होटल के बाथरूम में खीरा! ऐसी हरकतें केवल फिल्मों में नहीं होती
कहते हैं होटल की दीवारें बहुत कुछ देखती हैं, लेकिन बोलती नहीं। पर भाई, आज जो किस्सा सुनेंगे, उसके बाद आप भी सोचेंगे—“अरे भइया, ये तो हद कर दी!” किसी बॉलीवुड मसाला मूवी में होता तो लोग बोलते, “ओवरएक्टिंग है।” मगर जनाब, ये सच्ची घटना है।
सुबह-सुबह, होटल की हाउसकीपर दीदी रोज़ की तरह सफाई में जुटी थीं। पर उस दिन का उनका सामना एक ऐसी चीज़ से हुआ, जिसे देखकर कोई भी बोलेगा—“हे भगवान, ये क्या देख लिया!”
होटल की सुबह और बाथरूम का रहस्य
हर सुबह की तरह, हाउसकीपर दीदी ने ब्रेकफास्ट के बाद लॉबी के बाथरूम में झाँका और फिर पूल एरिया की ओर बढ़ीं। पूल में तो कोई नहानेवाला नहीं था, पर बाथरूम का दरवाज़ा बंद! दस्तक देने पर अंदर से आवाज़ आती है—“अंदर कोई है।”
दीदी ने सोचा, चलो बाकी सफाई कर लेती हूँ। करीब आधा घंटा बीत गया, फिर से बाथरूम की तरफ गईं—फिर वही आवाज़, वही आदमी!
आखिरकार, एक आदमी बाहर आया, बड़ी अजीब-सी घबराई चाल, हाथ में सामान। दीदी ने कोई सवाल नहीं किया—“अपना काम करो, बाकी की चिंता छोड़ो!”—यही उस दिन का उनका मंत्र था।
लॉबी में फिर से वही ड्रामा
अब दीदी ने सोचा, चलो लॉबी की गहराई से सफाई हो जाए। लेकिन तब तक पुरुषों के बाथरूम का दरवाज़ा भी बंद! दस्तक दी, तो फिर से वही आवाज़—“अंदर कोई है।”
मन में सवाल आया—“भैया, ये पब्लिक टॉयलेट है, पूरा बंद क्यों?” लेकिन क्या कर सकती थीं, महिलाओं का बाथरूम साफ़ किया, फिर भी वो दरवाज़ा नहीं खुला।
आखिरकार, वही आदमी बाहर आया—इस बार हाथ में लैपटॉप!
अब तो हद हो गई। दीदी अंदर गईं, सफाई के लिए। बाहर रिसेप्शन पर बैठी सहकर्मी से मज़ाक में बोलीं, “आज तो दो-दो बार बाथरूम में घंटों बैठे लोग मिल रहे हैं, क्या जमाना आ गया!”
खीरे का रहस्य: “हे भगवान, ये लोग...!”
सफाई करते-करते अचानक दीदी हँसते-हँसते बाहर निकलीं, हाथ में एक प्लास्टिक बैग, और उसमें कुछ बड़ा, लंबा और चमचमाता—एक ताज़ा खीरा!
दीदी दूर से बैग लहरा रही थीं, जैसे कोई बम हो! बोलीं, “ये क्या लोग हैं! अब खीरा भी बाथरूम में छोड़ा जाता है?”
इस किस्से की चर्चा होटल की सुरक्षा टीम तक पहुँच गई। आखिरकार, सीसीटीवी कैमरा देखा गया।
अब जो सामने आया, वो तो किसी CID एपिसोड से कम नहीं था—वही आदमी, जो कमरे में महिला के साथ रुका था (खर्चा कंपनी का), चुपचाप अपना “सामान” लेकर बाथरूम में गया और खीरा वहीं छोड़ गया।
होटल स्टाफ की हालत—“अगर हमें ये देखना पड़ा है, तो अब आप भी सुनिए!”
कम्युनिटी की प्रतिक्रिया: “भैया, ये क्या चल रहा है!”
Reddit कम्युनिटी ने इस किस्से पर मसालेदार कमेंट्स की झड़ी लगा दी।
एक यूज़र ने लिखा, “भैया, खीरे का बेस चौड़ा होना चाहिए, नहीं तो अस्पताल में एक्स-रे करवाना पड़ेगा!”
दूसरे ने हँसी में जोड़ा, “कम से कम आदमी ने खीरा कूड़ेदान में तो फेंका, वरना सफाईकर्मियों पर दया आनी चाहिए।”
एक डॉक्टर का किस्सा भी आया—“मेरी कज़िन रेडियोलॉजिस्ट है, उसने ऐसी-ऐसी चीज़ें देखी हैं, जिनके बारे में वो कभी बात भी नहीं करती।”
किसी ने बड़े मज़े से कहा, “भइया, होटल के बाथरूम में खीरा छोड़ना कोई आम बात तो नहीं, पर ये आदमी ‘ऑर्गेनिक’ ऑप्शन चुन गया, उसकी हिम्मत को सलाम!”
कुछ लोग तो मज़ाक में बोले, “अब तो खीरे का अचार भी देखते डर लगेगा!”
होटल में ऐसे किस्से—कभी हँसी, कभी हैरानी
कई बार हमें लगता है कि होटल में बस चाय-नाश्ता, फाइव स्टार सर्विस और आराम ही होता है। मगर जिन कर्मचारियों की मेहनत से ये सब कुछ मुमकिन होता है, उन्हें रोज़ाना ऐसे-ऐसे वाकये देखने पड़ते हैं, जिनकी कल्पना भी आम इंसान नहीं कर सकता।
इस कहानी से साफ़ है—किसी की भी नौकरी उतनी सीधी नहीं जितनी दिखती है।
अगली बार जब आप होटल जाएँ और सफाईकर्मी को देखें, तो एक मुस्कान ज़रूर दीजिए। कौन जाने, आज उनके दिन में क्या ‘खीरा’ आया हो!
आपके विचार?
क्या आपके साथ या आपके किसी जाननेवाले के साथ भी कभी ऐसी कोई अजीब घटना हुई है?
कमेंट में बताइए—और अगर आप होटल स्टाफ हैं, तो आपके किस्से भी जरूर पढ़ना चाहेंगे!
“जैसी करनी, वैसी भरनी”—इस मुहावरे की सच्चाई होटल के इन किस्सों में खूब झलकती है।
तो अगली बार होटल के बाथरूम में जाएँ, तो सोचिएगा—कहीं कोई हाउसकीपर दीदी किसी खीरे का इंतज़ार तो नहीं कर रही?
मूल रेडिट पोस्ट: A cucumber?!