होटल के नाश्ते वाले की 'गंदी' करतूतें: जब बाथरूम बनी आफ़त और मेहमान हुए हैरान
क्या आपने कभी सोचा है कि होटल में काम करने वाले कर्मचारी कितने अजीब हो सकते हैं? हम अक्सर सोचते हैं कि होटल का स्टाफ़ एकदम प्रोफेशनल, सलीकेदार और अनुशासित होता है, लेकिन जनाब, असलियत कभी-कभी इतनी चौंकाने वाली होती है कि सुनकर सिर पकड़ लें। आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं एक ऐसे नाश्ते वाले की कहानी, जिसकी हरकतों ने पूरे होटल को सिर पर उठा लिया – और वो भी ऐसी-वैसी नहीं, बल्कि गंदगी की सारी हदें पार कर दीं!
नाश्ते वाले का जादू: बातें कम, किस्से ज़्यादा
हर होटल में एक ऐसा कर्मचारी जरूर होता है जो अपनी बातों से सभी को परेशान कर दे। हमारे नायक, जिन्हें हम 'नाश्ते वाला' कहेंगे, ऐसे ही किस्सों के उस्ताद हैं। ऑफिस की भाषा में कहें तो – 'मुंह चलता है, हाथ कम'। कोई मेहमान बैठा नाश्ता कर रहा हो, कोई स्टाफ़ काम में लगा हो, इन्हें हर किसी को अपनी जिंदगी की रामकहानी सुनानी होती है।
अब सोचिए, कोई बुजुर्ग दादी अपने पोते-पोतियों के साथ इडली-सांभर का मजा ले रही हैं, और साहब बताने लगते हैं – "मेरा घर यहीं पास में है, फलां बार में जाता हूं, इतने भतीजे-भतीजियां हैं, छुट्टी के दिन ये करता हूं..."। कई मेहमान हैरान, कई परेशान, लेकिन साहब को कोई फर्क नहीं पड़ता। एक कमेंट करने वाले ने तो बड़े मज़ाकिया अंदाज में कहा, “इसकी बातें सुनकर तो कान पक गए हैं, अब तो भगवान बचाए!”
बाथरूम में 'महाभारत': जब गंध ही गंध मच गई
अब आते हैं असली किस्से पर, जिसने होटल के इतिहास में 'गंध' के ऐसे झंडे गाड़ दिए कि सब हैरान रह गए। बात नवंबर महीने की है – एक दिन नाश्ते वाला अचानक गायब हो गया। सबको कुछ देर के लिए बड़ी राहत मिली, होटल में सन्नाटा सा था। लेकिन शांति ज्यादा देर टिकती कहाँ है? थोड़ी देर बाद वो बिना किसी शर्मिंदगी के वापस किचन में टहलते हुए आ गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
इसी बीच एक मेहमान दौड़ते हुए रिसेप्शन पर आया – "भैया, बाथरूम में तो बर्बादी मची है! टॉयलेट, सिंक, फर्श – हर जगह गंदगी, और ऊपर से किसी के कपड़ों पर भी..."। अब क्या था, हाउसकीपिंग, मेंटेनेंस और रिसेप्शन – सबकी नजर उस पर गई। सबको समझ आ गया कि ये करतूत किसकी है; क्योंकि उसके पैंट पर भी गंदगी के साफ निशान थे।
सबसे मजेदार बात ये कि साहब अगले कुछ दिन भी वही गंदे कपड़े पहनकर घूमते रहे! सोचिए, जिस इंसान को खाने की जिम्मेदारी दी गई है, उसकी हालत ऐसी हो। कमेंट में किसी ने लिखा, “ऐसा आदमी खाने के साथ-साथ बीमारी भी परोस सकता है!”
प्रबंधन की चुप्पी और कर्मचारियों की मजबूरी
अब आप सोच रहे होंगे, इतना सब हो गया, फिर भी उसे नौकरी से क्यों नहीं निकाला गया? यही सवाल उस होटल के बाकी कर्मचारियों के मन में भी था। किसी ने कमेंट में लिखा, “हमारे यहाँ तो छोटी गलती पर ही निकाल देते हैं, यहाँ तो गंदगी की हद हो गई, फिर भी नौकरी बरकरार है!”
दरअसल, कई बार होटल में स्टाफ की कमी इतनी होती है कि जैसे-तैसे काम चलाना पड़ता है। एक कमेंट करने वाले ने कहा, “जब स्टाफ घटिया हो और लोग मिल नहीं रहे हों, तो ऐसे ही लोग टिके रहते हैं।” होटल के कुछ कर्मचारियों ने तो प्रबंधन से शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कुछ लोगों ने सलाह दी कि मेहमानों के नाम से शिकायत लिखवा दो, ताकि दबाव बने, लेकिन वहीं हताशा भी झलकती रही – “यहाँ तो प्रबंधन खुद को बचाने में लगा है, गंदगी से किसे फर्क पड़ता है!”
बातें बहुत, काम कम: नाश्ते वाले की बेशर्मियां
सोचिए, एक तरफ होटल में लोग सफाई, गुणवत्ता और प्रोफेशनलिज्म की उम्मीद लेकर आते हैं, दूसरी तरफ नाश्ते वाला अपने पुराने किस्सों में उलझा रहता है। एक कमेंट में किसी ने लिखा, “इस आदमी को तो बोलने की डायरिया है, बाकी हालत तो आप समझ ही गए होंगे!”
इतना सब होने के बाद भी, साहब मुस्कुराते हुए काम पर आते हैं, मेहमानों को अपने घर का पता और अपने पसंदीदा बार का नाम बताते हैं – जैसे होटल उनका निजी अखाड़ा हो। होटल का प्रबंधन भी शायद सोच चुका है, “अब जो है सो है, नया कौन लाएगा!”
निष्कर्ष: क्या हम भी ऐसे हालात झेल पाएंगे?
अब सोचिए, अगर हमारे देश में किसी होटल में ऐसा हुआ होता तो शायद अगले ही दिन व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वायरल हो जाता। होटल की बदनामी अलग, मेहमानों की सेहत का जोखिम अलग। लेकिन इस कहानी से एक बात जरूर समझ आती है – किसी भी संस्थान की असली पहचान उसके स्टाफ से होती है।
आपका क्या कहना है – क्या ऐसे कर्मचारियों को तुरंत निकाल देना चाहिए या प्रबंधन की मजबूरी समझी जाए? अगर आपके साथ भी कभी होटल में अजीबोगरीब अनुभव हुए हों, तो जरूर साझा करें। आखिर, ऐसी कहानियाँ ही तो जिंदगी में मसाला भरती हैं!
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मूल रेडिट पोस्ट: Breakfast guy shit himself and the bathroom