सबसे बेतुका रिफंड माँगने वाला मेहमान: होटल वालों की असली कहानी
होटल इंडस्ट्री में काम करने वालों की ज़िंदगी जितनी रंगीन लगती है, असल में उतनी ही उतार-चढ़ाव भरी भी होती है। हर दिन नए-नए मेहमान, अलग-अलग फरमाइशें, और कभी-कभी ऐसी माँगें सामने आ जाती हैं, जिन्हें सुनकर हँसी भी आती है और हैरानी भी होती है। आज मैं आपको एक ऐसी ही हास्यास्पद घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे—"भैया, ये तो हद ही हो गई!"
जब 'नॉन-रिफंडेबल' बुकिंग पर भी रिफंड माँगा गया
कुछ दिन पहले, हमारे होटल के डाइरेक्टर ऑफ़ सेल्स एंड मार्केटिंग (DOSM) साहब को एक कॉल आई। कॉल करने वाला कोई आम मेहमान नहीं, बल्कि एक ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी (मान लीजिए, 'सक्सपेडिया') की प्रतिनिधि थी। उसने बड़ी विनम्रता से रिफंड की रिक्वेस्ट की।
अब होटल इंडस्ट्री में ऐसे कॉल्स रोज़ आते हैं, इसलिए सर ने भी वही प्रोफेशनल अंदाज़ में पूछा—"कृपया पूरी जानकारी दें, ताकि मैं आपकी मदद कर सकूँ।"
जैसे ही केस की डिटेल्स सामने आईं, सर भी सोच में पड़ गए। मेहमान ने गलत तारीख पर बुकिंग कर दी थी—कोई बात नहीं, ऐसा तो हो जाता है। लेकिन बुकिंग जिस दिन के लिए थी, वो तारीख तो कब की निकल चुकी थी। ऊपर से, वो एक ऐसी रेट थी, जिसमें न तो डेट बदल सकती थी, न कैंसिलेशन, और न ही रिफंड!
इतना ही नहीं, न तो मेहमान ने होटल को पहले से सूचित किया, न ही एजेंसी ने कोई खबर दी। होटल वालों ने रात भर कमरा खाली रखा, क्या पता मेहमान लेट नाइट आ जाएं। लेकिन साहब, कोई आया ही नहीं। अब हफ्ते भर बाद, कॉल आ गई—"रिफंड कर दीजिए।"
कम्युनिटी की चटपटी टिप्पणियाँ: "अरे, ये तो नया फैशन है!"
रेडिट पर इस घटना को पढ़कर कई लोगों ने अपनी-अपनी राय दी, और मज़ाकिया कमेंट्स की तो बारिश ही हो गई। एक टिप्पणीकार ने लिखा—"भैया, ऐसे रिफंड माँगने वाले तो अब हर साल आधा दर्जन आते हैं। प्लान बदल गया, अब पैसे चाहिए। हम मना करते हैं तो जैसे आसमान टूट पड़ता है!"
दूसरे ने चुटकी ली—"लगता है कॉल सेंटर वालों की स्क्रिप्ट में ही लिखा है—पहले हैरानी दिखाओ, फिर दोबारा माँगो।"
किसी ने तो यह तक कह दिया—"ये 'म्यूचुअल गेस्ट' शब्द सुन-सुनकर अब तो कान पक गए। भाई, गलती तुम्हारी थी, अब होटल को क्यों दोष?"
एक मजेदार वाकया और सुनिए—एक बार किसी ने दूसरे होटल की बुकिंग का रिफंड माँगने के लिए भी हमारे होटल को कॉल कर दिया! बोले, 'उधर से बात नहीं हो रही, आप ही पैसे दिला दो।' ऐसे में होटल स्टाफ का रिएक्शन बिलकुल वैसा था जैसा हमारे यहाँ कोई ग्राहक पड़ोस की दुकान का उधार यहाँ माँग ले!
भारतीय नजरिए से: "अरे भइया, नियम तो नियम है!"
हमारे यहाँ भी कई बार लोग रेलवे या बस टिकट बुक करते वक्त लिखे नियम पढ़ते नहीं, और फिर काउंटर पर पहुँचकर लड़ते हैं—"अरे, पैसे तो वापस दो!" अब होटल की 'नॉन-रिफंडेबल' बुकिंग भी कुछ वैसी ही है। बुकिंग के समय बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा रहता है—"पैसे वापस नहीं होंगे अगर आप नहीं आए।" लेकिन फिर भी, आशा की डोर छोड़ना कौन चाहता है?
एक और टिप्पणी में लिखा था—"बुकिंग के वक्त एक और लाइन डाल दो—नॉन-रिफंडेबल मतलब पैसे वापस नहीं मिलेंगे। क्या आप पक्के हैं?"—फिर भी लोग तर्क-वितर्क करने से नहीं चूकते!
होटल वालों की मजबूरी और मेहमानों की उम्मीदें
रात के समय जब होटल स्टाफ शांति से नाइट ऑडिट कर रहा होता है, तभी कोई कॉल करके हफ्ते-पुराने रिफंड की बात छेड़ देता है। एक टिप्पणी में लिखा था—"रात में कॉल करके तो जैसे लोग उम्मीद करते हैं कि जूनियर स्टाफ गलती से पैसे लौटा देगा!"
एक और कमेंट में किसी ने बढ़िया तर्क दिया—"अक्सर लोग टाइमज़ोन का ध्यान नहीं रखते, कॉल सेंटर 24x7 चलता है, और उम्मीद करते हैं कि होटल में भी हर कोई हर वक्त तैयार बैठा है।"
लेकिन होटल का स्टाफ भी आखिर इंसान है, नियमों के दायरे में ही चलना पड़ता है। जैसा कि मूल पोस्टर ने कहा—"अगर हम हँसी-मजाक न करें, तो पागल ही हो जाएँ!" यही वजह है कि ऐसी घटनाओं को लेकर होटल वाले भी हँसी में उड़ा देते हैं, वरना तो सिर पकड़कर बैठने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते।
निष्कर्ष: आप भी सोचिए, क्या ये सही है?
दोस्तों, होटल इंडस्ट्री में काम करना जितना ग्लैमरस दिखता है, उतना ही धैर्य और समझदारी भी मांगता है। 'नॉन-रिफंडेबल' का मतलब है—पैसे वापस नहीं मिलेंगे, चाहे जो हो जाए! लेकिन उम्मीदों का क्या? मेहमानों का दिल भी तो बच्चा है, और कभी-कभी उम्मीदें भी हद पार कर जाती हैं।
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चलते-चलते—"ज़िंदगी में ठहाका ज़रूरी है, वरना होटल की नौकरी में सिरदर्द ही सिरदर्द!"
मूल रेडिट पोस्ट: Most absurd refund request