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स्कूल की सबसे बड़ी बदमाश को मिली सबसे मज़ेदार छोटी बदला

स्कूल में बलात्कार और छोटे प्रतिशोध के अनुभवों पर विचार करता व्यक्ति, कार्टून 3D चित्रण।
यह जीवंत कार्टून-3D चित्र बलात्कार पर विजय पाने और प्रतिशोध के कड़वे-मीठे अनुभव को दर्शाता है। यह संकल्प और व्यक्तिगत विकास की यात्रा को दिखाता है, जब narrator अपने अविस्मरणीय बलात्कारी के बारे में सोचता है।

स्कूल के दिन हमेशा यादों से भरे रहते हैं—कुछ अच्छे, कुछ बुरे और कुछ तो ऐसे भी जो ताउम्र दिल को चुभते रहते हैं। हम सबने कभी न कभी बदमाशी या तंग करने वालों का सामना किया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सालों बाद वही बदमाश खुद आपके सामने आकर अपने कर्मों का फल पाए? आज की कहानी है एक ऐसी ही महिला की, जिसने अपनी सबसे बड़ी स्कूल वाली बदमाश को बहुत ही छोटे, लेकिन दिल को छू लेने वाले अंदाज़ में सबक सिखाया।

जब स्कूल की बदमाशी बनी ज़िंदगी की कसक

कहानी की नायिका बताती हैं कि स्कूल के दिनों में उन्हें बहुत लोगों ने तंग किया, लेकिन वक्त के साथ उन सबका दिल भी बदल गया। सोशल मीडिया या आमने-सामने मुलाकात में ज़्यादातर लोगों ने माफ़ी मांगी, जिसे उन्होंने खुले दिल से स्वीकार भी किया। मगर एक लड़की थी—सबसे बड़ी बदमाश, जिसने तीन साल तक उनका जीना हराम कर रखा था। शारीरिक हिंसा, गंदी बातें, और हर रोज़ की नफरत… सोचिए, ऐसा ज़हर कौन भूल सकता है?

समय बीता, ज़िंदगी नई राहों पर निकल गई। अब वो महिला खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी जी रही हैं, बचपन के दोस्त से शादी, प्यारा बेटा, सच्ची सहेली—यानि चारों ओर प्यार और अपनापन। पुराने घाव भर चुके थे, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था।

१५ साल बाद फिर हुई मुलाकात: पर इस बार 'वज़न घटाने की गोलियों' के साथ

सालों बाद, एक दिन वो महिला एक 'माँओं के लिए' फेसबुक पेज पर पोस्ट-पार्टम वज़न घटाने को लेकर चर्चा कर रही थीं। अचानक एक बहुत ही जाना-पहचाना नाम दिखा—वही स्कूल की बदमाश! अबकी बार कोई गाली-गलौज नहीं, बल्कि वज़न घटाने की गोलियां बेचने आई थी। सोचिए, कल तक जो तंग करती थी, आज वही आपके सामने कुछ बेचने आई हो तो कैसा लगेगा?

महिला ने बड़े सादे अंदाज़ में जवाब दिया, "नहीं चाहिए, धन्यवाद।" लेकिन बदमाश कहाँ मानने वाली थी! सीधा मैसेज में आकर गोलियों की खूबियाँ गिनाने लगी, ऑफर पर ऑफर... महिला ने भी सोचा, चलो सुनते हैं, आखिर ऐसा पल बार-बार थोड़े ही आता है!

छोटा सा जवाब, बड़ी राहत: "भविष्य में नाम देखकर ही बेचना!"

आखिरकार जब बदमाश ने बोलना बंद किया, महिला ने बड़े ठंडे अंदाज़ में जवाब दिया, "मैं नहीं लूंगी, धन्यवाद।" और फिर जोड़ा, "अगली बार किसी को अपना सामान बेचने से पहले नाम देख लिया करो..." और सीधा उसे ब्लॉक कर दिया!

कहानी की असली मज़ा तो यही है—न कोई झगड़ा, न कोई बवाल, बस सिंपल ब्लॉक! महिला खुद कहती हैं, "ये सबसे सुकून देने वाला बदला था जो मैंने कभी लिया।"

कमेंट्स में लोगों की ताली और ठहाके

रेडिट पर इस छोटी सी कहानी ने लोगों के दिल जीत लिए! एक पाठक लिखते हैं, "आप चाहें तो फेसबुक पर रिपोर्ट कर सकती थीं, हो सकता है उसका अकाउंट ही बंद हो जाता।" तो वहीं दूसरे कहते हैं, "आप तो बहुत मैच्योर निकलीं, वरना मैं तो झूठा ऑर्डर देकर खूब परेशान करता!"

एक और मजेदार कमेंट था, "अरे, ये तो वही लोग होते हैं जो हर जगह अपने MLM (Multi Level Marketing) वाले चक्कर चलाते हैं। इन्हें तो इंसान की जगह सिर्फ रुपयों के निशान दिखते हैं!"

किसी ने तो यहां तक कहा, "भई, बदमाशी का असली बदला तो यही है कि वही लड़की अब MLM में फंसी हुई है, और उसकी हालत देखिए—जिसे वो तंग करती थी वही उस पर 'No Thank You' बोलकर चलता बना!"

भारतीय नजरिए से—छोटा बदला, बड़ी सीख

हमारे यहां अकसर कहा जाता है, "जैसी करनी, वैसी भरनी।" स्कूल या कॉलेज में तंग करने वाले सोचते हैं कि उनका किया कभी सामने नहीं आएगा, लेकिन ज़िंदगी कब किस मोड़ पर पुराने हिसाब-किताब चुकता करवा दे, कौन जानता है?

महिला ने बदमाश को न तो अपशब्द कहे, न ही उसकी बेइज्जती की, बस शांति से उसे उसकी औकात दिखा दी। यही असली जीत है—अपने पुराने दर्द को माफ़ करके, सामने वाले को उसकी गलती का एहसास करवा देना, वो भी बिना किसी शोर-शराबे के।

अंत में—आपका क्या कहना है?

तो दोस्तों, ऐसी छोटी-छोटी जीतें ही असली सुकून देती हैं। ज़रूरी नहीं कि हर बदला जोर-शोर से लिया जाए, कभी-कभी एक ठंडा "No Thank You" और एक ब्लॉक ही काफी है।

क्या आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है? क्या आपने कभी अपने पुराने बदमाश को ऐसे ही किसी सुकून देने वाले अंदाज़ में जवाब दिया है? अपने अनुभव कमेंट में जरूर शेयर करें!

ज़िंदगी का असली मजा तो ऐसे ही किस्सों में छुपा रहता है—जहाँ हंसी, तंज और थोड़ा सा 'पेटी रिवेंज' सब मिल जाए!


मूल रेडिट पोस्ट: This was my petty revenge....