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शुक्रवार को सब ठीक था: जब ऑफिस की प्लानिंग बनी सिरदर्द

ऑटोमोबाइल कंपनी में नेटवर्क समस्या का समाधान करते तकनीकी सहायता का एनीमे-शैली चित्रण।
इस जीवंत एनीमे दृश्य में, एक तकनीकी सहायता नायक व्यस्त ऑटोमोबाइल प्लांट में अप्रत्याशित नेटवर्क समस्याओं से जूझते हुए, हास्य और तात्कालिकता का समागम करता है, जहां तकनीक कभी मददगार तो कभी चुनौतीपूर्ण होती है।

ऑफिस में सोमवार की सुबह वैसे ही भारी लगती है, और अगर ऊपर से कोई "सब आपकी गलती है" बोल दे, तो मानो चाय का स्वाद भी फीका पड़ जाता है। सोचिए, आप आराम से अपनी चाय पी रहे हैं और तभी कॉल आता है—"सर, मशीन चालू ही नहीं हो रही, प्रोडक्शन रुक गया, सब आपके कारण!" अब क्या करें? चाय छोड़िए, निकल पड़िए मिशन पर!

जब कम्प्यूटर और डेस्क ही गायब हो जाए

कहानी एक बड़ी ऑटोमोटिव कंपनी के IT सपोर्ट इंजीनियर की है। कंपनी करोड़ों की है, लेकिन सेकंडरी प्लांट में बस 20 कम्प्यूटर और एक Novell सर्वर। सोमवार सुबह कॉल आया कि शॉप फ्लोर का कम्प्यूटर लॉगिन नहीं हो रहा, काम रुका पड़ा है। न कोई डिटेल, न कोई एरर, बस इतना कि "जल्दी आइए!"

चाय का घूंट खत्म किया, गाड़ी उठाई और आठ मील दूर सेकंडरी प्लांट पहुँचे। वहाँ पहुँचकर जो देखा, उस पर तो विश्वास ही नहीं हुआ—मशीन, डेस्क, कम्प्यूटर, सब गायब! पूरा वर्कसेल ही नदारद!

प्लांट मैनेजर को ढूंढा, पूछा—"भैया, क्या माजरा है?" बोले, "अरे, वीकेंड में सब शिफ्ट कर दिया।" फिर नए एरिया में लेकर गए, जहाँ सब सामान तारों के ढेर में ऐसे पड़ा था जैसे शादी के बाद कमरे में सामान बिखरा पड़ा हो। न बिजली, न नेटवर्क—बस तारों का महाजाल!

जब प्लानिंग, प्लानिंग ही न रहे

IT इंजीनियर ने साफ कहा—"जब बिजली और नेटवर्क लग जाए, मुझे बुला लेना।" जाते-जाते फोटो खींच लिए, ताकि बाद में कोई ऊँगली न उठा पाए। ऑफिस आकर डिवीजन मैनेजर को सारी कहानी सुनाई, तो बोले, "फिलहाल चुप रहो, बाद में देखेंगे।"

शुक्रवार को प्रोडक्शन स्टाफ मीटिंग बुलाई गई। वहाँ दूसरे प्लांट मैनेजर ने सबके सामने कह दिया—"इस एरिया का प्रोडक्शन रूका पड़ा है, क्योंकि IT ने कम्प्यूटर नहीं चलाया।" बस, अब तो IT इंजीनियर भी तैयार थे। लैपटॉप खोला, प्रोजेक्टर में वही फोटो दिखा दी, जिसमें प्लांट मैनेजर खुद अपने हाथ जेब में डाले, तारों के ढेर के सामने खड़े थे।

पूछा, "तो आपने बिजली-नेटवर्क का इंतज़ाम कर दिया?" जवाब—"वो... अब तक नहीं हुआ।" IT इंजीनियर बोले, "कोई बात नहीं, जब हो जाए तो बुला लेना।" डिवीजन मैनेजर मुस्कुराए, बोले—"धन्यवाद, और हाँ, आज की चाय-समोसे मेरी तरफ से!"

ऑफिस की प्लानिंग: जब ऊँट पहाड़ के नीचे आता है

इस किस्से पर Reddit के कई लोगों ने अपने-अपने अनुभव बांटे। एक यूज़र ने लिखा, "अगर आप दूसरों को बस के नीचे धकेलना चाहें, तो पहले ये देख लें कि ड्राइवर कौन है!" (अर्थात, दूसरे को दोष देने से पहले खुद की जिम्मेदारी देखनी चाहिए।)

दूसरे ने बताया—"हमारे ऑफिस में नया बिल्डिंग बना, लेकिन एक साइड में पावर पॉइंट ही नहीं थे। जब IT ने बोला कि एक्सटेंशन बोर्ड लगाना फायर कोड वॉयलेशन है, तभी सबकी नींद खुली और अगले हफ्ते बिजली का काम हुआ।"

एक और मजेदार कमेंट आया—"Surge Protector को खुद में ही प्लग कर रखा था! अब बताइए, ऐसे लोगों को कैसे समझाएँ?" हमारे यहाँ भी तो 'जुगाड़' का यही हाल है—कभी तार छत से निकालो, कभी दीवार में खुदाई कर दो, लेकिन असली सिस्टम सेटअप कभी नहीं।

आईटी की दुनिया: दोष हमेशा सपोर्ट पर क्यों?

भारत में भी ऑफिसों में यही हाल है—कोई भी तकनीकी गड़बड़ी हो, तुरंत IT को बुलाओ। चाहे केबल कट गया हो, बिजली गई हो, या कम्प्यूटर के नीचे से चूहा तार काट गया हो—"सब IT वाले की गलती है!"

जैसे एक कमेंट में कहा गया, "बिना प्लानिंग के अगर आप रेगिस्तान में पाइप गाड़ दें और शिकायत करें कि पानी क्यों नहीं आया, तो दोष किसका?" ऑफिसों में भी यही होता है—बिना नेटवर्क-बिजली देखे कम्प्यूटर शिफ्ट कर दो, फिर IT को दोष दो।

निष्कर्ष: काम में प्लानिंग जरूरी, दोष देने से पहले सोचें

तो भाइयों-बहनों, इस कहानी से सीख यही मिलती है—चाहे ऑफिस हो या घर, काम की प्लानिंग पहले करें, फिर IT को बुलाएँ। और जब गलती खुद की हो, तो दूसरों के सिर न मढ़ें, वरना कभी-कभी आपके खुद के फोटो प्रोजेक्टर पर आ सकते हैं!

आपके ऑफिस में भी ऐसे कोई मजेदार या 'जुगाड़ू' किस्से हुए हैं? कमेंट में जरूर साझा करें। और हाँ, अगली बार IT वाले को दोष देने से पहले थोड़ा सोच लें—कहीं वो भी अपने साथ सबूत न ले आए!


मूल रेडिट पोस्ट: But it was working on Friday