समुंदर वाला कमरा चाहिए! जब एक मेहमान ने होटल वालों की परीक्षा ली
होटल या रिसॉर्ट में ठहरना अपने आप में एक अनुभव होता है। खासकर अगर जगह माउई जैसी सुंदर हो, तो हर कोई चाहता है कि उसके कमरे की खिड़की से नीला समुंदर दिखे, लहरों की आवाज़ सुनाई दे। लेकिन क्या हर किसी की इच्छा पूरी हो सकती है?
अगर आप भी कभी होटल में कमरे के लिए बातचीत कर चुके हों, तो ज़रूर जानते होंगे कि “समुंदर व्यू” वाला कमरा मिलना लॉटरी लगने जैसा है। आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं एक ऐसी ही घटना, जिसमें एक मेहमान ने होटल के स्टाफ की परीक्षा ही ले ली!
समुंदर के दीदार की ज़िद – होटल की सच्चाई
माउई के एक बिज़ी टाइमशेयर होटल में काम करने वाले स्टाफ की कहानी है। वहाँ के कुछ कमरे बेहद आकर्षक हैं, जिनसे समुंदर का नज़ारा मिलता है। लेकिन उन कमरों की संख्या सीमित है, और सबसे पहले उन्हीं लोगों को मिलते हैं, जो होटल के मालिक या पुराने सदस्य हैं। बाकी लोगों को, खासकर जो डिस्काउंट पैकेज में ठहरने आते हैं, उन्हें साफ़-साफ़ बता दिया जाता है कि उनका कमरा “नो-व्यू” कैटेगरी में होगा यानी खिड़की से पार्किंग या सड़क ही दिखेगी।
लेकिन फिर आईं “करन आंटी” (नाम बदल दिया है, पर आप समझ ही गए होंगे)। अरे, भारत में भी तो ऐसे मेहमान खूब मिल जाते हैं – शादी-ब्याह या होटल में जो सबसे ऊँची कुर्सी मांग लें, यही टाइप!
“क्या मैं पार्किंग देखने के लिए आई हूँ?” – हंगामा होटल लॉबी में
करन आंटी ने होटल के रिसेप्शन पर आते ही शुरू कर दिया – “मुझे समुंदर वाला कमरा चाहिए! मैंने फोन पर बात की थी, कहा गया था कि मिल जाएगा। मैं ऐसी दिखती हूँ, जो पार्किंग व्यू में ठहरूं?” होटल स्टाफ की तो जैसे परीक्षा शुरू हो गई। मन तो किया कह दूँ – “जी, बिलकुल!” लेकिन नौकरी भी कोई चीज़ है, मुस्कुरा कर समझाना पड़ा – “मैम, आपके पैकेज में व्यू वाला कमरा नहीं है, ये बुकिंग के समय बताया गया था।”
लेकिन करन आंटी कहाँ मानने वाली थीं! धमकी पर उतर आईं – “अगर मुझे अपग्रेड नहीं मिला, तो मैं कभी कुछ नहीं खरीदूँगी! मैंने Boonvoy पर फोन किया, वहाँ से कहा गया आपके पास समुंदर वाला कमरा है!” स्टाफ ने फिर नियम समझाए – “रूम ब्लॉकिंग सिस्टम है, आगे बढ़ने की कोई जगह नहीं।”
आंटी ने गुस्से में बिना कमरा देखे ही रिज़र्वेशन कैंसल करवा दी और बोलीं, “मैं तो तिगुना पैसा देकर दूसरे होटल में रह लूँगी, बस समुंदर दिखना चाहिए!”
मेहमान गए, होटल में चैन आया – कम्युनिटी की प्रतिक्रिया
जब करन आंटी बाहर गईं, होटल स्टाफ ने चैन की सांस ली। Reddit पर एक यूज़र ने मज़ाक में लिखा – “बाकी मेहमानों की तरफ़ से आपका धन्यवाद, जिन्हें करन आंटी के अगले हंगामे से बचा लिया!”
एक और ने चुटकी ली – “जब आंटी अगले होटल में तीन गुना रेट देखकर वापस लौटेंगी, तब और भी गुस्सा होंगी – और कहेंगी कि ये होटल वाले ही दोषी हैं!” किसी ने तो यहाँ तक कह दिया, “अगर सभी होटल फुल हुए तो आंटी को समुंदर किनारे बीच पर ही सोना पड़ेगा, बस हाई टाइड का ध्यान रखना!”
एक अनुभवी होटल कर्मचारी ने अपने अनुभव साझा किए – “मुझे तो कोई भी कमरा मिले, साफ़ बिस्तर और ठंडा फ्रिज मिल जाए, वही काफी है। सबको इंस्टाग्राम के लिए समुंदर चाहिए!”
भारतीय संदर्भ और ह्यूमर – हमारी सोच कितनी अलग?
सोचिए, भारत में भी कितनी बार हमने ऐसे गेस्ट देखे हैं, जो फाइव स्टार होटल बुक करते हैं, लेकिन बजट डील में पूरा ताजमहल चाहिए! कई बार होटल के बाहर सड़क, ट्रैफिक या पड़ोस की बिल्डिंग ही दिखती है, लेकिन शिकायत का सिलसिला रुकता नहीं। कभी-कभी तो लोग होटल की लोकेशन भी गूगल पर देखे बिना बुकिंग कर लेते हैं, और फिर रिसेप्शनिस्ट को कोसते हैं – “समुंदर कहाँ है, साहब?”
एक कमेंट में तो किसी ने सुझाव दिया, “हर कमरे में समुंदर की वॉलपेपर लगा दो, सब खुश!” ये भी सच है – असली मज़ा तो बाहर घूमने-फिरने में है, कमरे में तो हम सोने और नहाने ही आते हैं!
निष्कर्ष – होटल स्टाफ के लिए सलाम, और सब्र का इम्तिहान
इस कहानी से एक बात साफ़ है – होटल में स्टाफ होना आसान नहीं। हर दिन नए किस्म के मेहमान, नई फरमाइशें, और कभी-कभी बेमतलब की नाराज़गी झेलनी पड़ती है। लेकिन स्टाफ का धैर्य और पेशेवर अंदाज़ काबिल-ए-तारीफ़ है।
अब आप ही बताइए – क्या कभी आपके साथ भी ऐसी कोई घटना हुई है? या आपने भी किसी “करन” को होटल में हंगामा करते देखा है? अपने अनुभव कमेंट में ज़रूर साझा करें – क्योंकि हर कहानी में छुपा होता है थोड़ा मज़ा और थोड़ा सबक!
मूल रेडिट पोस्ट: Entitled…but I WANT an ocean view! I called and they said you had it, I better get it!