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होटल की मिस बी: एक कमरे की जिद और रिसेप्शन पर हुए तमाशे की कहानी

होटल लॉबी में Ms. B चेक-इन करते हुए, अपने पसंदीदा कमरे 804 या 904 के बारे में उत्सुकता से पूछती हुई, फोटोयथार्थ दृश्य।
रविवार की धूप में Ms. B होटल लॉबी में पहुँचती हैं, अपने पसंदीदा कमरों 804 या 904 के बारे में खुशी-खुशी पूछती हैं। यह फोटोयथार्थ चित्र उनकी उत्सुकता को दर्शाता है, जबकि वे फ्रंट डेस्क स्टाफ के साथ बातचीत कर रही हैं, जो मेहमाननवाज़ी की व्यक्तिगत छाप को उजागर करता है।

होटल में रिसेप्शन डेस्क पर काम करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। यहाँ हर रोज़ नए-नए किरदार आते हैं—कुछ सीधे-सादे, तो कुछ ऐसे कि आपकी हँसी छूट जाए या फिर माथा पकड़ लें। ऐसी ही एक अनोखी कहानी है मिस बी की, जो कमरे की जिद लेकर होटल स्टाफ के होश उड़ाने आ गईं।

रविवार की दोपहर थी, होटल में चेक-इन की भीड़ नहीं थी—बस दो-तीन मेहमान बाकी थे। तभी दरवाज़े से मिस बी की एंट्री हुई। आते ही बिना दुआ-सलाम के बोलीं, "मेरा कमरा तैयार है?" रिसेप्शनिस्ट को अंदाज़ा था कि आज कुछ अलग होने वाला है...

हर बार ‘04’ वाले कमरे की ज़िद

मिस बी का कहना था कि वो हमेशा या तो 804 या 904 नंबर वाले कमरे में ही रुकती हैं। ये कमरे होटल के सबसे पसंदीदा कमरों में आते थे—वैसे हमारे यहाँ भी कई बार लोग कहते हैं, "भाई, पिछली बार वाली खिड़की वाला कमरा चाहिए!" होटल वाले जानते थे कि मिस बी के लिए वही कमरे उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्हें 902 नंबर, जो लगभग वैसा ही था, ऑफर किया गया।

यह सुनते ही मिस बी का रिएक्शन देखकर रिसेप्शनिस्ट के होश उड़ गए—वो दीवार से चिपक गईं, अजीब-अजीब आवाज़ें निकालने लगीं, सिर दीवार पर मारने लगीं। भाई, ऐसा नाटक तो बॉलीवुड की हीरोइन भी सोच-समझकर करती है!

स्टाफ ने समझाया, "मैम, 902 का लेआउट और व्यू बिल्कुल वैसा ही है," लेकिन मिस बी का जवाब था, "मुझे हमेशा ऊपर वाले 04 नंबर का ही कमरा चाहिए, और इस बार भी वही चाहिए!" जब बताया गया कि वो कमरे पहले से बुक हैं, तो उन्होंने रोना शुरू कर दिया और बोलीं, "मैं कहीं नहीं जा रही!" बस, फिर क्या था—एक घंटे तक रिसेप्शन पर खड़ी रहीं, दीवार घूरती रहीं।

होटल स्टाफ की मुश्किलें और इंटरनेट की प्रतिक्रिया

होटल स्टाफ के लिए ऐसे मेहमान किसी सिरदर्द से कम नहीं। एक कमेंट करने वाले ने कहा, "अगर हमारे यहाँ कोई ऐसा करता, तो सीधा बाहर निकाल देते, ज़रूरत पड़ती तो पुलिस बुला लेते।" (ये बात भी सही है, भारत में भी होटल वाले कई बार ऐसे मेहमानों से परेशान हो जाते हैं!) लेकिन यहाँ रिसेप्शनिस्ट ने 'इग्नोर' करने की नीति अपनाई, फोन अटेंड किए, बाकी काम निपटाए और मिस बी को 'ठंडा' होने दिया।

