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होटल के नाइट स्टाफ की आफ़त: पुराने गोल्फर, शराब और बेमिसाल मस्ती की रातें!

होटल के रात के शिफ्ट में शोर मचाते हुए, पेय के साथ गोल्फ का आनंद लेते वृद्ध पुरुषों का समूह।
गोल्फ के एक राउंड के बाद जश्न मनाते वृद्ध पुरुषों का जीवंत चित्रण, हाथ में पेय लिए हुए, होटल में हलचल मचाते हुए। यह दृश्य रात की टीम के सामने आने वाली मजेदार चुनौतियों को दर्शाता है।

कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे अनुभव दे देती है जिनके बारे में हम सोच भी नहीं सकते। होटल में नाइट शिफ्ट का काम वैसे भी आसान नहीं होता, लेकिन जब सामने ऐसी टोलियाँ आ जाएँ जो उम्र के साथ-साथ जिम्मेदारी भी भूल चुकी हों, तो हर रात किसी बॉलीवुड कॉमेडी फिल्म से कम नहीं लगती।

आज की कहानी है एक ऐसे होटल की, जहाँ हर वीकेंड बुज़ुर्गों की एक गोल्फ टीम आती है – और उनके साथ आती है शराब, हंगामा और न जाने कितने किस्से, जिन्हें सुनकर आप भी कहेंगे, “भई, रात की ड्यूटी तो सच में किसी जंग से कम नहीं!”

बुज़ुर्गों की टोली - होटल स्टाफ की परीक्षा!

सोचिए, एक होटल जहाँ 90 कमरे हैं, और हर रात सिर्फ़ एक कर्मचारी ड्यूटी पर होता है। आम दिनों में तो सब ठीक, लेकिन शुक्रवार और शनिवार को जैसे ही गोल्फ खेलने वाले अंकल लोग आते हैं, होटल का माहौल ही बदल जाता है। ये लोग सिर्फ़ गोल्फ ही नहीं, शराब पीने में भी किसी युवाओं से कम नहीं!
हर बार कम से कम आधे लोग अपनी चाबी खो देते हैं, कमरा भूल जाते हैं, और कई बार तो सिर्फ़ अंडरवियर में गलियारे में ही टहलते पाए जाते हैं। एक कमेंट में किसी ने लिखा – “हम तो इनका बेबीसिटिंग करने का पैसा भी नहीं पाते, वही न्यूनतम वेतन जो ब्रेड टोस्ट करने वाले बच्चों को मिलता है।”
सोचिए, इतना सब कुछ झेलने के बाद भी कोई एक्स्ट्रा पैसा नहीं मिलता! भाई, ये तो वही बात हो गई – ‘ऊपर से सर कटे, नीचे से पाँव।’

शराब के नशे में धुत – होटल बना 'धर्मशाला'

पिछली बार तो हद ही हो गई। स्टाफ ने देखा कि एक साहब गलियारे में बेसुध पड़े हैं, और आसपास गंदगी फैली है। शुरू में लगा कि शायद सामान बिखर गया हो – लेकिन असलियत जानकर तो स्टाफ भी दंग रह गया! साहब नशे में इस कदर थे कि न कमरे का पता, न होश, और न ही कपड़े पूरे।
किसी ने मज़ाकिया अंदाज़ में कमेंट किया – “भई, ये तो बड़ी 'शिट्टी' कहानी है!”
दूसरे ने लिखा – “ऐसे में तो एम्बुलेंस बुलानी चाहिए, शराब का नशा कभी भी जानलेवा हो सकता है।”
लेकिन होटल स्टाफ का कहना था कि ऐसे वाकये यहाँ आम हैं, और चूँकि साहब थोड़ी देर में होश में आ गए, इसलिए मेडिकल इमरजेंसी नहीं समझी गई।

होटल का दर्द – न जिम्मेदारी, न अधिकार

होटल के नाइट स्टाफ का दर्द भी कम नहीं। कई बार मैनेजर से शिकायत करने पर भी ऐसे मेहमानों को बुकिंग से नहीं हटाया जाता। एक कमेंट में किसी ने सुझाव दिया – “ऐसे लोगों के हाथ पर ही कमरे का नंबर लिख दो।”
इस पर स्टाफ ने जवाब दिया – “अरे, ये लोग तो चाबी, मोबाइल, यहाँ तक कि दरवाजा भी लॉक करना भूल जाते हैं। हाथ पर नंबर लिखो या गले में लटकाओ, सब बेकार है।”
एक और मज़ेदार सुझाव आया – “शराबी मेहमानों के लिए शराब-प्रूफ मार्कर से हाथ पर नंबर लिख दो, शायद फायदा हो!”
लेकिन होटल की पॉलिसी ऐसी है कि न तो ज्यादा सफाई का पैसा मिल पाता है, न ही ऐसे मेहमानों को बैन करने का अधिकार स्टाफ के पास है।

हास्य, विडंबना और होटल स्टाफ की जद्दोजहद

ऐसे माहौल में, जहाँ हर रात कोई न कोई 'शोले' का गब्बर बनकर गलियारे में घूमता दिखे, होटल स्टाफ को भी अपने हौसले और ह्यूमर का सहारा लेना पड़ता है।
एक कमेंट में किसी ने कहा – “अगर कोई भूखा है, तो गंदगी देखकर भी खा ही लेगा। वरना उसकी भूख झूठी है!”
कोई और बोला – “हमारे होटल में सिक्योरिटी है, वरना हम भी हर वीकेंड ऐसे ही नज़ारे देखते।”
सच तो ये है कि चाहे भारत हो या विदेश, होटल स्टाफ की मुश्किलें लगभग एक जैसी हैं – मेहमानों की मस्ती, शराबी हरकतें, और ऊपर से मैनेजमेंट का ‘कूल’ रवैया!

निष्कर्ष: होटल में नाइट ड्यूटी – हर रात एक नई कहानी

तो दोस्तों, अगली बार जब आप किसी होटल में जाएँ, तो याद रखिए – वहाँ के स्टाफ के पास भी ढेरों मज़ेदार, कुछ शर्मनाक और कुछ चौंकाने वाली कहानियाँ होती हैं।
अगर आपके भीतर भी ऐसा कोई किस्सा है या आपने कभी होटल स्टाफ की परेशानी देखी है, तो कमेंट में ज़रूर बाँटिए।
और हाँ, अगली बार होटल में शराब पीने का मन हो, तो ज़िम्मेदार मेहमान बनिए – वरना आपकी कहानी भी किसी ब्लॉग में 'शिट्टी' केटेगरी में आ सकती है!

आपका क्या ख्याल है, क्या ऐसे मेहमानों को सख्ती से बैन कर देना चाहिए? या होटल स्टाफ को और ज़्यादा अधिकार मिलने चाहिए?
अपने विचार नीचे कमेंट में लिखिए, और अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो शेयर करना न भूलें!


मूल रेडिट पोस्ट: Old men + golf + far too much alcohol = a nightmare for the night staff.