होटल की ‘करन’ और टॉप फ्लोर की जिद – जब मेहमान ने अपनी छुट्टियों का खुद ही कबाड़ा कर लिया!
कभी-कभी होटल के रिसेप्शन पर जो नज़ारे देखने को मिलते हैं, वो एक मसालेदार पारिवारिक ड्रामे से कम नहीं होते। हमारे यहां भी ऐसे बहुत से ‘करन’ आते हैं, जिनकी फरमाइशें और नखरे किसी बॉलीवुड की अति-ड्रामाई सास से कम नहीं। पर इस बार की ‘करन’ तो कुछ ज़्यादा ही निकली – टॉप फ्लोर की जिद, शिकायतों की झड़ी, और आखिर में खुद ही अपनी छुट्टियों का मज़ा किरकिरा कर लिया!
‘करन’ की एंट्री – टॉप फ्लोर या कुछ नहीं!
शुक्रवार की शाम थी, होटल लगभग पूरी तरह बुक हो चुका था – यानी स्टाफ के लिए वही हालत कि जैसे शादी के घर में हलवाई और बारात एक साथ आ जाएं। तभी दाखिल होती हैं हमारी ‘गोल्ड मेम्बर’ मैडम – चेहरे पर वही “मुझे पता है मैं कौन हूं” वाला अंदाज़। चेक-इन करते ही जैसे ही तीसरी मंज़िल का कमरा मिला, मैडम ने तुनककर पूछा, “ये टॉप फ्लोर है?”
स्टाफ ने विनम्रता से बताया – “नहीं मैडम, ये तीसरी मंज़िल है।” बस फिर क्या था, मैडम की आंखों में मानो आग सी जल उठी, बोलीं – “मैंने तो टॉप फ्लोर मांगा था!”
अब भाई, टॉप फ्लोर का एक ही कमरा बचा था, वो भी गंदा और सफाई चल रही थी। ऊपर से उस कमरे में टीवी भी बार-बार खराब हो जाता था – यानी सिरदर्द गेस्ट के लिए भी, स्टाफ के लिए भी। फिर भी मैडम ने जिद पकड़ ली – “मुझे वही चाहिए, मैं इंतजार कर लूंगी!”
होटल स्टाफ की स्थिति – सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे
अब सोचिए, शुक्रवार की भागदौड़, स्टाफ की हालत वैसे ही पतली, ऊपर से ऐसी ‘करन’ मेहमान! होटलकर्मी ने शांति से समझाया – “मैडम, वो कमरा साफ नहीं है और उसमें मेंटनेंस का भी इश्यू है, इसलिए देना संभव नहीं।”
लेकिन मैडम तो जैसे सुनने को तैयार ही नहीं थीं। बाद में जब उनकी कोशिश रही कि दूसरे स्टाफ से बात करके अपनी बात मनवा लें, तो पहले वाले कर्मचारी ने तुरंत स्थिति संभाली – “मैडम को बता दिया गया था, वो कमरा मेंटनेंस में है।”
यानी, न जलेबी सीधी घूमने वाली थी, न करन मानने वाली थी! एक अनुभवी कमेंटकर्ता ने कमाल की बात कही – “ऐसे लोगों से कभी ज़्यादा जानकारी मत साझा करो, वरना वो मोलभाव शुरू कर देंगे। सीधा बोल दो – उपलब्ध नहीं है।” और सच में, ये फॉर्मूला भारतीय होटल इंडस्ट्री में भी पूरी तरह फिट बैठता है।
मेहमान की शिकायतों का अंत नहीं – बैंक, रिव्यू और ड्रामा
‘करन’ मैडम जब मर्जी के कमरे में नहीं रह पाईं, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने होटल की शिकायत कंपनी तक पहुंचाई – “मुझे एक दिन पहले चेक-आउट करना पड़ा, फिर भी पूरा पैसा काट लिया!”
यहां भी बैंकिंग की बुनियादी बात न समझने का नतीजा – होटल ने साफ जवाब दिया कि ऑथराइजेशन कुछ दिन रहता है, बैंक ही इसे फाइनल करता है। यानी होटल का कुछ लेना-देना नहीं।
फिर भी, मैडम ने एक स्टार की रेटिंग देते हुए लिखा – “मुझसे दुर्व्यवहार हुआ, झूठ बोला गया, मुझे खास महसूस नहीं कराया गया!” अब ये कौनसा होटल का काम है कि हर मेहमान को शहजादी बना दे? एक पाठक ने चुटकी ली – “आखिर मेरा काम है क्या? लोगों को स्पेशल फील कराना?”
कुछ पाठकों ने करन की हरकत को बैंक फ्रॉड तक करार दे दिया – “अरे, खुद ही चार्जबैक का केस खोल कर उल्टा होटल को बदनाम कर रही है!”
भारतीय संदर्भ – ग्राहक सेवा, अधिकार और व्यवहार
अब जरा सोचिए, ऐसी स्थिति अक्सर हमारे यहां भी देखने को मिलती है – कभी शादी में खाने के टाइम ‘चाट’ के स्टॉल पर बहस, तो कभी हॉल में कुर्सी की पहली लाइन के लिए खींचतान। होटल इंडस्ट्री वाले भली-भांति जानते हैं, कुछ ग्राहक तो आते ही हैं ‘अधिकार’ जताने और बाकी सबका दिन खराब करने के लिए।
एक मज़ेदार कमेंट में किसी ने लिखा – “समझ नहीं आता, लोग इतने entitled क्यों हो गए हैं? अब तो सामान्य शिष्टाचार भी गायब सा हो गया है।” और सच पूछिए तो, आजकल हर ग्राहक खुद को VIP समझता है, फिर चाहे वह कॉल सेंटर हो या होटल – सब जगह वही हाल है।
वहीं, एक अनुभवी भारतीय मेहमान ने ज़रूरी बात कही – “कभी-कभी अगर आप विनम्र रहो, तो स्टाफ खुद आपके लिए बेहतर कमरे का इंतजाम कर देता है। मिठास से मक्खी पकड़ने की कहावत यहां भी फिट बैठती है।”
निष्कर्ष – ‘करन’ से बचना है तो खुद भी सलीका सीखिए
सच्चाई यही है – होटल कर्मचारी भी इंसान हैं, और उनके पास जादुई छड़ी नहीं है कि हर जिद पूरी कर दें। ऊपर से अगर आप रूखे या हुक्म चलाने वाले अंदाज़ में बात करेंगे, तो नतीजा वही होगा जो इस ‘करन’ का हुआ – खुद का मूड खराब, छुट्टियों का कबाड़ा, और ऑनलाइन रिव्यू में ड्रामा!
तो अगली बार जब आप होटल जाएं, याद रखिए – थोड़ा धैर्य, थोड़ा विनम्रता, और थोड़ा समझदारी आपकी छुट्टियों को वाकई यादगार बना सकती है। आखिरकार, “जो विनम्र, वही असली VIP!”
आपका क्या अनुभव रहा है ऐसे ‘करन’ (या ‘करण’) मेहमानों या ग्राहकों के साथ? नीचे कमेंट में जरूर बताइए – किसकी जिद ने आपके धैर्य का इम्तिहान लिया?
मूल रेडिट पोस्ट: I withheld a top floor room from a Gold member because I felt like it and personally wanted to ruin her vacation. /j