स्कूल के गुंडे को मिला 15 साल बाद करारा जवाब – एक गिटार की अनोखी बदला कहानी
कहते हैं, वक्त हर घाव भर देता है, लेकिन बचपन में किसी का किया गया बुरा व्यवहार अक्सर ताउम्र याद रह जाता है। हमारे समाज में स्कूल बुली यानी गुंडागर्दी को कभी हल्के में ले लिया जाता था, खासकर 80-90 के दशक में। आज मैं आपको एक ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें एक शख्स ने अपने स्कूल के गुंडे को 15 साल बाद ऐसा जवाब दिया कि पढ़कर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी।
जब स्कूल की खिड़की से झाँकती ज़िंदगी बदल गई
ये कहानी है 80 के दशक की, जब स्मार्टफोन तो दूर, स्कूल में कोई भी शिकायत करने का सिस्टम भी ढंग का नहीं था। हमारे किस्से के हीरो, जिन्हें हम 'राज' बुलाएँगे, 9वीं कक्षा में थे। हर दिन वो अपनी क्लास की दूसरी मंज़िल की खिड़की से उस लड़की को हाथ हिलाकर "हाय" बोलते, जो उन्हें पसंद थी – कुछ-कुछ ‘हम आपके हैं कौन’ वाली मासूमियत!
एक दिन अचानक, एक लड़का – जिससे राज का कोई लेना-देना न था – पीछे से आया और राज को उनकी बेल्ट पकड़कर खिड़की के पास रखी बुकशेल्फ़ पर उठा दिया। वो तो जैसे बॉलीवुड फिल्म का सीन था – राज आधा बाहर, नीचे झाड़ियाँ और ज़मीन साफ़ दिख रही थी, और बच गई तो बस साँसें! बड़ी मुश्किल से, जब दूसरे बच्चे क्लास में आने लगे, उस गुंडे ने राज को वापस खींचा। राज की हालत ऐसी थी कि आँसू, नाक बहना – सब खुद से छुपाने की कोशिश! न कोई टीचर कुछ बोला, न किसी ने मदद की, न घर पर खबर पहुँची।
स्कूल के दिन गए, पर घाव तो रह ही गया
राज ने जैसे-तैसे खुद को संभाला और अगले दिन जैसे कुछ हुआ ही न हो, अपने रास्ते निकल लिए। बाद में एक विज्ञान की टीचर – जो उसी गुंडे की मौसी निकलीं – राज के पास आईं और बताया कि उस लड़के को अब शहर के दूसरे स्कूल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर कभी कोई बात करनी हो तो मेरे दरवाज़े हमेशा खुले हैं।"
सोचिए, उस ज़माने में कितनी बार स्कूल-प्रशासन ऐसी बातों को नजरअंदाज कर देता था! Reddit पर एक पाठक ने बिलकुल सही लिखा – "80 के दशक में घरवालों को बुलाना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी, जब तक कोई बहुत बड़ी घटना न हो जाए।"
15 साल बाद – किस्मत का करिश्मा और गिटार वाली रिवेंज
समय बीत गया। राज अब दूसरे शहर में बस चुके थे और एक शानदार Gibson SG गिटार की तलाश में hometown लौटे। वहाँ एक बहुत सस्ते दाम पर गिटार मिल रहा था – बस 200 डॉलर में! मिलना तय हुआ, बात-चीत शुरू हुई, और धीरे-धीरे दोनों को समझ आया कि स्कूल के दिन एक जैसे ही थे।
फिर, अचानक – सामने वाला पहचान गया, "अरे, ये तो वही है जिसे मैंने खिड़की से बाहर फेंकने की कोशिश की थी!" अब सीन देखिए – वो गुंडा, जो कभी शेर बना फिरता था, अब सफेद पड़ गया, काँपने लगा। बहाना बनाया, "कुछ काम आ गया है" और निकल भागा।
राज ने भी मौका देखकर, मुस्कुराते हुए कहा, "भैया, ये गिटार मैं अपने बचपन के दर्द की कीमत के तौर पर ले जा रहा हूँ।" बेचारा, बस बड़बड़ाया, हड़बड़ाहट में हामी भरी और भागता हुआ अपनी गाड़ी में बैठकर गायब हो गया। राज खड़े-खड़े हँसते रहे – "ये क्या हो गया भाई!" और गिटार लेकर घर लौट आए – एकदम फिल्मी अंदाज़ में।
कम्युनिटी की प्रतिक्रियाएँ – कभी हँसी, कभी सोच
Reddit पर इस कहानी ने धूम मचा दी। कई लोगों ने पुराने स्कूल के दिनों को याद किया। किसी ने कहा, "ऐसा लगता है, उस लड़के की मौसी ने उसे ऐसा डाँटा कि वो ज़िंदगी भर नहीं भूला होगा।" एक पाठक ने चुटकी ली, "भाई, गिटार तो मिला, लेकिन उसके साथ कम से कम दर्जन भर तार भी मांग लेता!"
किसी ने लिखा, "मुझे तो लगता है, वो बेचारा अब पछता रहा है, और सही भी है – आखिर तुम्हारी जान जोखिम में डाल दी थी कभी!" वहीं, एक पाठक ने ये भी कहा, "अगर उसने माफ़ी माँग ली होती, तो शायद तुम पैसे दे भी देते!"
कई पाठकों ने अपने अनुभव भी साझा किए – किसी को स्कूल में सीढ़ियों से गिरा दिया गया, किसी को टीचरों ने नज़रअंदाज कर दिया। इन अनुभवों से साफ़ है कि स्कूल में बुलीइंग का दर्द गहरा होता है, लेकिन आखिर में वक्त और हिम्मत से इंसान आगे बढ़ ही जाता है।
आज के दौर में क्या बदल गया है?
आज के स्कूलों में ऐसी घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लिया जाता है, लेकिन सुधार की गुंजाइश अब भी है। हमारे समाज में भी कई बार लोग बच्चों की बातों को "बच्चों की लड़ाई" मानकर टाल देते हैं, जबकि असल में ये मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत गंभीर मुद्दा है। ज़रूरी है कि हम अपने बच्चों को सिखाएँ – "किसी को सताना या सहना, दोनों ही ठीक नहीं।"
राज की कहानी हमें यही सिखाती है – वक्त का पहिया घूमता है, और कभी-कभी हिसाब किताब ऐसे हो जाता है कि सामने वाला समझ भी नहीं पाता!
निष्कर्ष – क्या आपने भी किसी गुंडे को सबक सिखाया है?
राज की कहानी फिल्मी जरूर लगती है, लेकिन इसमें छुपा संदेश बिल्कुल सच्चा है। कभी-कभी जिंदगी खुद ही मौका देती है बदला लेने का, लेकिन असली जीत तब है जब आप मन से आगे बढ़ चुके हों।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा कुछ हुआ है? क्या आप भी कभी स्कूल या कॉलेज में किसी गुंडे को अपने अंदाज़ में सबक सिखा पाए? अपनी कहानी नीचे कमेंट में जरूर साझा करें – कौन जाने, अगली बार आपकी कहानी यहाँ छप जाए!
आखिर में, अगर किसी 'लियोन' ने आपके साथ भी कुछ ऐसा किया हो, तो याद रखें – वक्त सबसे बड़ा बदला खुद ही ले लेता है!
मूल रेडिट पोस्ट: Got revenge on a school bully