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होटल के रिसेप्शन पर आई आफत: मेहमान की जिद और कर्मचारियों की मुश्किलें

रिसेप्शन डेस्क पर सुइट विकल्पों पर चर्चा करते हुए एक निराश होटल मेहमान का कार्टून-3डी चित्रण।
इस मजेदार कार्टून-3डी छवि में, हम एक होटल मेहमान की हास्यपूर्ण निराशा को दर्शाते हैं, जब वह अपने परिवार के लिए कमरों के विकल्पों का सामना करती है। कभी-कभी, मेहमानों को संभालना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है!

होटल का रिसेप्शन, मतलब रोज़ नये-नये चेहरे, अलग-अलग किस्से और हर दिन नई चुनौतियाँ। लेकिन कभी-कभी ऐसे मेहमान आ जाते हैं जो पूरे होटल स्टाफ को सोचने पर मजबूर कर देते हैं—"आखिर इसमें हमारी गलती क्या है?" आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो हर उस शख्स को ज़रूर पढ़नी चाहिए, जिसे लगता है कि 'ग्राहक भगवान होता है'—पर भगवान भी कभी-कभी बड़ी अजीब फरमाइशें कर देते हैं!

जब ऑनलाइन बुकिंग ने बढ़ा दी रिसेप्शनिस्ट की टेंशन

तो हुआ यूँ कि एक महिला अपने पति और दो वयस्क बच्चों के साथ होटल आई। उन्होंने एक बेडरूम वाला सुइट, यानी सिर्फ़ एक कमरा बुक किया था। अब चार लोगों के लिए एक कमरा तो वैसे ही थोड़ा तंग पड़ जाता है, लेकिन उम्मीद थी कि शायद रिसेप्शन पर पहुँचकर कोई जादू हो जाएगा। महिला जी ने पूछा, "क्या आपके पास दो बेडरूम वाला कोई सुइट है?" रिसेप्शनिस्ट ने बड़ी विनम्रता से जवाब दिया, "मैडम, सारे दो बेडरूम सुइट आज की तारीख़ में बुक हो चुके हैं। बस एक-बेडरूम और स्टूडियो वाले कमरे ही बचे हैं।"

महिला जी ऊपर अपने कमरे में गईं और 15 मिनट बाद वापस आईं—चेहरे पर गुस्से की लाली। बोलीं, "आप झूठ बोल रहे हैं! मुझे ऑनलाइन अब भी दो बेडरूम सुइट दिख रहा है।" अब बेचारा रिसेप्शनिस्ट क्या करता? उसने समझाया, "मैडम, वो जो दो बेडरूम वाला कमरा आपको दिख रहा है, वो फिलहाल इस्तेमाल के लायक नहीं है। उसमें बहुत तेज़ डॉग की बदबू है, पिछले गेस्ट ने भी इसी वजह से वो कमरा छोड़ दिया था। हम आपको ऐसा कमरा दे भी दें, तो आप ही शिकायत करेंगी।"

ग्राहक की जिद और होटल स्टाफ की बेबसी

यहाँ से कहानी और मज़ेदार हो गई। महिला जी कभी कहतीं कि "मैं खुद कुत्ता पालती हूँ", तो अगले ही पल बोल पड़तीं, "मुझे तो डॉग से एलर्जी है, हर जगह डॉग की स्मेल है!" अब रिसेप्शनिस्ट को तो ऐसा लग रहा था जैसे कोई CID की पूछताछ चल रही हो—कभी इधर, कभी उधर। बेचारे ने फिर भी समझाया, "मैडम, हमारा होटल छोटा है, सिर्फ़ चार मंज़िल का है। हर कमरे में कुत्ता नहीं जाता, सिर्फ कुछ ही डॉग-फ्रेंडली कमरे हैं।"

रात के 11 बजने वाले थे, थकान हद से ज़्यादा हो चुकी थी। उसी समय फ्रंट ऑफिस मैनेजर आ गईं। रिसेप्शनिस्ट ने पूरी कहानी सुनाई—कुत्ते की बदबू, गंदा कमरा, और झूठ बोलने का आरोप। मैनेजर ने भी वही बात दोहराई—"मैडम, कोई और ऑप्शन नहीं है, जो बुक किया है वही मिलेगा।"

महिला जी ने आखिर में कहा, "ठीक है, बस एक रात ही रुकना है, ज्यादा बवाल नहीं करूंगी।" और चुपचाप चली गईं। अब बेचारा रिसेप्शनिस्ट सोचता रहा—"इसमें मेरी क्या गलती थी?"

