शॉर्ट्स जाएँ भाड़ में, हमारी आज़ादी कोई नहीं छीन सकता: ऑफिस ड्रेस कोड पर आईटी टीम का अनोखा विद्रोह
किसी भी दफ्तर में ड्रेस कोड की अपनी अलग ही राजनीति होती है। कभी-कभी छोटे-छोटे नियम इतने बड़े विवाद का कारण बन जाते हैं कि पूरी टीम एकजुट होकर अपने तरीके से विरोध करने लगती है। आज हम आपको एक ऐसी ही आईटी टीम की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसमें शॉर्ट्स पहनने पर रोक लगने के बाद कर्मचारियों ने ऐसी चाल चली कि बॉस भी हैरान रह गया।
जैसे हमारे दफ्तरों में कभी-कभी कोई नया मैनेजर आकर 'अत्यधिक पेशेवर' दिखने की जिद पकड़ लेता है, वैसे ही इस कहानी में एक नए सीआईओ (चीफ इनफॉर्मेशन ऑफिसर) ने ऑफिस का ड्रेस कोड पूरी तरह बदल दिया। अब शॉर्ट्स, फटी पैंट, ग्राफिक टी-शर्ट सब बैन! खासकर सुपरवाइजरों के लिए तो 'बिजनेस कैजुअल' अनिवार्य कर दिया गया।
जब गर्मी में पसीने छूटे, और नियम दिल दुखाए
आईटी टीम का काम सिर्फ कंप्यूटर चलाना नहीं, बल्कि केबल बिछाने से लेकर सर्वर रूम में रेंगने और पुराने बिल्डिंग्स की वायरिंग करने तक का था। गर्मियों में बिना एसी के इन खस्ताहाल कमरों में काम करना किसी तपस्या से कम नहीं। ऐसे में शॉर्ट्स पहनने की इजाज़त माँगी गई, लेकिन सीआईओ ने साफ़ मना कर दिया – “नियम सबके लिए एक समान!”
पर, यहीं पर ट्विस्ट आया। एक मीटिंग के बाद आईटी टीम ने देखा कि सीआईओ की सेक्रेटरी और बाकी महिला स्टाफ आराम से स्कर्ट्स या स्कॉर्ट्स (स्कर्ट-जैसी दिखने वाली पैंट्स) पहन रही थीं। जब टीम ने यह मुद्दा उठाया, तो अफसरशाही का जवाब आया – “यह तो अलग मामला है, समझिए!”
अब भला, हमारे यहाँ भी कभी-कभी ऐसे तर्क सुनने को मिलते हैं – “महिलाएँ पहन सकती हैं, पुरुष नहीं!” इस पर एक टिप्पणीकार ने खूब कहा, “सीआईओ को देखना चाहिए कहीं उनके हार्ड ड्राइव में भी ऐसे डबल स्टैंडर्ड न हों!” (इशारा मज़ाकिया था, लेकिन बात में दम था!)
किल्ट – आज़ादी की नई पहचान!
यहाँ से कहानी में असली मसाला आता है। टीम के एक सदस्य (जो कहानी सुना रहे हैं) को अपने पुराने ThinkGeek वर्कलिस्ट में Utilikilt (स्कॉटलैंड की पारंपरिक स्कर्ट जैसी ड्रेस) दिख गया। उन्होंने झट से ऑर्डर कर डाली! अपने करीबी पुरुष साथियों को भी बताया – और क्या था, अगले ही हफ्ते सब के सब ऑफिस पहुँच गए किल्ट पहनकर।
ऑफिस में पहले तो सब हँसे, लेकिन मैनेजर (जो खुद भी परेशान थे इन नियमों से) ने चुपचाप समर्थन दिया। उसी दिन सीआईओ का कंप्यूटर खराब हो गया, और किल्ट पहने कर्मचारी ने जाकर बड़े पेशेवर अंदाज़ में सिस्टम सुधार दिया। सीआईओ बस ताकते रह गए – क्या कहें, नियम तो टूटे नहीं, क्योंकि स्कर्ट्स जैसे कपड़ों पर तो रोक नहीं थी!
