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होटल की रात: जब बाथरूम बना वाटरफॉल और मेहमान रह गए हैरान

गर्मियों में होटल के रिसेप्शन पर एक सज्जन का देर रात चेक-इन दृश्य। फिल्मी माहौल।
रात के बढ़ने के साथ, यह फिल्मी क्षण होटल में देर रात चेक-इन की तनाव और उम्मीद को दर्शाता है। क्या इस मेहमान का अनुभव सच में उतना ही आश्चर्यजनक होगा?

अगर आप सोचते हैं कि होटल की रिसेप्शन डेस्क पर काम करना सिर्फ चेक-इन और चेकआउट का खेल है, तो जनाब, आपको असली कहानी नहीं पता! अक्सर होटल का माहौल बाहर से शांत दिखता है, मगर अंदर क्या गजब की घटनाएँ घटती हैं, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। आज मैं आपको एक ऐसी ही सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें एक मामूली सी रात कैसे 'नदी के किनारे' में बदल गई, और होटल के कर्मचारियों की नींदें उड़ गईं।

गर्मी की चहलकदमी और बेशर्म क्रेडिट कार्ड

शुक्रवार की रात, समय 10:30 बजे। होटल में चहल-पहल थी, मगर सब कुछ सामान्य लग रहा था। रिसेप्शनिस्ट अपने काम में जुटा था, रात की शिफ्ट के लिए तैयारी कर रहा था। तभी एक सज्जन आए, जिनका चेक-इन होना था। सब कुछ बढ़िया चल रहा था कि अचानक कार्ड स्वाइप करते ही मशीन ने 'ना' कह दिया।

अब होटल में काम करने वाले जानते हैं – ग्राहक को पहली बार 'डिक्लाइन' बोलना मतलब बेइज्जती का खतरा! तो रिसेप्शनिस्ट ने बड़े अदब से कहा, "सर, आपका कार्ड शायद नहीं चल पाया।"

ग्राहक बड़े ठाठ से बोले, "अरे, मैंने खुद कार्ड फ्रीज किया है। मुझे तो ये रहना मुफ्त में पड़ना चाहिए, आप लोग मेरा कार्ड क्यों चार्ज करना चाहते हैं?"

दरअसल, साहब ने अपने पॉइंट्स से बुकिंग की थी, पर होटल वालों को 'इंसिडेंटल्स' के लिए कार्ड चाहिए ही होता है। दोनों के बीच बहस बढ़ने लगी, लाइन लंबी होती गई, बाक़ी मेहमान भी इंतज़ार में खड़े थे।

जब मेहमान ने दी "बड़ी लीकेज" की खबर

इसी बहस के बीच लाइन में पीछे खड़े एक और मेहमान ने आकर धीरे से कहा, "माफ़ कीजिए, नीचे बहुत बड़ा लीकेज हो रहा है, आपको देखना चाहिए।"

रिसेप्शनिस्ट ने मन ही मन सोचा – "अरे, लोग अक्सर बात का बतंगड़ बना देते हैं, कहाँ से आ गया लीकेज?" लेकिन फिर, कार्ड वाला मामला सुलझाने के बाद, बाक़ी मेहमानों को छोटे-छोटे सामान फ्री में दे दिए (सोचिए, कितना भारतीय जुगाड़ है!), और नीचे की ओर भागा।

होटल का बाथरूम बना 'नियाग्रा फॉल्स'

होटल की लॉबी दो मंज़िल की थी, बीच में घुमावदार सीढ़ियाँ। नीचे कॉन्फ्रेंस हॉल, ऊपर रिसेप्शन – पूरा बॉलीवुड मूवी वाला सेटअप!

नीचे जाते हुए रिसेप्शनिस्ट को बहते पानी की आवाज़ सुनाई दी। "साइनिंग सुइट" नाम के कमरे के पास पहुँचा, तो क्या देखता है – छत से पानी गिर रहा, टाइल्स गिरी पड़ी हैं, और पूरा कमरा तालाब बन चुका है!

दिमाग़ चकरा गया – अब क्या करें? तुरंत मैनेजर को फोन लगाया, जिन्होंने कहा – "मेनटेनेंस को बुलाओ, और ऊपर जाकर पानी की जड़ ढूंढो।"

तुरंत ऊपर की ओर भागा, बाथरूम में घुसते ही आंखें फटी की फटी रह गईं – किसी ने हर सिंक में टॉयलेट पेपर ठूंसकर, सभी नल पूरे खोल दिए थे। पानी काउंटर से गिरता हुआ, पूरे फर्श को स्विमिंग पूल में बदल चुका था!

'वेट बैंडिट्स' और होटल की कहानियाँ

अब आप सोच रहे होंगे, ऐसा किसने किया? कम्युनिटी में एक ने मज़ाक में कहा – "भई, ये तो 'वेट बैंडिट्स' की हरकत लगती है!" (शायद आपने भी 'होम अलोन' फिल्म देखी हो, जिसमें चोर इसी तरह पानी बहा देते हैं)।

कुछ लोगों ने कमेंट किया – "अरे, ऐसी शरारतें तो कॉलेज हॉस्टल में भी होती हैं! मैंने खुद देखा है जब प्लंबर गुस्से में सभी नालियों में टॉयलेट पेपर और पानी छोड़ गया था।"

एक टीचर ने लिखा – "स्कूल की लैब में बच्चों ने यही किया, अगले दिन तैरती कॉपी-किताबें मिलीं।"

लोगों ने यह भी कहा – "पुराने कर्मचारी की हरकत लगती है, मगर भई, इतना बड़ा रिस्क कौन लेता है जब होटल के पास तुम्हारी सारी जानकारी मौजूद है?"

किसी ने चुटकी ली – "इतना पानी बहा कि होटलवाले सोच रहे होंगे, अब बाथरूम में वाटरफॉल का टिकट लगाना पड़ेगा!"

होटल वालों की सीख और चटपटे किस्से

आखिरकार, रिसेप्शनिस्ट ने सारी टोंटियाँ बंद कीं, सफाई वालों को बुलाया गया, और मैनेजर ने वादा किया कि अगली बार कैमरा फुटेज से गुनहगार पकड़ा जाएगा।

यह किस्सा 'होटल इंडस्ट्री' की उस सच्चाई को उजागर करता है, जिसे आम लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं – यहाँ सिर्फ चाय-समोसे या आराम नहीं, कभी-कभी 'नीलगिरी झरना' भी मिल जाता है!

हमारे देश में भी ऐसे किस्से आम हैं – कभी शादी के पंडाल में पाइप फट जाए, तो लोग चाय की जगह पानी में तैरते मिलते हैं। होटल का बाथरूम हो या कॉलेज का हॉस्टल, शरारती दिमाग हर जगह मिलेंगे।

तो अगली बार जब आप होटल जाएँ, रिसेप्शनिस्ट की मुस्कान के पीछे छुपी थकान और जुगाड़ को ज़रूर समझिएगा – कौन जाने, पिछली रात वहाँ भी कोई 'नियाग्रा फॉल्स' गिरा हो!

आपकी राय क्या है?

क्या आपके साथ भी कभी ऐसी कोई अजीब या मज़ेदार घटना हुई है – होटल, हॉस्टल या ऑफिस में? नीचे कमेंट में अपना अनुभव ज़रूर साझा कीजिए। और हाँ, अगली बार जब होटल जाएँ, बाथरूम में पानी देख मुस्कुरा दीजिएगा – शायद वहाँ भी कोई 'वेट बैंडिट' अपनी छाप छोड़ गया हो!


मूल रेडिट पोस्ट: Oh wow he wasn't exagerating