वैलेंटाइन डे पर होटल में बवाल: न म्यूजिक चैनल, न झाग वाला बाथ, और ग्राहक का गुस्सा सातवें आसमान पर
होटल की रिसेप्शन डेस्क पर काम करना वैसे ही आसान नहीं है। ऊपर से अगर कोई ‘खास’ ग्राहक आ जाए, तो समझ लीजिए दिवाली से भी बड़ा धमाका तय है। ये कहानी है एक ऐसे ही ग्राहक की, जिसका वैलेंटाइन डे शायद इतिहास में सबसे खराब रहा – और होटल वालों के लिए तो ये दिन किसी ‘हॉरर शो’ से कम नहीं था।
जब ग्राहक की उम्मीदें आसमान छूने लगीं
अब ज़रा सोचिए, एक होटल जिसमें किंग साइज बेड और जैकुज़ी वाला कमरा सिर्फ ₹12,000 (150 डॉलर) में मिल रहा हो, वहां कोई ग्राहक सिर्फ टीवी चैनलों और बाथ के झाग को लेकर बवाल मचाए, तो आपको हंसी नहीं आएगी? यही हुआ एक छोटे से कस्बे के होटल में।
ग्राहक साहब बिना क्रेडिट कार्ड के आए, रिसेप्शन पर ही गुस्से का गुबार निकालते हुए बोले –
“ये टीवी क्या है? बस 20 चैनल! म्यूजिक चैनल भी नहीं! मैंने ₹12,000 खर्च किए और ये मिला?”
रिसेप्शनिस्ट ने बड़े ही शांत स्वर में जवाब दिया, “माफ़ कीजिए, अभी केबल वाला नहीं बदल सकते।”
ग्राहक बोले – “और बाथ में झाग नहीं है? जैकुज़ी तो है, लेकिन झाग वाला बाथ कहां है?”
अब भला, झाग वाला बाथ होटल वाले कहां से लाएं!
होटल का सच – जितना पैसा, उतनी सेवा!
यहां एक कमेंट करने वाले ने बिल्कुल सही कहा, “सस्ता होटल, महंगी उम्मीदें।” हमारे यहां भी यही हाल है – जितना कम रेट, उतनी ज्यादा फरमाइशें। कई बार तो ग्राहक सोचते हैं कि ₹1000 का कमरा लेकर होटल ताज जैसी सर्विस मिलेगी। होटल वाले बेचारे सोचते रह जाते हैं – “भाई, हमने तो चाय भी फ्री नहीं बोला था!”
एक और मज़ेदार कमेंट था, “ये लोकल लोग आते हैं और उम्मीद करते हैं कि सब फ्री मिल जाएगा। फिर जब बोलो कि पेमेंट करनी होगी, तो गुस्से में आग-बबूला हो जाते हैं। और हां, जाते-जाते होटल की ऑनलाइन रेटिंग भी गिरा जाते हैं।”
यानी, लोकल लोग मतलब ‘लफड़े की गारंटी’!
झाग वाला बाथ: असली कहानी
अब बात करते हैं उस झाग वाले बाथ की। एक यूज़र ने कमाल का कमेंट किया – “भाई, झाग तो शैम्पू या बॉडी वॉश से भी बन जाता है। लेकिन होटल वाले क्या हर कमरे में झाग की बोतल रखें?”
दरअसल, जैकुज़ी में अगर ज्यादा झाग डाल दें, तो पूरा बाथरूम झाग से भर जाएगा। जैसे हमारे यहां कोई डिशवॉशर में साबुन डाल दे, और किचन में झाग ही झाग हो जाए!
एक और ने लिखा, “अरे, म्यूजिक सुनना है तो फोन में गाना चला लो, आजकल तो हर किसी के पास स्मार्टफोन है। होटल टीवी से क्या उम्मीद?”
होटल कर्मचारी की शांति और ग्राहक की ‘वैलेंटाइन ट्रेजडी’
सबसे दिलचस्प बात ये रही कि रिसेप्शनिस्ट ने पूरे समय शांति बनाए रखी। ग्राहक बार-बार ₹4000 (50 डॉलर) का डिस्काउंट मांगता रहा, गाली-गलौज करता रहा, लेकिन जवाब हमेशा – “माफ़ कीजिए, मैं नहीं कर सकता। मैनेजर ही कर सकते हैं।”
यहां तक कि ग्राहक ने धमकी दी, “अगर मैं कमरे में सिगरेट पी लूं तो?”
रिसेप्शनिस्ट ने सीधा जवाब दिया, “पूरा डिपॉजिट जब्त हो जाएगा।”
आखिर में गुस्से से भरा ग्राहक बोला – “तुम लोगों ने मेरा वैलेंटाइन डे बर्बाद कर दिया!” और चला गया।
सबक: होटल में रहना है तो उम्मीदें जमीन पर रखें!
इस किस्से से हमें यही सीख मिलती है – होटल कोई मायावी जगह नहीं, जहां हर ख्वाहिश पूरी हो जाए। म्यूजिक चाहिए? फोन पर चला लो! झाग चाहिए? खुद इंतजाम कर लो! और हां, लोकल हो या टूरिस्ट, नियम सबके लिए एक जैसे हैं।
जैसा एक कमेंट में कहा गया, “अगर आपको कुछ खास चाहिए, तो पहले ही होटल से पूछ लो। बाद में बवाल करने का क्या फायदा?”
निष्कर्ष: होटल वाला भी इंसान है!
दोस्तों, अगली बार जब आप होटल जाएं, तो ये मत सोचिए कि कर्मचारी आपकी हर फरमाइश पर तुरंत हाजिर होंगे। उनकी भी सीमाएं हैं, और होटल की भी।
अब आप बताइए – क्या कभी आपके साथ भी ऐसी कोई मजेदार या अजीब घटना होटल में हुई है? कमेंट में जरूर साझा करें।
और याद रखिए – 'जितना गुड़ डालोगे, उतना ही मीठा मिलेगा'!
मूल रेडिट पोस्ट: No music channels, no foaming bath and ruined Valentine's Day