होटल के मीटिंग रूम में इंटरव्यू का तमाशा: 'मुझे क्या, मैं ज़िम्मेदार नहीं हूँ!
कभी-कभी होटल के रिसेप्शन पर ऐसे-ऐसे नज़ारे देखने को मिल जाते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। आप सोचिए, एक होटल जहां लोग चैन से रुकने आते हैं, वहां अचानक सुरक्षा गार्ड की भर्ती का मेला लग जाए और पूरा माहौल ही हंसी का अखाड़ा बन जाए! आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां होटल का मीटिंग रूम बना इंटरव्यू सेंटर, और रिसेप्शनिस्ट के सामने सवालों की झड़ी लग गई—"भाई, इंटरव्यू लेने वाले कहां हैं?"
होटल का मीटिंग रूम बना नौकरी का मैदान
अब बात कुछ यूं है कि पिछले एक महीने से एक सुरक्षा कंपनी हमारे होटल के मीटिंग रूम का इस्तेमाल इंटरव्यू के लिए कर रही थी। शनिवार की सुबह थी और लगभग छह उम्मीदवार सुबह 9 बजे की ताजगी के साथ पहुंच गए—शायद सोच रहे होंगे, "आज तो नौकरी पक्की!" लेकिन इंटरव्यू लेने वाले दोनों अधिकारी खुद ही लेट-लतीफ निकले, पूरे 45 मिनट बाद पहुंचे। भारत में अगर कोई दुल्हन शादी में लेट हो जाए, तो सब चुपचाप मान लेते हैं, लेकिन इंटरव्यूअर लेट हो जाए तो उम्मीदवारों का सब्र टूटना लाज़मी है!
पंद्रह मिनट बाद एक उम्मीदवार ने रिसेप्शन से पूछ ही लिया, "भैया, इंटरव्यू लेने वाले कहां हैं?" रिसेप्शनिस्ट ने भी मस्त अंदाज में कहा, "मुझे नहीं पता, शायद अपने कमरे में होंगे। वैसे भी, मैं उनकी ज़िम्मेदारी नहीं हूं और वो अपने कमरे में क्या कर रहे हैं, इससे मुझे कोई लेना-देना नहीं!"
"मुझे क्या, मैं छोड़ रही हूँ!"
इतने में, इंटरव्यू शुरू होते-होते एक महिला अधिकारी उठीं और अपने कमरे में जाकर सामान पैक किया और सीधा रिसेप्शन आकर बोलीं, "अब और नहीं, मैं चेकआउट कर रही हूँ!" बाद में पता चला, वो कोई उम्मीदवार नहीं, बल्कि खुद इंटरव्यू लेने वाली थीं। कुछ लोगों को ये भी अजीब लगा, लेकिन एक कमेंट में किसी ने कहा, "वो महिला सही थीं! अगर इंटरव्यूअर 45 मिनट लेट हैं, तो वहां रहना ही क्यों? समय की कद्र करना सीखिए।"
उम्मीदवार या जेल से छूटे कैदी?
अब उम्मीदवारों की बात करें तो देखने में सब ऐसे लग रहे थे जैसे अभी-अभी जेल से लौटे हों या फिर जल्द ही जाने वाले हों! एक कमेंट में किसी ने मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा, "हो सकता है यही लोग ड्रग टेस्ट पास कर सकते हैं, इसलिए बुलाया गया है!" भारत में अक्सर सुनते हैं कि सरकारी नौकरी के लिए चचेरा-ममेरा भी लाइन में लग जाता है, लेकिन यहां तो हालत ही अलग थी—"सांस चल रही है? नशा नहीं करते? बस, नौकरी पक्की!"
होटल की चतुराई और कंपनी की चूक
अब होटल की बात करें तो होटल की जनरल मैनेजर (GM) को क्या पता था कि मीटिंग रूम एक महीने तक मुफ्त में चलेगा! उन्होंने पहले ही मीटिंग रूम के पैसे नहीं लिए और अब पछता रही थीं। लेकिन कमरे का किराया कंपनी ने तीसरे पक्ष के माध्यम से बुक किया था, तो होटल वालों को उनका पैसा मिल गया—पर मीटिंग रूम की फीस गई पानी में!
यहाँ एक और कमेंट ने हंसने का मौका दिया—"अगर सुरक्षा कंपनी को समय पर आना ही नहीं आता, तो सुरक्षा कैसे संभालेंगे?" एक और ने जोड़ा, "अगर कंपनी इतनी लापरवाह है तो मीटिंग रूम, बिजली-पानी, सबका बिल पकड़ाओ!"
सुरक्षा कंपनी के इंटरव्यू: कौन जिम्मेदार?
यह पूरी घटना देखकर लगता है कि कहीं-कहीं कॉर्पोरेट दुनिया में भी 'जुगाड़' और 'चलता है' वाला सिस्टम चलता है। अगर सुरक्षा कंपनी खुद अपने इंटरव्यू नहीं संभाल पा रही, तो सुरक्षा क्या खाक देंगी? एक कमेंट में तो किसी ने मज़ाक में ICE (अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी) की बात छेड़ दी—"लगता है, गुंडे और बदमाश ही रखे जा रहे हैं!"
वहीं, किसी ने कहा, "ऐसी कंपनियों को होटल का मीटिंग रूम क्यों चाहिए? अपना ऑफिस नहीं है क्या?" भारत में भी बहुत बार कंपनियां सस्ते में काम निकालने के लिए ऐसी जुगाड़ ढूंढती हैं—कभी बैंक्वेट हॉल, कभी शादी का मंडप, और कभी-कभी तो मंदिर का प्रांगण भी!
निष्कर्ष: होटल, नौकरी और जुगाड़ का मेल
इस किस्से में होटल वालों ने तो पैसे निकाल ही लिए, लेकिन मीटिंग रूम की फ्री सर्विस देख कर GM का माथा जरूर ठनका होगा। सुरक्षा कंपनी की गैर-ज़िम्मेदाराना हरकतें और अजीब उम्मीदवारों की टोली देख कर यही कहा जा सकता है—"मुझे क्या, मैं ज़िम्मेदार नहीं हूं!"
आपका क्या अनुभव रहा है, जब किसी इंटरव्यू में अजीब हालात बने? क्या आपने भी कभी ऐसे लेट-लतीफ इंटरव्यूअर या अजीब उम्मीदवार देखे हैं? नीचे कमेंट में जरूर बताइएगा—शायद आपकी कहानी अगली बार हम सुनाएं!
मूल रेडिट पोस्ट: He's not my responsibility!