होटल की गलती, परदा विवाद और पुलिस – एक रिसेप्शनिस्ट की अनोखी जंग
होटल की रिसेप्शन डेस्क पर काम करना वैसे ही किसी जंग से कम नहीं। रोज़ नए-नए चेहरे, दिलचस्प किस्से और कभी-कभी ऐसे मेहमान, जिनकी फरमाइशें गिनना मुश्किल। लेकिन जब एक साथ पूरा ग्रुप आ जाए, सब मिलकर हँसी-मज़ाक करें, और गलती से कमरे गंदे निकल जाएं – तब हालात बेकाबू हो सकते हैं। आज की कहानी ऐसे ही एक दिन की है, जब कंप्यूटर की एक छोटी सी गलती ने होटल के रिसेप्शनिस्ट को पुलिस तक पहुंचा दिया!
जब कंप्यूटर बने मुसीबत का कारण
सोचिए, आप होटल में मेहमानों का स्वागत कर रहे हैं। अचानक एक ग्रुप आता है – उम्रदराज़ लोग, जिनमें कुछ तो शायद अपने पुराने स्कूल के दोस्तों के साथ रीयूनियन मनाने आए हों। सब साथ-साथ बातें कर रहे, हँस रहे, और रिसेप्शन पर ऐसा शोर कि आपकी आवाज़ ही दब जाए!
अब होटल का PMS (Property Management System) यानी बुकिंग सॉफ्टवेयर बहुत पुराना है, जिसमें ये तक नहीं दिखता कि कौन-सा कमरा साफ है और कौन-सा गंदा। बस, इसी गलती के चलते दो कमरों की सफाई नहीं हो पाई। जैसे ही मेहमानों को कमरे मिले, बस बवाल शुरू – "ये क्या है! हमने महीना भर पहले बुकिंग की थी!" वो भीड़ में से एक साहब तो बिना दूसरा कमरा देखे ही बोले, "हमें अभी के अभी रिफंड चाहिए!" अब भाई, होटल में नियम होते हैं – रिफंड देने का हक मैनेजर के पास है, रिसेप्शनिस्ट के पास नहीं।
परदा, दरवाजा और गुस्से का तूफान
रिसेप्शन पर हंगामा बढ़ता गया। किसी को नया कमरा दिखाया, तो उसने बाथरूम के शावर परदा को लेकर ही नाक-भौं सिकोड़ी – "मुझे तो ग्लास स्लाइडिंग डोर वाला बाथरूम चाहिए!" अब आखिरी कमरे भी खत्म, और उनके हिसाब के कमरे नहीं बचे। रास्ते भर मेहमान बहनजी ताना मारती रहीं – "आपने तो बिल्कुल चेक ही नहीं किया, कैसी लापरवाही है, आपकी नौकरी पर ही सवाल है!"
ज़रा सोचिए, अगर हमारे दफ्तरों में कोई ऑफिस बाबू, या बैंक का कर्मचारी इतना सुन ले, तो क्या हाल हो? आखिरकार रिसेप्शनिस्ट का भी सब्र टूट गया – "मैं कोई पायदान नहीं हूँ, जिस पर पैर रगड़ लें।" – यानी अब और बर्दाश्त नहीं! यह जवाब सुनकर तो जैसे आग में घी पड़ गया। महाशय बोले, "तो हम जा रहे हैं!" रिसेप्शनिस्ट भी गुस्से में – "तो जाइए, और कभी वापस मत आइए!"
पुलिस आई, बवाल थमा – लेकिन पेट में मरोड़!
अब ये तो भारत में भी खूब होता है – कोई भी बात आगे बढ़ जाए, तो पुलिस बुला लो। एक और मेहमान ने तो हद ही कर दी – "मैं पुलिस को बुलाकर बताऊँगा, यहाँ चोरी हो रही है।" पुलिस आई, रिसेप्शनिस्ट ऑफिस में जाकर बंद हो गया। पुलिस ने भी समझाया – "भाई, ये आपसी मामला है, इसमें हमारा क्या काम!"
इसी बीच, बॉस का मेसेज आया – "अब रिफंड दे दो।" लेकिन अब तो मेहमान भी अड़ गए – "अब हमें रिफंड नहीं चाहिए!" पुलिस वाले भी हैरान, आखिर किस बात का बवाल है। बाकी मेहमान तो खुश थे अपने कमरों में, बोले – "हमें कोई शिकायत नहीं।"
आखिरकार, जिन्होंने बवाल किया, उन्हें पैसे वापस मिल गए और वो चले गए। बाकी लोग शांतिपूर्वक रुके रहे। और बेचारे रिसेप्शनिस्ट को – पेट दर्द, मिचली और सिरदर्द!
कम्युनिटी के विचार – सबक और मुस्कान
इस किस्से पर Reddit कम्युनिटी के लोगों ने भी खूब मजेदार टिप्पणियाँ कीं। एक ने लिखा, "अच्छा हुआ ये मुसीबत वाले मेहमान चले गए, अब शायद शाम थोड़ी शांति से बीते।" दूसरे ने जोड़ा, "ऐसे लोगों का नाम 'DNR' (Do Not Return) लिस्ट में डाल देना चाहिए, ताकि दोबारा न आएं!"
एक और पाठक ने होटल की सफाई व्यवस्था पर तंज कसा – "अगर सॉफ्टवेयर ये तक नहीं दिखाता कि कमरे साफ हैं या नहीं, तो होटल की क्वालिटी भी वैसी ही होगी!" इस पर खुद लेखक (OP) ने जवाब दिया – "मालिक लोग तो बस कमरे रिनोवेट करने में पैसा लगाते हैं, पर सॉफ्टवेयर बदलने की फिक्र नहीं।"
कुछ लोगों ने रिसेप्शनिस्ट की हिम्मत की तारीफ भी की – "आपका जवाब बिलकुल सही था, ऐसे लोगों को सीधा जवाब देना ही सही है।" वहीं भारत में भी अक्सर सरकारी दफ्तरों या बैंकों में कर्मचारियों को ऐसे गुस्सैल ग्राहकों से दो-चार होना पड़ता है – पर यहाँ आमतौर पर इतना सीधा जवाब कम ही दिया जाता है!
क्या सीखा – काम का तनाव, इज्ज़त और हिम्मत
किसी भी सेवा क्षेत्र में काम करना आसान नहीं। कभी ग्राहक राजा होता है, कभी खुद की इज्ज़त बचाना मुश्किल। होटल, बैंक, रेलवे – हर जगह कर्मचारियों को ऐसे हालात झेलने पड़ते हैं। ज़रूरी है कि कर्मचारी भी अपनी हदें जानें, और ग्राहक भी। आखिरकार, दोनों इंसान ही हैं।
यह किस्सा हमें सिखाता है कि कभी-कभी "कस्टमर हमेशा सही है" वाली कहावत भी गलत साबित हो जाती है। और हाँ, अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो, तो गहरी साँस लें, बॉस को सूचना दें, और मन को शांत रखें – क्योंकि हर तूफान के बाद होटल में भी शांति आती है!
आपका क्या अनुभव रहा है ऐसे गुस्से वाले मेहमानों या ग्राहकों से? नीचे कॉमेंट में जरूर बताइए, और अगर आपको यह किस्सा पसंद आया हो, तो शेयर करना न भूलें!
मूल रेडिट पोस्ट: The computer error, the shower curtain, the horrible escalation and the police