सर्विस एनिमल्स बनाम इमोशनल सपोर्ट एनिमल्स: होटल की रिसेप्शन डेस्क से मजेदार किस्से
अरे भई, होटल की रिसेप्शन डेस्क कोई शांति का मंदिर नहीं है! यहाँ हर दिन नए-नए मेहमान, तरह-तरह की फरमाइशें और कभी-कभी ऐसे मेहमान भी आते हैं जिनके साथ उनके प्यारे जानवर भी होते हैं। अब जानवर भी दो तरह के – एक जो सच में किसी जरूरतमंद का सहारा हैं (Service Animals), और दूसरे जो सिर्फ दिल बहलाने के लिए साथ लाए जाते हैं (Emotional Support Animals)।
लेकिन भाई, असली और नकली की पहचान करना यहाँ किसी CID वाले का काम लगता है!
होटल में जानवर का स्वागत? कानून क्या कहता है!
अब आप सोच रहे होंगे, "अरे, जानवर तो जानवर है, फर्क ही क्या?"… फर्क है भई, और बड़ा गहरा है! अमेरिका में कानून साफ़ कहता है – Service Animal, मतलब जो किसी मेडिकल जरूरत के लिए ट्रेनिंग पाकर मदद करता है (जैसे नेत्रहीन के लिए गाइड डॉग)। वहीं Emotional Support Animal यानी दिलासा देने वाला साथी, जिसे सिर्फ भावनात्मक सहारा देना आता है – उसके लिए कोई कानूनी छूट नहीं।
कई बार मेहमान रिसेप्शन पर आते हैं और कहते हैं, "ये मेरा सर्विस डॉग है, इसे अंदर आने दो।" अब होटल कर्मचारी बेचारा न पूछ सकता है न देख सकता है कोई पेपर, क्योंकि HIPAA नाम का कानून (मेडिकल गोपनीयता) बीच में आ जाता है। नियम बस दो सवाल पूछने की इजाजत देते हैं:
1. क्या ये जानवर आपकी किसी डिसेबिलिटी के लिए जरूरी है?
2. ये जानवर आपके लिए कौन-सा विशेष काम करता है?
अगर जवाब साफ-साफ नहीं आता, तो मामला फँस जाता है!
नकली सर्विस डॉग्स और होटल वालों की मुसीबत
एक Reddit यूज़र ने लिखा, "मैं तो चाहता हूँ कि सबको कोई पहचान-पत्र मिल जाए, जिससे झंझट ही खत्म हो जाए!"
कुछ तो ऐसे मेहमान आते हैं, जिन्हें सवाल सुनकर ही पसीना आ जाता है, और जवाब देने के बजाय बहस शुरू कर देते हैं। कोई-कोई तो नकली सर्टिफिकेट भी ले आता है – जैसे गाँव में लोग नकली राशनकार्ड बनवा लेते हैं!
कई बार ऐसे "इमोशनल सपोर्ट डॉग" होटल की लॉबी में ही भौंकना, कूदना, गंदगी फैलाना शुरू कर देते हैं। एक कमेंट में किसी ने मज़ाकिया अंदाज में कहा, "भाईसाहब, अगर आपका कुत्ता हमारी कालीन पर… (आप समझ ही गए होंगे), और आप कह रहे हैं कि ये सर्विस एनिमल है, तो क्या आपको पता है कि झूठ बोलने पर जेल भी हो सकती है?"
होटल वालों की जुगत और मेहमानों की जिद
होटल कर्मचारी भी क्या करें – न ज्यादा सख्ती दिखा सकते, न हर किसी की बात पर भरोसा कर सकते।
एक कमेंट में किसी ने सलाह दी, "अगर कोई धमकी दे कि वो कोर्ट जाएगा, तो बोल दो – अब सारी बात हमारे लीगल डिपार्टमेंट से करो, हमसे नहीं।" कुछ तो ऐसे भी हैं जो कहते हैं, "भाई, अगर कुत्ता कमरा खराब कर गया, तो चाहे सर्विस एनिमल हो या नहीं – जुर्माना तो लगेगा!"
एक और मजेदार टिप्पणी थी: "सच्चा सर्विस एनिमल वो है, जो मालिक के साथ चुपचाप चलता है, काउंटर पर बिना कहे बैठ जाता है, किसी को काटता नहीं, भौंकता नहीं – क्योंकि उसकी ट्रेनिंग में लाखों रुपये लगे हैं।"
लेकिन जो कुत्ता होटल में दौड़-दौड़कर सबको परेशान करे, वो… चलो, आप समझदार हैं!
भावनाओं का सहारा या कानून का मज़ाक?
भारत में जहाँ ज्यादातर लोग कुत्ते-बिल्ली को घर के बाहर रखते हैं, वहाँ ये किस्से सुनकर शायद हंसी आए। लेकिन सोचिए, अगर आपके ऑफिस में कोई सहकर्मी हर दिन अपना "इमोशनल सपोर्ट तोता" लेकर आए और बोले कि "इसके बिना मेरा काम नहीं चलता" – तो आप क्या करेंगे?
होटल कर्मचारी कहते हैं, "हमें इन सवालों की ट्रेनिंग दी गई है, लेकिन खुद मन करता है कि काश कोई पहचान-पत्र या यूनिफ़ॉर्म होती, जिससे असली-नकली का फर्क समझ में आए।"
एक पाठक ने बढ़िया लिखा, "असल में जो लोग सच में जरूरतमंद होते हैं, वो कभी हंगामा नहीं करते; असली दिक्कत तो उन लोगों से है, जो बिना वजह सिस्टम का फायदा उठाकर सबका सिर दर्द बढ़ा देते हैं।"
निष्कर्ष: कानून, सहानुभूति और थोड़ी सी समझदारी
अमेरिकी होटल स्टाफ का ये संघर्ष पढ़कर लगता है कि वहाँ भी "जुगाड़" और "धौंस" का चलन है, बस अंदाज़ अलग है। कानून साफ है, लेकिन लोग उसमें भी रास्ता निकाल ही लेते हैं।
तो अगली बार जब आप विदेश यात्रा करें और किसी होटल में जानवर के साथ दिखें, तो याद रखिए – हो सकता है वो सच में किसी की मदद कर रहा हो, या बस "भावनात्मक सहारा" बनकर होटल वालों का इम्तिहान ले रहा हो!
क्या आपके साथ भी कभी किसी ऑफिस, होटल या ट्रेन में ऐसे अजीबोगरीब अनुभव हुए हैं? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइये – और हाँ, अगर कोई "इमोशनल सपोर्ट कबूतर" साथ लाए, तो उसकी कहानी तो विशेष रूप से सुनना चाहेंगे!
मूल रेडिट पोस्ट: Service Animals vs Emotional Support animals