ऑनलाइन बुकिंग और 'तीसरे पक्ष' की असली हकीकत

अब ज़रा सोचिए, ये सारा तमाशा हुआ किस वजह से? असल में महिला जी ने कमरा 'थर्ड पार्टी' यानी किसी दूसरी वेबसाइट से बुक किया था, होटल के सीधे नंबर या वेबसाइट से नहीं। एक कमेंट करने वाले (u/DaneAlaskaCruz) ने बड़ा मज़ेदार तंज कसा—"या तो मैडम ने कमरा बुक करते वक्त गलती की और अब अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए रिसेप्शनिस्ट पर ठीकरा फोड़ रही हैं, या फिर चाहती थीं कि एक बेडरूम बुक कर के फ्री में दो बेडरूम का फायदा उठा लें।"

एक और टिप्पणी (u/eightezzz) थी—"ऐसा नहीं हो सकता कि गलती से बुकिंग हुई हो, कन्फर्मेशन में साफ लिखा होता है कि आपने एक बेड बुक किया है। मैडम को उम्मीद थी कि शायद होटल वाले फ्री में अपग्रेड कर देंगे!"

वहीं, एक और यूज़र (u/WizBiz92) ने बड़ा जबरदस्त ज्ञान दिया—"अगर होटल स्टाफ कह रहा है कि कोई कमरा उपलब्ध नहीं है, तो इंटरनेट की बात मत मानिए, क्योंकि असली जानकारी होटल वालों के पास होती है, न कि किसी वेबसाइट के पास।"

हमारे यहाँ भी अक्सर देखा जाता है कि लोग ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर होटल वालों से बहस करते हैं, जबकि असल में जिन्दगी ऑनलाईन की स्क्रीन से कहीं ज़्यादा असली होती है। कई लोगों ने लिखा, "तीसरे पक्ष से बुकिंग करने वाले ग्राहक अक्सर सबसे ज़्यादा सिरदर्द बनते हैं।"

सेवा क्षेत्र में काम करने वालों की कहानी, हर जगह एक जैसी!

भारत में भी चाहे होटल का रिसेप्शन हो, रेलवे स्टेशन की टिकट खिड़की हो, या बैंक का काउंटर—सेवा देने वाला कर्मचारी हमेशा 'हर समस्या का जिम्मेदार' बना दिया जाता है। एक कमेंट (u/harrywwc) ने तो मज़ाक में कहा, "इन ग्राहकों के दिमाग में कभी उनकी खुद की गलती नहीं होती, तो फिर दोषी कौन? रिसेप्शनिस्ट!"

कुछ ने राय दी कि, "ऐसे मामलों में ज़्यादा सफाई देने की ज़रूरत नहीं, सीधा बोल दो—'सॉरी, वो कमरा उपलब्ध नहीं है।'"

आखिर में—सीख क्या है?

इस किस्से से यही सीख मिलती है कि ग्राहक सेवा क्षेत्र में काम करना आसान नहीं, खासकर जब लोग अपनी गलती मानने को तैयार न हों। होटल, बैंक या कोई भी दफ्तर हो, हर जगह ऐसे ग्राहक मिलेंगे जो 'हर बार सही' होने का दावा करेंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि न ग्राहक हमेशा सही होता है, न कर्मचारी हमेशा गलत।

तो अगली बार जब आप होटल जाएँ, तो याद रखिए—ऑनलाइन कन्फर्मेशन के बावजूद, असलियत होटल वालों के पास ही होती है। और अगर गलती हो जाए, तो रिसेप्शनिस्ट पर गुस्सा निकालने से अच्छा है, मुस्कुरा कर कहिए—"कोई बात नहीं, अगली बार ध्यान रखेंगे!"

क्या आपके साथ भी कभी ऐसी अजीब बुकिंग का अनुभव हुआ है? कमेंट में अपना किस्सा जरूर बताइए!


मूल रेडिट पोस्ट: Guest are ridiculous sometimes