का आईडी और कार्ड चाहिए, वरना चेक-इन नहीं हो सकता।" यहाँ बहाना आया – "गर्लफ्रेंड का पर्स चोरी हो गया, सिर्फ फोटो है।"

भारत में भी यह बहाना खूब चलता है – "सर, पर्स चोरी हो गया, बस फोटो है, काम चला लो ना।" लेकिन होटल वाले भी अब चतुर हो गए हैं। एक यूज़र ने कमेंट में खूब कहा – "ऐसे लोग हमेशा सामने वाले को ही दोषी साबित करने की कोशिश करते हैं, ताकि अपनी ठगी चला सकें!"

"तुम्हें क्या, पैसे कहाँ से आ रहे हैं?"

सबसे मज़ेदार मोड़ तब आया जब गर्लफ्रेंड ने फोन पर सीधा सवाल ठोक दिया – "तुम्हें क्या मतलब, पैसे कहाँ से आ रहे हैं? तुम पुलिस हो क्या?" रिसेप्शनिस्ट भी कभी इतने सीधे सवाल के लिए तैयार नहीं था! एक पल को तो सोच में ही पड़ गया।

सोचिए, अगर हमारे यहाँ किसी सरकारी क्लर्क से ऐसे कोई बोले – "तुम्हें क्या, किसका पैसा है?" तो शायद चाय की प्याली छूट जाए हाथ से। लेकिन रिसेप्शनिस्ट ने समझदारी से काम लिया – नियम बताए, और politely साफ मना कर दिया।

यहाँ एक कमेंट ने कमाल की बात कही, "भैया, मुझे अपनी तनख्वाह प्यारी है, दो अजनबियों के लिए नौकरी दांव पर नहीं लगा सकता!"

होटल कर्मचारियों की मुश्किलें और जनता की जुगाड़बाजी

कई यूज़र्स ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में होटल कर्मचारी अक्सर परेशान होते हैं – एक तरफ नियम, दूसरी तरफ ग्राहक की जुगाड़बाजी। कोई कहता, "बाकी होटल तो नहीं पूछते, आप ही क्यों इतना सख्त हैं?" अरे भाई, नियम सबके लिए हैं – चाहे बार में शराब खरीदनी हो या होटल में कमरा लेना हो, आईडी और असली कार्ड जरूरी है!

एक कमेंट ने तो बड़ा दिलचस्प ताना मारा – "इन लोगों को इंसानियत तभी याद आती है, जब खुद कोई फायदा चाहिए होता है।" सच है, बहुत लोग नियम तोड़ने के लिए कभी भावनाओं का सहारा लेते हैं, कभी Marxism का। किसी ने चुटकी ली – "मार्क्सवाद का असली झंडा तो अब ठग ही उठा रहे हैं!"

पाठक के लिए सीख – ईमानदारी ही असली साथी है

यह कहानी सिर्फ होटल की नहीं, हर जगह लागू होती है। चाहे बैंक हो, कॉलेज हो या ऑफिस – नियमों की अनदेखी करके कोई फायदा नहीं होता। और अगर आपको भी कभी कोई बहाना बनाए – "भाई, एक बार नियम तोड़ दो, इंसानियत के नाते!" – तो याद रखिए, आपकी रोज़ी-रोटी, आपकी इज्जत सबसे ऊपर है।

अंत में, रिसेप्शनिस्ट ने मामले को नोटबुक में लिख दिया, ताकि अगली शिफ्ट को भी पता रहे – "इस नाम का आदमी ऐसी चालाकी कर चुका है।" होटल कर्मचारियों के लिए भी यह बड़ा सबक है – हर नियम का पालन करें, चाहे सामने वाला कितना भी जोर लगाए।

आपके अनुभव?

क्या आपके साथ कभी ऐसा वाकया हुआ है, जब किसी ने नियम तोड़ने के लिए भावनात्मक बहाने या दबाव डाला हो? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए – कौन सा बहाना सबसे मजेदार या अजीब था?

शुभकामनाएं सभी होटल कर्मचारियों को – अगली बार जब कोई ‘सच्चा साथी’ बनने की दुहाई दे, तो मुस्कुरा कर कहिए, “साथी, नियम सबके लिए बराबर हैं!”


मूल रेडिट पोस्ट: Let me commit cc fraud or you're not a true comrade