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सही समय, सही जगह – जब शराबी की किस्मत ने उसे धोखा दिया

पर्यटन क्षेत्र में व्यस्त होटल बार का दृश्य, जीवंत वातावरण और विविध भीड़ को दर्शाता है।
हमारे जीवंत होटल बार का एक सिनेमाई झलक, जहाँ पर्यटक और स्थानीय लोग मिलते हैं, शहर के दिल में अविस्मरणीय पल बनाते हैं।

कहते हैं न, "ऊंट के मुंह में जीरा" और "जहाँ सैयां भए कोतवाल, तो डर काहे का?" पर जब किस्मत ही साथ न दे, तो क्या पुलिसवाले, क्या आम आदमी – सबक सीखना ही पड़ता है। आज की कहानी है एक ऐसे होटल की, जहाँ रोज़ाना की हलचल के बीच एक शराबी की बदकिस्मती ने सबको हँसा दिया।

हमारे देश में होटल बार का अनुभव हर किसी के लिए अलग होता है। कोई दोस्तों के साथ गपशप करने आता है, तो कोई ज़िंदगी के बोझ से भागकर दो घूंट सुकून ढूँढ़ने। लेकिन जब हद पार हो जाये, तो बारटेंडर की भी जिम्मेदारी बनती है कि वो सीमा तय करे। बस, ऐसा ही हुआ अमेरिका के एक व्यस्त टूरिस्ट इलाके के होटल बार में – जहाँ एक शराबी ने बखेड़ा खड़ा कर दिया, लेकिन इस बार उसकी किस्मत ने उसे ऐसी जगह ला खड़ा किया, जहाँ वो कल्पना भी नहीं कर सकता था!

होटल बार की रंगीन शाम और एक अनचाही घटना

उस शाम, घड़ी की सुइयाँ मुश्किल से 4:30 बजा रही थीं। बार में हल्की-फुल्की चहल-पहल थी। कुछ लोग ट्रेड शो के बाद तसल्ली से बैठकर अपनी-अपनी ड्रिंक का मज़ा ले रहे थे। तभी एक अधेड़ उम्र का आदमी, जो शायद सुबह से ही जाम पर जाम लगा रहा था, ऐसी हालत में पहुँच गया कि उसकी जुबान लड़खड़ाने लगी। हमारे देश में अक्सर ऐसे दृश्य छोटे शहरों के ढाबों या शादी-ब्याह के टेंटों में देखने को मिलते हैं – जब 'भैया, जरा और पिलाओ', 'मुझे कौन रोक सकता है' जैसी आवाज़ें गूंजने लगती हैं।

यहाँ भी महिला बारटेंडर ने शालीनता से मना कर दिया – "अब और नहीं मिलेगा आपको।" बस, जैसे किसी ने बिच्छू की पूंछ दबा दी हो! महाशय आगबबूला हो गए, गालियाँ बकने लगे और धमकी दे डाली – "अभी यहीं मार डालूँगा!" सोचिए, हमारे देश में ऐसा कोई करता, तो आस-पड़ोस के लोग, होटल स्टाफ, सब मिलकर उसे बाहर का रास्ता दिखा देते। लेकिन यहाँ किस्मत ने अलग खेल रचा था।

किस्मत का करिश्मा – जब पूरा बार पुलिसवालों से भरा हो

हर किसी के जीवन में एक दिन ऐसा आता है जब वो गलत जगह, गलत समय पर पहुँच जाता है। इस शराबी के साथ भी यही हुआ। जिस दिन उसने ये तमाशा किया, उसी दिन होटल में पुलिस अफसरों का ट्रेड शो चल रहा था – यानी पूरा बार सादी वर्दी में बैठे पुलिसवालों से भरा हुआ था! सोचिए, जैसे भारत में किसी मेले या कुंभ में पुलिसवालों की टोली चाय की दुकान पर बैठी हो, और कोई नासमझ वहाँ हुड़दंग करने लगे।

