होटल की रिसेप्शन डेस्क से 911 तक: एक ऐसा दिन जब छुट्टी भी भाग गई!
कहते हैं, होटल की रिसेप्शन डेस्क पर हर दिन नया तमाशा होता है, लेकिन कुछ दिन ऐसे भी आते हैं जब ज़िंदगी आपको बिना टिकट झूले पर बिठा देती है। आप सोचते हैं कि आज तो छुट्टी है, चैन से बैठेंगे, लेकिन किस्मत की चाय में अचानक मसालेदार ट्विस्ट आ जाता है। आज की कहानी कुछ वैसी ही है – जिसमें एक साधारण दिन अचानक एक थ्रिलर फिल्म में बदल गया!
जब छुट्टी भाग गई और ड्यूटी गले पड़ गई
सोचिए, 26 साल से होटल इंडस्ट्री में काम करने के बाद भी अगर आपको 911 (यानि इमरजेंसी नंबर) जैसे नंबर पर बार-बार कॉल करनी पड़ जाए, तो कैसा लगेगा? यही हुआ हमारे होटल रिसेप्शनिस्ट के साथ। वैसे तो उन्होंने पिछले साल भी एक बार 911 पर कॉल की थी, जब एक मेहमान को एलर्जी के कारण जानलेवा झटका लगा था, और इस बार फिर वही हाल!
मज़े की बात ये है कि आज वे ड्यूटी पर होने ही नहीं वाले थे। उन्होंने तो छुट्टी की अरज़ी लगा रखी थी, लेकिन उनकी जगह आने वाली सहकर्मी को अचानक अपने पोते का क्रिकेट मैच याद आ गया (अब आप ही बताइए, क्या पोता मैच अचानक खेलता है?)। जनाब, भारतीय दफ्तरों में भी ऐसे बहाने खूब चलते हैं – “अरे साहब, आज तो मामा जी की तबीयत खराब हो गई...”। खैर, मजबूरी में रिसेप्शनिस्ट साहब को वापस डेस्क संभालनी पड़ी।
“मदद करो!” – और फिर सब बदल गया
सब कुछ सामान्य चल रहा था, तभी अचानक एक अनजान व्यक्ति, केवल बॉक्सर पहनकर, लड़खड़ाते हुए रिसेप्शन की तरफ आया और “मदद करो!” बोलते ही ज़मीन पर गिर पड़ा। अब बताइए, कौन-सा रिसेप्शनिस्ट ऐसी स्थिति के लिए तैयार रहता है? जनाब तुरंत भागे, देखा तो वो शख्स बेहोश है और दौरे आ रहे हैं। बिना देर किए 911 पर कॉल कर दी।
इसी बीच, होटल की सफाई सुपरवाइज़र आई और इशारा किया कि बाहर एक वैन अजीब सी जगह पर खड़ी है, जिसके आस-पास घास में तमाम सामान फैला हुआ है – फैमिली फोटो जिनमें लोगों के चेहरे काटे गए हैं, टूटा शीशा, और... एक बड़ा सा गुलाबी डिल्डो (जी हां, पश्चिमी देशों में ऐसी चीज़ें मिलना भी आम है)। साथ ही एक कीटनाशक वाला पंप भी पड़ा था। ये दृश्य किसी बॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं था!
पुलिस आई, हथियार निकले और राज़ खुलने लगे
पुलिस और एंबुलेंस कुछ ही मिनटों में आ गई। रिसेप्शनिस्ट साहब ने जितना जान सके, पुलिस को बताया – पर सच में, उन्हें खुद ज्यादा जानकारी नहीं थी। पुलिस ने वैन की तलाशी ली तो उसमें से दो राइफल और दो क्रॉसबो निकले! अब सोचिए, एक मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति, दो बंदूकें और दो क्रॉसबो लेकर घूम रहा हो – यह बात एक कमेंट करने वाले ने भी तंज में लिखी, “भई, ये तो बिलकुल भी डरावना नहीं है!” और किसी ने जोड़ दिया, “ये तो पूरी तरह ‘मुरिकन’ (अमेरिकन) बात हो गई!”
आखिरकार, पुलिस ने बताया कि उस व्यक्ति को स्ट्रोक आया था, हाल ही में उसका तलाक हुआ था और मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। एंबुलेंस उसे अस्पताल ले गई। थोड़ी देर बाद उसकी गर्लफ्रेंड आई, लेकिन चाबी न मिलने के कारण वैन वही रह गई।
होटल की बोरिंग जिंदगी में अचानक आया मसालेदार ट्विस्ट
इस घटना के बाद, रिसेप्शनिस्ट साहब ने चैन की सांस ली और यही सोचा कि काश, होटल की जिंदगी और बोरिंग होती। एक कमेंट में किसी ने लिखा, “आज तो आपका दिन बहुत व्यस्त रहा!” और किसी ने मज़ाक में सलाह दी, “ऐसे तनाव के बाद टेट्रिस जैसा कोई गेम खेलिए, वैज्ञानिक भी कहते हैं कि दिमाग को ठंडा करने में मदद करता है!” (वैसे, भारतीय लोग तो ऐसे सिचुएशन में चाय की प्याली या पकोड़े से ही राहत पा लेते हैं!)
एक और कमेंट में किसी ने कहा, “जब छुट्टी ली हो, तो पूरी तरह ‘नो कॉन्टैक्ट’ रहो, वरना ऐसा ही होगा!” – ये बात भारतीय दफ्तरों में भी खूब फिट बैठती है। वहीं, कुछ लोगों ने पुलिस के हथियार ज़ब्त करने पर सवाल उठाए, लेकिन जब पता चला कि वैन की चाबी ही नहीं मिली, तो सभी को तसल्ली हो गई कि कम से कम हथियार सुरक्षित हाथों में हैं।
निष्कर्ष – होटल की डेस्क पर हर दिन नया रोमांच
तो भाइयों और बहनों, होटल रिसेप्शन की ज़िंदगी बाहर से जितनी शांत दिखती है, अंदर से उतनी ही तगड़ी मिर्च-मसाला वाली होती है। कभी-कभी छुट्टी के दिन ही सबसे यादगार किस्से बन जाते हैं – जैसे आज हुआ। क्या आपके साथ भी किसी ऑफिस या नौकरी में ऐसा ‘अचानक’ वाला रोमांच हुआ है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए – और हां, अगली बार जब आप होटल जाएं तो रिसेप्शनिस्ट को नमस्ते कहना न भूलिए, क्या पता उनके पास भी कोई शानदार कहानी हो!
मूल रेडिट पोस्ट: And Yet Again I Have to Call 911