एक टिप्पणीकार ने बढ़िया तंज कसा – “आपने तो उनकी पॉलिसी को स्कर्ट कर दिया!” और दूसरे बोले, “उन्होंने तो बड़े प्यार से किल्ट से सबक सिखा दिया।”
ऑफिस राजनीति और ड्रेस कोड: जनता की जीत
अब सीआईओ खफा, लेकिन नियम तो नियम! मैनेजर ने बुलाकर हल्की फटकार लगाई, लेकिन कर्मचारी ने सीधा सवाल दागा – “अगर महिलाएँ स्कर्ट पहन सकती हैं, तो हम क्यों नहीं?” यहाँ एक पाठक ने लिखा, “अगर एचआर किल्ट पर रोक लगाते, तो तुरंत भेदभाव का केस बन जाता!” असल में, ऑफिस की बाकी टीमों में भी चर्चा छिड़ गई – कोई हँसा, किसी ने समर्थन किया, तो कुछ ने कहा – “ये तो सही किया, अब तो किल्ट ही पहनेंगे!”
जल्द ही, पूरी कंपनी में माहौल ऐसा बन गया कि सीआईओ को नीतियाँ बदलनी पड़ीं। अब सुपरवाइजर अगर चाहें तो ज़रूरत पड़ने पर शॉर्ट्स या आरामदायक कपड़े पहन सकते हैं। साथ ही, शुक्रवार को 'कैजुअल डे' घोषित कर दिया गया – भले ही शॉर्ट्स न हों, पर टी-शर्ट, जीन्स सब चलेगा।
एक पाठक ने मज़ेदार अनुभव साझा किया – “हमारे यहाँ भी गर्मियों में शॉर्ट्स पर रोक थी। मैंने नियमों में ‘समर मंथ’ का हवाला देकर सितंबर तक शॉर्ट्स पहन लिए!” और एक अन्य ने कहा, “अगर कपड़े गंदे होने हैं, तो यूनिफॉर्म दो या ढील दो – सेंस बना लो, बस!”
हमारी संस्कृति में ड्रेस कोड और विद्रोह
भारत में भी ऑफिस ड्रेस कोड पर ऐसे किस्से खूब सुनने को मिलते हैं। कभी-कभी बॉस का ‘प्रोफेशनल’ दिखने की जिद कर्मचारियों को परेशान कर देती है। पर जब टीम एकजुट होकर तर्क और हल्के-फुल्के विरोध से सामने आती है, तो बदलाव मुमकिन है।
सोचिए, हमारे किसी सरकारी दफ्तर में अगर बाबू लोग धोती-कुर्ता या लुंगी पहनकर पहुँच जाएँ, तो क्या बवाल मच जाए! पर असल मुद्दा यही है – काम की ज़रूरत के हिसाब से नियम बनें, न कि केवल दिखावे के लिए।
एक टिप्पणीकार ने खूब लिखा, “अगर आप मुझे पहनावे पर हुक्म देना चाहते हैं, तो यूनिफॉर्म दो। अगर काम गंदा है, तो कपड़े भी वैसे ही चाहिए!”
निष्कर्ष: आज़ादी की कीमत – एक किल्ट
तो दोस्तों, यह कहानी सिर्फ ड्रेस कोड की नहीं, बल्कि उस जज़्बे की है जो हर कर्मचारी में होता है – अपनी बात रखने और तर्क से जीतने का। कभी-कभी हल्के-फुल्के विरोध से भी बड़े बदलाव आ सकते हैं।
आपके ऑफिस में भी ऐसे अजीबोगरीब ड्रेस कोड या नियम हैं? क्या आपने कभी मिलकर उनका हल निकाला? अपनी मज़ेदार कहानियाँ हमारे साथ ज़रूर साझा करें – कौन जाने, अगली बार आपकी कहानी भी इस ब्लॉग पर छप जाए!
आखिर में, याद रखिए – “कपड़े तो ज़िंदगी का हिस्सा हैं, पर आज़ादी सबसे बड़ी चीज़ है!”
मूल रेडिट पोस्ट: They may take our shorts, but they'll never take our freedom!