शराबी महाशय तो पोस्टर तक नहीं देख पाए, जिस पर साफ-साफ लिखा था कि आज पुलिस सम्मेलन है। जैसे ही उनकी धमकी गूंजी, पूरे बार में सन्नाटा छा गया – फिर, अगले ही पल पुलिसवालों ने बिना वर्दी के ही 'कर्म' दिखा दिया। उन्होंने शांतिपूर्वक शराबी को बाहर का रास्ता दिखाया, और हमारी बहादुर बारटेंडर को हौसला दिया। होटल के मैनेजर ने भी राहत की सांस ली – "इतना सुरक्षित वीकेंड मैंने कभी नहीं देखा!"

बार, शराब और होटलवालों की परेशानी – पाठकों की राय

इस घटना पर Reddit समुदाय में काफी मज़ेदार चर्चाएँ हुईं। एक सज्जन ने लिखा, "कभी-कभी सोचता हूँ, अच्छा है हमारे होटल में बार नहीं है, वरना ऐसे झंझट कौन झेले!" भारत में भी छोटे शहरों के गेस्टहाउस वाले अक्सर कहते हैं – "भैया, बार खोलेंगे तो पुलिस, समाज वाले सब सिर पर चढ़ जाएंगे!"

एक और पाठक ने हँसी-मजाक में कहा, "अगर वो शराबी भी पुलिस वाला ही निकला होता, तो उसके दोस्तों ने उसकी इज्जत बचाई होती!" इस पर सबने खूब ठहाके लगाए। वैसे, हमारे यहाँ भी अक्सर पुलिसवालों के बीच 'भाईचारा' दिख ही जाता है।

किसी ने ये भी जोड़ा – "हमारे होटल में बार रात 12 बजे बंद कर देते हैं, वरना आधी रात को शराबियों से निपटना सिरदर्द बन जाता है।" सोचिए, बड़े-बड़े शहरों के होटल मालिकों की भी यही दुविधा है – ज्यादा देर तक बार खुला रखा, तो हंगामा तय है!

एक और मज़ेदार घटना किसी ने साझा की – "एक बार सेना के जवान बार से लौटकर लॉबी में 'डोंट स्टॉप बिलीविंग' गा रहे थे, पाँच मिनट तक बस वही गाना...!" भारतीय शादियों की रातों को याद करिए, जब बारातियों की टोली 'मेरा दिल ये पुकारे आजा' पर नाचती है – वही माहौल!

तुरंत मिला कर्मा – जब पुलिसवाले खुद मौजूद हों!

इस पूरे वाकये में सबसे अच्छा यही था कि शराबी की नीयत और किस्मत दोनों ने उसका साथ छोड़ दिया। वरना आमतौर पर तो पुलिस को फोन करो, घंटों इंतज़ार करना पड़ता है। लेकिन यहाँ तो 'कर्मा' ने तुरंत अपना रंग दिखाया। सभी पाठकों ने माना, "ऐसी घटनाएँ सबक भी देती हैं और हँसी भी।"

एक पाठक ने चुटकी ली – "यहाँ तो रक्षक ही भक्षक पर भारी पड़ गए!" यानी, जब कानून के रखवाले सामने हों, तो शरारती तत्वों की एक न चलती।

निष्कर्ष – होटल बार में भी किस्मत का बड़ा रोल है!

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि चाहे आप होटल में हों या सड़क पर, अपनी मर्यादा कभी न भूलें। और हाँ, किस्मत कब पलटी मार दे, कौन जानता है! कभी-कभी अनजाने में ऐसी जगह पहुँच जाते हैं जहाँ अपनी हरकतों का हिसाब मिनटों में मिल जाता है।

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा मजेदार या अजीब किस्सा हुआ है? या कभी आपने देखा है कि कोई अपनी ही चाल में फँस गया हो? अपनी राय और अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें – क्योंकि कहानियाँ तो सबकी होती हैं, बस मंच चाहिए उन्हें सुनने और सुनाने का!


मूल रेडिट पोस्ट: Wrong place, wrong time