एक और यूज़र ने तो मज़ेदार बात कही—"ऐसी अजीब हरकतें क्यों झेलते हो? सीधे पुलिस बुला लो, कहो मानसिक स्वास्थ्य जांच की ज़रूरत है!" लेकिन रिसेप्शनिस्ट (OP) ने बताया कि उन्हें कोई खतरे की भावना नहीं लगी, और ऐसे 'अनोखे' मेहमान समंदर किनारे के पर्यटन स्थलों पर आम हैं।

बार-बार वही कमरा: ग्राहक का अधिकार या सिरफिरी जिद?

भारत में भी अक्सर देखा है कि कुछ लोग होटल में वही कमरा, वही बैड, वही खिड़की—सब कुछ वैसा ही चाहते हैं। एक कमेंट में किसी ने बताया, "हमारे यहाँ एक अंकल हर बार वही एक्सेसिबल रूम मांगते थे, क्योंकि वहाँ टीवी की आवाज़ पर कोई शिकायत नहीं करता था (जबकि करता था!), और स्टाफ को बाकी गेस्ट्स को वहाँ न रुकने देने के लिए कहते थे।" कुछ तो अपने मनपसंद कमरे में फ्रिज-माइक्रोवेव भी छुपा लेते थे!

यहाँ सवाल ये है—क्या होटल हर बार ग्राहक की पसंद का कमरा देना ज़रूरी है? असलियत ये है कि होटल लिमिटेड कमरे और नियमों के साथ चलते हैं, और हर बार वही सुविधा देना मुमकिन नहीं। जैसा एक कमेंट में कहा—"ऐसा लगता है जैसे मिस बी खुद को महल की रानी समझती हैं, जबकि उन्होंने सिर्फ एक बार उस कमरे में ठहराव किया था!"

मानसिक स्वास्थ्य बनाम ‘ड्रामा क्वीन’—कैसे समझें फर्क?

मिस बी की हरकतों पर इंटरनेट पर काफी बहस हुई। किसी ने पूछा, "क्या उन्हें ऑटिज़्म है?" तो जवाब आया—"हर बार ऐसी नाटकीयता का मतलब मानसिक बीमारी नहीं होता। ऑटिज़्म वाले लोग ज़्यादातर भीड़ से बचना चाहते हैं, न कि सबका ध्यान खींचें!" एक और कमेंट में लिखा—"ड्रामा क्वीन होना और ऑटिज़्म होना अलग चीज़ें हैं।"

कई लोगों ने कहा कि ऐसे मेहमानों के लिए सहानुभूति रखनी चाहिए, लेकिन होटल को हर बार स्पेशल ट्रीटमेंट देने की ज़रूरत नहीं। रिसेप्शनिस्ट ने भी यही कहा—"मैंने कभी खतरा महसूस नहीं किया, बस चुपचाप अपना काम किया और उनसे दूरी बनाकर रखी।"

अंत में...

आखिरकार, मिस बी ने हार मानी, 902 नंबर के कमरे में चेक-इन किया और अपने बैग्स के लिए मदद मांगी। लेकिन जब उनकी पसंद का स्टाफ नहीं आया, तो बोलीं, "अगर Br नहीं आया तो मदद नहीं चाहिए!" अब आप ही सोचिए, होटल वालों की ज़िंदगी कितनी रंगीन हो सकती है!

अक्सर हम होटल स्टाफ को सिर्फ 'सर्विस देने वाला' समझते हैं, लेकिन उनके सामने रोज़ाना ऐसे-ऐसे किरदार आते हैं कि उनकी कहानियाँ किसी मसालेदार टीवी सीरियल से कम नहीं। आपको क्या लगता है, ऐसे मेहमानों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए—सहानुभूति, सख्ती या बस 'इग्नोर'?

अपनी राय नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें—क्या आपके साथ कभी ऐसा अजीब अनुभव हुआ है?


मूल रेडिट पोस्ट: Ms. B