होटल की रात: जब गद्दा जला और डस्टबिन बना टॉयलेट
सोचिए, आप एक होटल में रात की ड्यूटी पर हैं, चारों तरफ़ सन्नाटा है और अचानक होटल के गलियारे में धुआं-धुआं सा माहौल बन जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ एक नाइट पोर्टर के साथ, जो 1981 में लंदन के एक बड़े होटल में काम कर रहा था। अब हमारे यहां तो होटल वाला भी अक्सर भगवान से यही प्रार्थना करता है कि मेहमान सुख-शांति से रहें, लेकिन अंग्रेज़ मेहमानों की हरकतें कभी-कभी हमारे यहां के 'बाराती' भी मात खा जाएं!
होटल का वो धुआंधार किस्सा
जिस रात की घटना है, सब कुछ सामान्य था। तभी एक मेहमान का फ़ोन आता है — "भैया, पास वाले कमरे से धुएं की बदबू आ रही है।" अब ये सुनकर किसी का भी दिल बैठ जाए! क्या पता कोई बड़ा हादसा हो गया हो। दो नाइट पोर्टर भागते हुए कमरे तक पहुंचे। दरवाज़ा खुलवाया तो सामने दो अंग्रेज़ साहब— दोनों नशे में चूर, एक हाथ में सिगरेट लिए गद्दे को ही आग का नया ठिकाना बना चुके थे!
अब सोचना ज़रा, गद्दा जला जा रहा है, और दोनों साहब ऐसे लेटे हैं जैसे 'शोले' फिल्म के वीरू-जय। नाइट पोर्टर हिम्मत दिखाकर एक को गद्दे से हटाता है, गद्दे को घसीट कर बाहर लाता है और फायर एक्सटिंग्विशर से आग बुझाता है। भाई, ऐसा सीन तो हमारे यहां शादी के बाद के 'फर्स्ट नाइट' में भी नहीं होता!
शराब और शरारत: जब शराफत गई छुट्टी पर
आग बुझी तो लगा कि अब मामला शांत हो जाएगा। लेकिन असली ड्रामा तो अभी बाकी था! जिसमें से एक साहब, जो अब तक गद्दे को आग दिखा चुके थे, ने बाथरूम जाने की जहमत ही नहीं उठाई। सबके सामने, शर्म-हया ताक पर रखकर, डस्टबिन को ही अपना टॉयलेट बना डाला। अब ये तो वही बात हो गई — "जहाँ सोचना था, वहाँ किया ही नहीं, और जहाँ करना था, वहाँ सोचा ही नहीं!"
हमारे यहां तो ऐसे नज़ारे देखने को तब मिलते हैं जब किसी की बारात देर रात गांव लौटती है और सभी को पानी की किल्लत हो जाए। लेकिन होटल के कमरे में, वो भी लंदन में— ये तो हद ही हो गई!
सोशल मीडिया पर चर्चा: "अरे, कम से कम आग पर ही डाल देते!"
इस किस्से ने ऑनलाइन भी धमाल मचा दी। एक पाठक ने मज़ाकिया टिप्पणी की, "अरे, अगर पेशाब करना ही था तो आग पर ही कर देते, कुछ तो फायदा होता!" अब ये बात सुनकर सबको अपने गांव-शहर के वो 'फायर फाइटर' दोस्त याद आ जाते हैं, जो कभी-कभी आग बुझाने के लिए अपनी खुद की जुगाड़ू तकनीक इस्तेमाल कर लेते हैं!
ऐसी घटनाएं हमें ये भी सिखाती हैं कि चाहे देश कोई भी हो, जब शराब सिर पर चढ़ जाए तो इंसान से बड़ी मुसीबत कोई नहीं। और होटल के कर्मचारी— उनका काम अक्सर हम भारतीयों के 'बाराती सेवा' जैसा ही होता है। फर्क बस इतना है कि यहां अंग्रेज़ मेहमान थे, लेकिन हरकतें देसी बारातियों जैसी ही!
होटल वर्कर्स की जिंदगी: कभी हंसी, कभी आफत
इन घटनाओं से यह भी समझ आता है कि होटल में काम करने वाले लोग कितनी मुसीबतें झेलते हैं। उनके लिए हर रात एक नई कहानी लेकर आती है—कभी किसी की बदतमीज़ी, तो कभी किसी की मासूमियत।
हमारे यहां तो होटल स्टाफ़ को 'भैया' कहकर पुकारा जाता है, लेकिन उनके धैर्य और समझदारी को कम मत आंकिए। चाहे मामला आग बुझाने का हो, या किसी की शर्म बचाने का—हर हाल में स्टाफ़ को ही संभालना पड़ता है।
आपकी बारात में भी ऐसे किस्से हुए हैं?
अब आपको ये मज़ेदार और थोड़ा अजीब-सा किस्सा कैसा लगा? क्या आपके किसी दोस्त या रिश्तेदार की शादी या पार्टी में कभी ऐसी कोई घटना हुई है, जब कोई हदें पार कर गया हो? नीचे कमेंट में जरूर बताइए! और हां, अगली बार होटल जाएं तो स्टाफ़ को सलाम करना न भूलें—क्या पता, किस रात कौन-सी फिल्मी कहानी बन जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: Why go to the bathroom when you can do it right here.