होटल की फ्रंट डेस्क पर ‘शाइनी’ मेहमान का ड्रामा: हर दिन वही कहानी!
गर्मियों की छुट्टियों का सीजन, होटल की लाबी में चहल-पहल, और इसी भीड़-भाड़ में रोज़ एक ‘अलम्यूनियम’ मेम्बर (यानि सबसे कम स्तर का लॉयल्टी कार्डधारी) आते हैं और हर बार वही मांग – “भैया, मुझे सुइट में अपग्रेड कर दो!” अब सोचिए, होटल में बस एक ही सुइट है, वो भी अगले दो हफ्तों तक बुक्ड! लेकिन साहब का जज़्बा ऐसा कि हर दिन नई उम्मीद के साथ फ्रंट डेस्क पर हाज़िर।
रोज़-रोज़ की वही जद्दोजहद: “मुझे सुइट चाहिए!”
हर सुबह वही सीन – मेहमान आते हैं, मुस्कुराते नहीं, सीधे मुद्दे पर – “आज सुइट खाली है क्या?” फ्रंट डेस्क वाला भी अब तो जैसे रटा-रटाया जवाब बन गया है – “सॉरी सर, वो सुइट अगले दो हफ्तों तक बुक्ड है, अगर कोई कैंसिल करता है तो जरूर देखेंगे।”
पर मेहमान की जिज्ञासा खत्म नहीं होती – “अच्छा, वो सुइट में कौन ठहरा है? क्या वो भी मेरे जैसे मेम्बर हैं? अगर उनका रिवॉर्ड स्टेटस मुझसे कम है तो उन्हें निकाल दो!” अब बताइए, कोई अपने घर आए मेहमान को ऐसे बोल सकता है क्या? होटल का नियम है: गेस्ट की प्राइवेसी सबसे ऊपर। लेकिन साहब को ये सब समझाना जैसे दीवार पर सिर मारना!
‘हक’ की हद पार: जब लॉयल्टी कार्ड सिर चढ़ जाए
हमारे देश में भी देखा गया है – कुछ लोग क्रेडिट कार्ड या लॉयल्टी प्रोग्राम को प्रतिष्ठा का सवाल बना लेते हैं। Reddit के एक कमेंट में किसी ने बड़ा दिलचस्प लिखा – “अगर ये खुद सुइट बुक करता और किसी ‘शाइनी’ मेम्बर के कहने पर उसे निकाल दिया जाता, तब क्या होता?” सही बात!
एक और टिप्पणी में होटल यात्रा करने वाले ने लिखा, “हम सब अल्ट्रा शाइनी हैं, कोई खास नहीं है। जो ज्यादा शोर मचाता है, उसकी पोल लाइन में ही खुल जाती है।” होटल में काम करने वालों के लिए ऐसे ‘शाइनी मेम्बर्स’ रोज़मर्रा की परेशानी बन जाते हैं, जिनको लगता है कि कार्ड दिखाने भर से सब कुछ मिल जाएगा।
भारतीय संदर्भ: ‘मेहमान नवाज़ी’ बनाम ‘मेहमान का सिर दर्द’
हमारे यहाँ ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा है, लेकिन कभी-कभी कुछ मेहमान भगवान से ज़्यादा सिर दर्द बन जाते हैं! होटल स्टाफ की मुश्किलें तो वही जानें – ना सामने वाले को मना कर सकते हैं, ना नियम तोड़ सकते हैं। Reddit पर ही एक कमेंट में लिखा था, “कोई बार-बार स्टाफ को परेशान करे, तो उसकी शिकायत ऊपर तक पहुंचानी चाहिए।”
ओरिजिनल पोस्टर ने भी बताया कि मेनेजमेंट सिर्फ पैसे की खातिर ऐसे मेहमानों को टोकता नहीं – मगर किस्मत देखिए, एक दिन होटल पूरी तरह बुक हो गया और साहब को कमरा ही नहीं मिला! Reddit पर किसी ने मज़ेदार कमेंट किया, “लगता है अब उनके बैग पहले से पैक थे!”
अपग्रेड का ‘भूत’ और खुदगर्जी का खेल
कुछ लोगों के लिए अपग्रेड मिलना बोनस की तरह होता है – “मुफ्त में कुछ अच्छा मिल गया तो गिफ्ट समझो!” लेकिन ऐसे मेहमान जो हर चीज़ पर अपना ‘हक’ जताते हैं, वो दूसरों का भी हक मारने में नहीं हिचकिचाते। एक यूज़र ने लिखा, “अगर किसी ने सुइट के लिए ज्यादा पैसे दिए हैं, तो उसे हटाना सरासर गलत है। होटल वाले ऐसे लोगों को डीलिस्ट कर देना चाहिए।”
ऐसे मेहमान, जो दूसरों की प्राइवेसी भंग करने की कोशिश करते हैं, उन पर सख्ती ज़रूरी है। ओरिजिनल पोस्टर ने भी बताया कि उन्होंने सुइट के गेस्ट को आगाह कर दिया था, ताकि कोई अनचाहा मेहमान परेशान न करे।
होटल स्टाफ की सूझबूझ और Reddit की सलाह
एक Reddit यूज़र ने सलाह दी, “हर बातचीत को नोट करो और ऊपर रिपोर्ट करो। ऐसे लोगों को होटल की ‘ब्लैकलिस्ट’ में डाल देना चाहिए।” बहुत से लोगों ने होटल स्टाफ की हिम्मत की तारीफ की – “ऐसे ‘जबरन’ मेहमानों को अपग्रेड बिलकुल मत दो!”
किसी ने लिखा, “भैया, कोई भी कार्ड हो, सम्मान सबके लिए बराबर है। अपने हक की लड़ाई में दूसरों की इज्ज़त और नियमों का ध्यान रखना भी ज़रूरी है।”
निष्कर्ष: कहानियाँ बहुत हैं, सबक एक ही
इस कहानी में एक तरफ होटल स्टाफ की प्रोफेशनलिज्म है, तो दूसरी तरफ ‘शाइनी’ मेहमान का सिर दर्द। भारतीय समाज में भी ऐसे लोग मिल जाते हैं, जो हर चीज़ को ‘हक’ समझते हैं। लेकिन याद रखिए, नियम और दूसरों की इज्ज़त सबसे ऊपर है।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा कोई ‘हकदार’ मेहमान या ग्राहक टकराया है? नीचे कमेंट में अपनी मज़ेदार या हैरान कर देने वाली कहानी ज़रूर साझा करें। और हाँ, अगली बार होटल रुकें तो बस साफ-सुथरा कमरा मिल जाए, यही बड़ी बात है – अपग्रेड मिल जाए तो ‘ईद का चाँद’ समझिए!
मूल रेडिट पोस्ट: another day another request