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हॉकी वीकेंड का हंगामा: होटल में मची अफरा-तफरी और एक माँ की दहाड़

दोस्तों ने हॉकी सीज़न के अंत का जश्न मनाते हुए, हंसते-खिलखिलाते हुए पेय का आनंद लिया।
एक अविस्मरणीय हॉकी शाम के लिए इकट्ठा हुए दोस्तों ने सीज़न के अंत का जश्न मनाया। यह जीवंत दृश्य खेलों की यादों और अपने पसंदीदा टीमों के लिए उत्साह को दर्शाता है।

कभी-कभी ज़िंदगी में कुछ ऐसे अनुभव होते हैं जो आपकी सोच को ही बदल देते हैं। जैसे आपको क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं, लेकिन आपके मोहल्ले में IPL का मैच लगे तो शोर-शराबे और पटाखों से आप तंग आ जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल हुआ एक होटल के फ़्रंट डेस्क कर्मचारी का, जब हॉकी के सीज़न में होटल में मेहमानों की भीड़ और बच्चों की मस्ती ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी।

हॉकी: होटल कर्मियों का डरावना सपना!

सच कहें तो हमारे यहाँ क्रिकेट और कबड्डी के टूर्नामेंट्स में भी होटल वाले कांप जाते हैं, लेकिन पश्चिमी देशों में हॉकी सीज़न होटल वालों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं। होटल के फ़्रंट डेस्क पर काम करने वाले 'फ्रेंची' (u/frenchynerd) ने Reddit पर अपने अनुभव साझा किए कि कैसे हॉकी टूर्नामेंट के दौरान होटल में दो मंज़िलें दो टीमों के बच्चों से भरी थीं और एक मंज़िल हॉकी फैन्स से।

रात के 10 बजे, होटल की सीढ़ियों में दौड़ते-भागते बच्चों की टोली मिल गई। 'अरे बेटा, शोर मत करो!' कहने पर, माता-पिता को जाकर समझाया कि बच्चों को काबू में रखें। लेकिन हर बार वही जवाब – 'हमारे बच्चे नहीं हैं!' अब भला, बच्चों के माता-पिता कौन? लगता है जैसे सबका बच्चा कोई "आवारा परिंदा" हो!

माता-पिता का 'ये तो हमारा बच्चा नहीं' मंत्र

टिप्पणियों में एक पाठक ने खूब मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा, "हर बार जब बच्चों की शरारतों की शिकायत करो, तो माता-पिता कहेंगे – हमारे बच्चे तो ऐसे नहीं हैं!" एक और पाठक ने कहा, "अगर ये किसी के बच्चे नहीं हैं, तो पुलिस और समाज कल्याण विभाग को बुलाना पड़ेगा।" वाकई, ये सुनते ही कई माता-पिता तुरंत हरकत में आ जाते हैं। भारतीय समाज में भी, मोहल्ले में अगर किसी का बच्चा ग़लत करे तो सबकी जुबान पर यही आता है – 'हमारे घर का नहीं होगा!'

फ्रेंची ने भी चेतावनी दी – "अगर दोबारा शिकायत आई तो बाहरी मदद (पुलिस) बुलानी पड़ेगी।" लेकिन माता-पिता फिर भी टस से मस नहीं हुए। तभी, 'परमवीर चक्र' जैसी एंट्री हुई उस गुस्से वाली माँ की!

गुस्से वाली माँ: होटल की सुपरहीरो

जैसे ही वह महिला आई, होटल का माहौल ही बदल गया। "आप लोग माता-पिता हैं या नहीं? अपने बच्चों को काबू में रखिए! मेरे बच्चे सो रहे थे, अब आपकी वजह से जाग गए हैं!" उसकी ज़ोरदार डांट ने सबको हिलाकर रख दिया। फ्रेंची खुद भी उस माँ की हिम्मत से दंग रह गए – "मन ही मन मैं सिर हिलाकर उसकी तारीफ कर रहा था।"

होटल के बाकी मेहमानों में से कोई बोला – "ये औरत तो पागल है!" लेकिन एक सज्जन ने शांति से उस माँ को समझाया और बच्चों को संभालने की बात कही। फ्रेंची ने भी समझाया कि अभी सब शांत है, दोबारा शोर हुआ तो पुलिस को बुलाया जा सकता है।

इसी तरह की स्थिति भारतीय शादियों में भी देखने को मिलती है – जब DJ के सामने बच्चे धमाल मचाते हैं और कोई गुस्से में आकर सबको डांट देता है, तब जाकर थोड़ी देर के लिए शांति होती है। Reddit के एक और पाठक ने लिखा, "होटल वालों को चाहिए कि एक बार चेतावनी दें, फिर डाइरेक्ट सबको बाहर कर दें।"

होटल स्टाफ की चिंता और दिलचस्प किस्से

फ्रेंची ने आगे साझा किया कि हॉकी सीज़न में लगातार तनाव और नींद की कमी से उनकी मानसिक सेहत पर असर पड़ा। उन्होंने यहाँ तक सोच लिया कि शहर बदल दें, लेकिन नौकरी की मजबूरी थी। एक और पाठक ने मज़ाक में कहा, "जिसका दिल मजबूत हो वही हॉकी वीकेंड में होटल की ड्यूटी करे!"

कुछ पाठकों ने अपने बचपन के किस्से भी सुनाए – कैसे माँ की सख्ती के डर से होटल के कमरे से बाहर नहीं निकले, जबकि बाकी बच्चे पूरे होटल में धमाचौकड़ी मचाते रहे। एक पाठक ने लिखा, "माँ की डांट से बड़ा डर कोई नहीं होता!"

एक और मज़ेदार टिप्पणी थी – "अगर होटल में माता-पिता को शराब पीने की मनाही हो, तो शायद वे अपने बच्चों पर नज़र रखें!" भारतीय संदर्भ में भी यही हाल है – शादी या पार्टी में जब बड़े व्यस्त हो जाते हैं, तो बच्चे पूरे समारोह की बैंड बजा देते हैं।

निष्कर्ष: होटल की रातें और हॉकी का हंगामा

आखिरकार, होटल की वह रात बिना किसी और बड़ी घटना के बीत गई, लेकिन उस गुस्से वाली माँ की बहादुरी सबको याद रह गई। फ्रेंची ने भी माना कि अगले दिन अगर बच्चे फिर शरारत करें तो शायद वही माँ उनके गुस्से का अगला निशाना बन जाएं!

तो अगली बार जब आप किसी होटल में जाएं और बच्चों की धमाचौकड़ी देखें, तो याद रखिए – वहाँ कोई न कोई गुस्से वाली माँ जरूर होगी, जो सबकी क्लास लगाने को तैयार है! और होटल स्टाफ को सलाम, जो हर वीकेंड ऐसे 'हॉकी वीकेंड' का सामना करते हैं – उनके लिए ये किसी रणभूमि से कम नहीं।

आपके पास भी ऐसे कोई मज़ेदार होटल या यात्रा के किस्से हैं? नीचे कमेंट में जरूर साझा करें! और हाँ, बच्चों को शरारत करने दें, मगर अपनी ज़िम्मेदारी भी समझें – वरना अगली बार कोई और माँ सबकी धुलाई कर जाएगी!


मूल रेडिट पोस्ट: The gloriest hockey evening ever