होटल के अजीबो-गरीब मेहमान: जब फोन की गड़बड़ी ने बना दी कॉमेडी
होटलों में काम करना कोई बच्चों का खेल नहीं। जिन लोगों ने कभी रिसेप्शन पर बैठ कर मेहमानों की फरमाइशें सुनी हैं, वही जानते हैं कि ये नौकरी अक्सर 'मिर्ची लगे तो मीठा मीठा' जैसी होती है। एक तरफ मेहमानों की उम्मीदें आसमान छूती हैं, दूसरी तरफ उनकी हरकतें कभी-कभी इतनी अजीब होती हैं कि हंसी छूट जाए या सिर पकड़ के बैठ जाए इंसान।
आज मैं आपको एक ऐसी ही घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे—"भैया, होटलवाले भी आखिर इंसान होते हैं!"
जब फोन ने किया खेल और मेहमान बन गईं 'विक्टिम'
कहानी है एक होटल की, जहाँ रिसेप्शन पर बैठा कर्मचारी (जिसे अक्सर हम 'फ्रंट ऑफिस असिस्टेंट' या FOA कहते हैं) अपनी ड्यूटी निभा रहा था। तभी कमरे में ठहरी एक महिला मेहमान ने, दो मिनट के भीतर कई बार कमरे के फोन से कॉल किया। बेचारा रिसेप्शनिस्ट नए मेहमानों को चेक-इन कराने में व्यस्त था, इसलिए फ़ोन उठाना मुश्किल हो गया।
कुछ देर बाद, वही महिला अपने मोबाइल से कॉल करती है। फोन उठाते ही बड़बड़ाने लगती हैं, रिसेप्शनिस्ट से कुछ कहना चाहती हैं, लेकिन उनकी आवाज़ समझ नहीं आती। जब रिसेप्शनिस्ट ने विनम्रता से बात दोहराने को कहा, तो महिला गुस्से से चिल्ला उठीं—"फोन काम नहीं कर रहा है!" और फिर फोन काट दिया।
अब रिसेप्शनिस्ट का भी पारा चढ़ गया लेकिन नौकरी है, लिहाजा गुस्से को पीकर वो महिला के कमरे तक पहुँचा। कमरे में घुसते ही नाक में सड़ी हुई सिगरेट की बदबू और खाली वोडका की बोतलों का ढेर। जैसे ही रिसेप्शनिस्ट ने दरवाजा खटखटाया, महिला और भी तेज़ आवाज़ में बोल पड़ीं—"फोन ठीक करो अभी!"
"फोन काम नहीं कर रहा"—पर कॉल तो कर ली?
अब रिसेप्शनिस्ट ने समझाने की पूरी कोशिश की कि—"मैडम, फोन तो आप अभी इस्तेमाल कर रही थीं। इसी से तो कॉल आया था!" लेकिन, महिला कहां मानने वाली थीं। बार-बार वही बात—"फोन नहीं चल रहा, फोन नहीं चल रहा!"
यहाँ एक पाठक की टिप्पणी बडी मज़ेदार थी—"कम से कम मैडम खाने-पीने के बारे में पूछ रही थीं, वरना कई लोग तो होटल में बस तमाशा करने आते हैं!" (u/RoyallyOakie)
रिसेप्शनिस्ट ने आखिरकार पूछ ही लिया—"मैडम, आखिर फोन करके आप क्या पूछना चाहती थीं?" अब जाकर महिला ने असली वजह बताई—"मुझे बस इतना जानना था कि होटल का रेस्टोरेंट कब खुलेगा।"
होटलवालों की ज़िंदगी: कभी हंसो, कभी सिर पकड़ो
ऐसी घटनाएँ होटल कर्मचारियों के लिए नयी नहीं हैं। एक और पाठक ने अपनी कहानी साझा की—"मेरे साथ भी ऐसा हुआ था। मैंने फोन की तार निकालकर फिर से लगा दी, और झूठमूठ फोन घुमा दिया कि अब ठीक हो गया!" (u/birdmanrules)
कभी-कभी तो मेहमान इतने चालाक भी होते हैं कि बीमारी का बहाना बनाकर मुफ्त में अपग्रेड या चाय-कॉफी मांग लेते हैं। एक किस्सा और शेयर हुआ—एक महिला ने होटल में घुसते ही 'बीमारी' का नाटक किया, लेकिन सीसीटीवी में दिखा कि बाहर तो हंसते-मुस्कराते आई थीं। अंदर पहुँचते ही 'बेचारी' बन गईं, ताकि मुफ्त में सूट मिल जाए और कोई चाय-कॉफी भी बना दे। (u/Lorward185)
यहाँ तक कि कुछ पाठकों ने याद दिलाया—"भले ही कोई कितना भी बीमार हो, होटल व्यापार है, समाजसेवा नहीं!" (u/Langager90)
क्या हम सब कभी ऐसे मेहमान नहीं बने?
सोचिए, कभी-कभी हम भी तो ऐसे ही उलझे हुए सवाल पूछ लेते हैं। कभी ट्रेन में सीट कन्फर्म होते हुए भी बार-बार टीटी से पूछते हैं—"भैया, सीट तो पक्की है ना?" या रेस्तरां में बैठकर बार-बार वेटर से पूछते हैं—"भाईसाब, पानी क्यों नहीं आया अभी तक?"
असल में, होटल, ट्रेन, रेस्तरां—हर जगह ग्राहक की उम्मीदें और कर्मचारियों की सहनशीलता का टेस्ट चलता रहता है। लेकिन होटलवालों की जिंदगी तो वाकई बड़ी दिलचस्प है—हर दिन एक नया किस्सा, हर मेहमान एक नई पहेली!
निष्कर्ष: मेहमान भगवान हैं, लेकिन...
जैसे हमारे यहाँ कहते हैं—"अतिथि देवो भव!" लेकिन कभी-कभी अतिथि देवता से ज्यादा 'क्यूरियस केस' बन जाते हैं। होटल का स्टाफ चाहे जितना शांत रहे, लेकिन अंदर ही अंदर वो भी सोचता है—"भैया, भगवान भी इतना न सताए!"
अगर आपने कभी होटल में काम किया है या किसी ऐसे कर्मचारी को जानते हैं, तो उनकी कहानियाँ जरूर सुनिए—क्योंकि असली जिंदगी के ये किस्से, टीवी सीरियल से कम मजेदार नहीं!
आपके साथ भी कोई ऐसा किस्सा हुआ है? नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें! और हां, अगली बार होटल जाएँ, तो रिसेप्शन पर बैठी उस मुस्कराती लड़की या लड़के को जरूर धन्यवाद कहें—आपकी मुस्कराहट उनके दिन को खास बना सकती है!
मूल रेडिट पोस्ट: Don't we all love our insane guests