वो दिन जब हमारी कंपनी ने ऐसी टेप भेजने वाली थी, जो हर कंप्यूटर को कर देती 'ध्वस्त'!
दोस्तों, टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक छोटी सी गलती कब कहर मचा दे, कोई नहीं जानता। ऐसे ही एक किस्से ने मुझे चौंका दिया, जिसमें एक इंजीनियर की फुर्ती और ईमानदारी ने कंपनी की इज्जत भी बचाई और करोड़ों का नुकसान भी टल गया। सोचिए, अगर आपके ऑफिस में कोई ऐसी सीडी या टेप आ जाए, जो सिस्टम में डालते ही कंप्यूटर को “खटमल” बना दे — यानी चालू ही न हो! 80 के दशक की तकनीक में ऐसा हादसा हो जाता तो उस ज़माने की सरकारें भी हिल जातीं!
पुराने ज़माने की सॉफ़्टवेयर सप्लाई: जब टेप ही Internet था
आज हम सब कुछ ऑनलाइन डाउनलोड करते हैं, लेकिन 80 के दशक में सॉफ़्टवेयर की नई वर्शन बड़े-बड़े 9-ट्रैक टेप में आती थी — बिल्कुल वैसे जैसे पुराने जमाने के बॉलीवुड गानों की रीलें! उस दौर में एक EDA (Electronic Design Automation) कंपनी में वरिष्ठ टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर ने ये कहानी जी थी। उनका काम था ग्राहकों और कंपनी के फील्ड इंजीनियरों की समस्या हल करना।
एक दिन उनके मैनेजर ने, जो खुद एक बड़े रक्षा विभाग के ग्राहक को सॉफ़्टवेयर देने जा रहे थे, उनसे कहा — “भाई, ज़रा इस टेप को चेक कर लो, कहीं कोई गड़बड़ न हो।” अब टेप मिलना कोई आम बात नहीं थी, क्योंकि प्री-रिलीज़ टेप पर तो जैसे पहरे बैठते थे! ऑपरेशंस मैनेजर ने तो ऐसा बरताव किया जैसे कोई सरकारी दफ्तर में बिना चाय-पानी के फाइल आगे बढ़ा रहा हो। खैर, आखिरकार टेप मिली — और जैसे ही इंजीनियर ने उसे एक मशीन पर चलाया, कंप्यूटर ने ‘राम नाम सच है’ कर दिया!
जब एक छोटी भूल बन सकती थी राष्ट्रीय संकट
अब सोचिए, इतनी बड़ी डिफेंस कंपनी में ये टेप पहुँच जाती, और सब मशीनें एक साथ बंद हो जातीं! इंजीनियर ने दूसरा कंप्यूटर लिया, उस पर भी वही हाल — मशीन ठप! अब यहाँ पर कहा जाता है — “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।”
इंजीनियर के पास दो रास्ते थे: या तो चुपचाप टेस्टिंग टीम को कह दें कि “भैया, टेस्ट कर लो, शायद गड़बड़ है”, या फिर डंके की चोट पर बोले कि “आप लोगों ने बिना टेस्टिंग के ही हरी झंडी कैसे दे दी!” उन्होंने दूसरा रास्ता चुना — और थोड़े दुश्मन भी बना लिए।
इस पर Reddit पर एक यूज़र ने बड़ा मज़ेदार कमेंट किया — “अगर आप न जांचते, तो कोई और भी नहीं करता। ऊपर से इतने महत्वपूर्ण ग्राहक के सिस्टम धराशायी हो जाते, तो सबकी नौकरी खतरे में पड़ जाती!” अब बताइए, ऐसे मौके पर ‘राजनैतिक’ व्यवहार काम आता या ‘सच्चाई’?
टेक्नोलॉजी की दुनिया के पुराने किस्से: टेप, हार्ड डिस्क और जुगाड़
वो जमाना ही अलग था। एक और कमेंट में किसी ने बताया, “हमारे यहाँ कभी-कभी टाइम खरीदने के लिए खाली टेप भेज देते थे — एक हफ्ते बाद ग्राहक को बोले, ‘अरे गलती से खाली भेज दी, नई भेज रहे हैं!’” सोचिए, ये जुगाड़ आज के जमाने में चले तो सब कुछ वायरल हो जाए!
एक और पाठक ने बताया — “हमारे पास ऐसे हार्डड्राइव थे, जिनकी हेड अगर खराब हो जाए तो हर नई डिस्क खराब कर देती थी — जैसे कोई बिमारी फैलाने वाला वायरस!” इसको उन्होंने ‘हार्डवेयर वायरस’ का नाम दिया, जैसे गाँव में किसी बिमारी को ‘फैलती हवा’ कहते हैं।
और हाँ, एक पाठक ने तो मज़ाक में कहा — “लगता है यह कहानी तो पुराने हिन्दी फिल्मों के स्टूडियो वाली टेप से जुड़ी है!” असल में 9-ट्रैक टेप्स उस समय की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी थी, जैसी पुरानी सरकारी दफ्तरों में दिखती है।
ऑफिस का राजनीति और ‘मेमो’ संस्कृति
टेप कांड के अगले दिन, टेस्टिंग मैनेजर ने सबकी मेज पर एक ‘टॉप 10 कारण’ वाली चिट्ठी रख दी — “हमने कैसे गलती से अनटेस्टेड टेप भेजने की गलती कर दी!” पढ़कर लगा जैसे कोई सरकारी चिट्ठी हो, जिसमें लिखा हो, “कर्मचारियों की कमी, काम का बोझ, और छोटी सी चूक।”
ऑपरेशंस मैनेजर, जिसने टेप देने में नखरे किए थे, अब खुद सफाई देने आई — “अरे, मज़ाक कर रही थी!” अब यहाँ तो वही बात — “काम निकल जाने के बाद सब मीठा-मीठा बोलने लगते हैं!”
सीख और पाठ: ईमानदारी और चौकसी का कोई विकल्प नहीं
इस किस्से से हमें क्या सिखना चाहिए? तकनीक के इस दौर में, जब हर चीज़ एक बटन से बदल जाती है, एक छोटी सी लापरवाही भी बड़ा नुक़सान कर सकती है। चाहे ऑफिस हो या घर, कभी भी ‘चलो छोड़ो’ वाला रवैया मत अपनाइए। और जो लोग सच्चाई दिखाते हैं, भले ही लोग नाराज़ हो जाएँ, वही असली हीरो होते हैं।
कई पाठकों ने यही कहा — “अगर आप न होते, तो कंपनी की साख मिट्टी में मिल जाती!” और सच मानिए, ऐसे लोग हर ऑफिस में चाहिए, जो बिना डरे सच बोलें और सही कदम उठाएँ।
अंत में – आपके ऑफिस का ‘टेप’ कौन है?
क्या आपके ऑफिस में भी कोई ऐसा ‘टेप’ है, जिसे बिना जाँचे-परखे सब आगे बढ़ा देते हैं? या कोई ऐसा जाँबाज़, जो हर बार सच सामने लाकर कंपनी को बड़ी मुसीबत से बचा लेता है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए — क्या कभी आपके साथ भी ऐसा कोई वाकया हुआ है?
आखिर में, टेक्नोलॉजी का असली मज़ा तो इन पुराने किस्सों और उनसे मिली सीख में ही है। पढ़ते रहिए, सीखते रहिए, और अपने ऑफिस के किस्सों को भी हमारे साथ बाँटिए!
मूल रेडिट पोस्ट: The time we almost shipped tapes that would brick any machine it was installed on,