होटल की नाइट ड्यूटी और गाड़ियों पर बर्फ हटाने की अनोखी फरमाइश!
कभी-कभी दफ्तर या होटल में काम करते हुए ऐसे आदेश मिलते हैं कि समझ ही नहीं आता – हँसें या सिर पकड़ लें! सोचिए, आप होटल के फ्रंट डेस्क पर नाइट शिफ्ट में काम कर रहे हैं, और अचानक मालिक या मैनेजर बोल दे – "बाहर जितनी भी गाड़ियाँ पार्किंग में खड़ी हैं, सबकी खिड़कियों से बर्फ और बर्फीली परतें झाड़ दो!" अब ऐसे में, "मालिक का हुक्म, सर आँखों पर" कहने से पहले ही दिमाग में घंटी बजने लगती है – भाई, ये तो नौकरी के नाम पर बंधुआ मजदूरी हो गई!
होटल की नाइट ड्यूटी – काम या बेमतलब की दौड़?
होटल में नाइट ऑडिट का काम वैसे ही बड़ा जिम्मेदारी भरा होता है। फ्रंट डेस्क पर अकेले बैठे रहो, फोन उठाओ, रिकॉर्ड संभालो, मेहमानों की शिकायतें सुनो, और ऊपर से मालिक की डांट भी झेलो। अब सोचिए, रात के अंधेरे में, जब ठंड हड्डियाँ जमा दे, कोई आपको बाहर भेज दे कि "जाओ, ३०-१२० गाड़ियों की बर्फ साफ करो", तो क्या हाल होगा?
रेडिट पर u/FD_Hell नाम के एक फ्रंट डेस्क कर्मचारी ने अपनी कहानी साझा की। उनके होटल में १२१ कमरे थे, और कभी-कभी पार्किंग में उतनी ही गाड़ियाँ भी। मालिक ने आदेश दिया – "हर गाड़ी की खिड़की, बोनट और शीशे से बर्फ हटाओ!" अब बंदा हैरान – "इस बीच रिसेप्शन कौन संभालेगा? फोन कौन उठाएगा?" उन्होंने बढ़िया दिमाग लगाया और साफ जवाब दिया – "अगर आप लिख कर दे दें कि गाड़ी को कोई नुकसान हुआ तो होटल जिम्मेदार होगा, मैं नहीं, तो सोचूंगा।" जाहिर है, मालिक ने लिख कर कुछ नहीं दिया – और कर्मचारी ने भी एक गाड़ी को हाथ नहीं लगाया!
गाड़ियों की बर्फ साफ करवाना – क्या ये सही है?
अब इस पर रेडिट कम्युनिटी में गज़ब की चर्चाएँ हुईं। एक यूज़र ने कहा, "अरे भाई, गाड़ियों की बर्फ साफ करते वक्त अगर पेंट पर स्क्रैच आ जाए, तो मालिक सीधे बोल देगा – 'मुआवजा दो!' ये तो सरासर बेवकूफी है!"
दूसरे कमेंट में मज़ेदार अंदाज़ था – "अगर होटल कोई ५-स्टार या महंगा रिसॉर्ट हो, वहाँ ये सर्विस समझ आती है। लेकिन छोटे होटल में, जहाँ फ्रंट डेस्क वाला अकेला है, वहाँ तो ये सरासर ज्यादती है।" भारतीय संदर्भ में देखें तो, जैसे आपने होटल में रिसेप्शनिस्ट रखा और उससे झाड़ू-पोछा, किचन का काम, और गार्ड की ड्यूटी भी साथ-साथ लगवा दी – मतलब 'नौकरी एक, काम सौ!'
एक और कमेंट में बड़ा तगड़ा सवाल उठा – "अगर बर्फ हटाते हुए फिसल गए, चोट लग गई, तो जिम्मेदार कौन? क्या होटल वालों ने कभी सोचा?" भारतीय घरों में तो माँएं भी कहती हैं, "ठंड में बाहर मत जाओ, फिसल जाओगे!" लेकिन यहाँ तो मैनेजर फरमान सुना रहे थे – 'बाहर निकलो, बर्फ साफ करो!'
मैनेजर की सोच – काम न मिले तो काम बना दो!
भारतीय दफ्तरों में अक्सर सुना होगा – "फ्रंट डेस्क वाला तो बस बैठा रहता है, कुछ करता ही नहीं!" रेडिट पर भी किसी ने लिखा, "ये आदेश किसी 'महान' मैनेजर का था, जिसे लगा कि नाइट शिफ्ट में कर्मचारी फालतू बैठा है, तो क्यों न उसे बर्फ साफ करने भेज दें!"
ऐसी सोच तो हमारे यहाँ सरकारी दफ्तरों में भी खूब मिलती है – "काम कम है तो कोई नया रजिस्टर बना दो, पुरानी फाइलों की धूल झाड़ो, या कर्मचारियों को बेवजह दौड़ा दो!" असल में, जिम्मेदारी को समझने के बजाय 'काम की गिनती' में उलझना – यही दिक्कत है। किसी ने बढ़िया लिखा – "बड़े पद वाले अक्सर सबसे कम समझदार निकलते हैं, और दूसरों की जिंदगी मुश्किल बना देते हैं!"
बर्फ साफ करना – सेवा या सिरदर्द?
सोचिए, अगर भारत में होटल रिसेप्शनिस्ट से ये कह दिया जाए कि 'बाहर जाओ, सबकी गाड़ियों से धूल मिट्टी साफ करो', तो क्या हाल होगा? यहाँ तो रिसेप्शनिस्ट चाय भी खुद नहीं बनाता! रेगुलर होटल में ऐसी फरमाइश सुनकर कोई भी बोलेगा – "भैया, इतना ही करना है तो सिक्योरिटी गार्ड रख लो या सफाई वाला।"
रेडिट पर भी कई लोगों ने यही कहा – "इतना भारी फिजिकल काम, वो भी अकेले, नामुमकिन है।" एक ने तो मजाक में लिखा, "तीस गाड़ियाँ साफ करना भी पसीना छुड़ा देगा, १२० का तो भगवान ही मालिक है!"
क्या सीखा जाए – कर्मचारियों का सम्मान जरूरी
इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि चाहे भारत हो या विदेश, कर्मचारी का काम और उसकी मर्यादा समझना बहुत जरूरी है। हर जिम्मेदारी अपनी जगह है – रिसेप्शनिस्ट का काम है होटल संभालना, न कि पार्किंग की बर्फ हटाना! मालिक या मैनेजर अगर सोच-समझकर फरमान जारी करें, तो सबका भला हो।
अंत में, जिस तरह हमारे नायक ने समझदारी से काम लिया और मालिक से लिखित जवाबदारी माँगी, वही सही तरीका है। नौकरी में 'हाँ जी' सबको खुश नहीं रखती, कभी-कभी 'नहीं' कहना भी जरूरी है – खासकर तब, जब बात आपकी सुरक्षा और सम्मान की हो!
आपकी राय?
क्या आपके साथ भी कभी ऑफिस में ऐसी बेवकूफी भरी फरमाइश हुई है? क्या आपने कभी किसी बॉस को ऐसी बात पर टोक दिया? अपनी कहानी नीचे कमेंट में लिखिए, और इस मजेदार चर्चा में हिस्सा लीजिए!
क्योंकि आखिर में, "काम का बँटवारा सही हो, तभी तो होगा सबका भला!"
मूल रेडिट पोस्ट: Night Audit Stupid 'Busy Work'