होटल के मैनेजर ने चालाक मेहमान को उसी की चाल में फँसा दिया!
अगर आप कभी होटल में रुके हैं या बुकिंग करवाई है, तो आपने भी सुना होगा—"नो-शो" चार्ज! यानी होटल में समय पर न पहुँचने पर एक रात का पैसा कटना तय। लेकिन जुगाड़ू लोग हर जगह होते हैं, और आज की कहानी भी एक ऐसे ही मेहमान की है, जिसने होटल को चकमा देने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार खुद ही फँस गया।
मान लीजिए, आप किसी होटल में बुकिंग करवाते हैं, लेकिन जाना नहीं है। क्या करें? कई लोग अपना कार्ड "ऑफ" कर देते हैं या उसमें से पैसे हटा लेते हैं, ताकि होटल जब चार्ज करने की कोशिश करे, तो ट्रांजैक्शन फेल हो जाए। सोचा—बच गए! लेकिन भैया, होटलवाले भी इतने भोले नहीं हैं।
होटल की दुनिया में भी चलता है 'लंबा खेल'
इस कहानी के नायक हैं एक होटल के मैनेजर, जिनका सामना अक्सर ऐसे चालाक मेहमानों से होता है। खासकर वो जो किसी तीसरे पक्ष (third-party) वेबसाइट से बुकिंग करवाते हैं। इन साइट्स की टाइमिंग और रूल्स अलग होते हैं; होटल का सिस्टम रात 3 बजे बिजनेस डेट बदलता है, लेकिन उस वेबसाइट का दिन बहुत पहले बदल जाता है। ऐसे में अगर कोई गेस्ट नहीं आता और कार्ड फेल हो गया, तो होटल के हाथ खाली रह जाते हैं—ऊपर से कमिशन का खर्चा अलग!
मैनेजर साहब ने इससे तंग आकर एक नया नियम बना दिया—अब ऐसी साइट्स से आने वाली हर बुकिंग की तुरंत कार्ड ऑथराइजेशन होगी। मतलब, बुकिंग के वक्त ही कार्ड से पैसे होल्ड कर लिए जाएँगे, ताकि बाद में कोई "हेरा-फेरी" न कर सके। अगर कार्ड फेल, तो गेस्ट को समय रहते सूचित कर दिया जाए।
चालाकी बनाम धैर्य: किसकी जीत?
एक रात जब मैनेजर साहब अकाउंटिंग का काम निपटा रहे थे, तब एक बुकिंग पर उनका ध्यान गया—इस बार कार्ड में पैसे ही नहीं थे! अब न तो बुकिंग कैंसल कर सकते, न ही चार्ज लगा सकते। 30 डॉलर का नुकसान सीधा-सीधा।
लेकिन यहाँ कहानी में ट्विस्ट आता है। मैनेजर साहब ने हार मानने के बजाय 'लंबा खेल' खेला। हर हफ्ते, कभी कम अमाउंट तो कभी पूरा, कार्ड को बार-बार ट्राय करते रहे। महीने भर यही चला, लेकिन कार्ड में पैसे नहीं आए। फिर मैनेजर छुट्टी पर चले गए।
लौटकर आए तो फिर से कोशिश की, और इस बार कमिशन अमाउंट ट्राय किया—कमाल हो गया, ट्रांजैक्शन पास! फिर धीरे-धीरे पूरी रकम वसूल कर ली। क्या बात है! गेस्ट समझा था होटलवाले हार मान लेंगे, मगर यहाँ तो उल्टा हो गया।
कम्युनिटी की राय: "जैसी करनी वैसी भरनी"
रेडिट पर इस किस्से को पढ़कर सबकी हँसी छूट गई! एक यूज़र ने बड़े फिल्मी अंदाज में लिखा, "ग्राहक जी, अब आपकी बारी है—खेल शुरू!" (जैसे हमारे यहाँ 'कौन बनेगा करोड़पति' में होता है—"अब आपके लिए ये सवाल है...")
दूसरा कमेंट था—"ये तो वही बात हुई, चुपचाप अपनी चाल चलते रहो, आखिर में बाज़ी अपने हाथ में होगी।" कई लोगों ने शेयर किया कि उन्होंने भी होटल, रेस्टोरेंट या ऑफिस की नौकरी में ऐसे चालू ग्राहकों से निपटने के लिए हफ्तों-हफ्तों तक कार्ड ट्राय किया, और जब अचानक पैसे कटे तो गेस्ट का चेहरा देखने लायक था!
एक कमेंट में कोई मज़ाकिया अंदाज में बोला—"हमारे यहाँ भी 'डू नॉट रेंट' लिस्ट है, जो एक बार धोखा देता है, फिर से बुकिंग करने आए तो पहले पुराना बकाया चुकाओ, वरना भैया—दरवाज़ा बंद!"
भारतीय संदर्भ: हमारे यहाँ भी जुगाड़ कम नहीं
कई बार हमारे भारत में भी लोग 'बुकिंग' तो कर लेते हैं—शादी हॉल, कैटरिंग, या होटल, और फिर ऐन वक्त पर मना कर देते हैं। लेकिन अब डिजिटल पेमेंट और स्मार्ट मैनेजरों की वजह से वो दिन गए जब आसानी से बचा जा सकता था। अब तो "पेमेंट फेल" दिखाने पर बार-बार ट्राय होती है, और जैसे ही अकाउंट में पैसे आते हैं, ऑटोमेटिक कट जाता है। और अगर कोई बार-बार ऐसा करे तो अगली बार बुकिंग के लिए नाम ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाता है।
रेडिट की कम्युनिटी भी यही कहती है—"जिन्हें लगता है होटलवाले भूल जाते हैं, वे गलत हैं। चाहे एक महीना लगे या तीन साल, होटल वाले अपना पैसा वसूल करके ही मानते हैं!"
सीख: ईमानदारी में ही भलाई है
इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि छोटी-छोटी चालाकियाँ कभी-कभी खुद के लिए ही मुसीबत बन जाती हैं। जैसे भूतपूर्व मेहमान ने खुद माना—"ओह, आप ही होटल हो? अच्छा, ठीक है!" यानी दिल ही दिल में जानता था कि गड़बड़ की थी। ऐसे में बेहतर यही है कि अगर बुकिंग की है तो नियम के हिसाब से कैंसल करें, वरना देर-सवेर होटलवाले अपना हक वसूल लेंगे।
तो दोस्तों, अगली बार जब भी होटल या किसी सर्विस की बुकिंग करें, तो ईमानदारी से पेश आएँ। क्या पता, कहीं आपके पीछे भी कोई 'लंबा खेल' खेल रहा हो!
आपकी क्या राय है? क्या आपने या आपके किसी जानने वाले ने कभी ऐसी चालाकी की है? कमेंट में जरूर बताएँ, और ऐसी और मजेदार कहानियों के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ!
मूल रेडिट पोस्ट: Turn off your card so you can avoid a cancellation fee? I can play the long-game