वैनलेंटाइन डे या वैनलेंटाइन डे? जब एक अंग्रेज़ी की गलती ने होटल का रोमांस बिगाड़ दिया
क्या कभी आपने नोटिस किया है कि हम कई बार शब्दों में छोटी गलतियाँ भी नहीं पकड़ पाते? सोचिए, अगर वेलेंटाइन डे जैसे रोमांटिक मौके पर ही सब जगह उसका नाम ही गलत लिखा हो तो? आज की कहानी है 90 के दशक के एक थीम्ड होटल की, जहाँ ‘Valentine’s Day’ की जगह गलती से ‘Vanlentine’s Day’ छप गया और किसी को पता ही नहीं चला!
इस होटल की थीम और उसके पीछे की दुनिया भी बड़ी दिलचस्प थी—सड़क के ट्रक रूम से लेकर रोम के राजसी बिस्तरों तक, हर कमरा अपने आप में एक फिल्मी सेट जैसा था। लेकिन जब वेलेंटाइन डे की तैयारियों में एक छोटी सी अंग्रेज़ी की गलती सामने आई, तो पूरी टीम के होश उड़ गए।
पांच सितारा होटल, छोटी सी चूक
इस होटल का नाम और लोकेशन तो पोस्ट में नहीं बताया गया, लेकिन अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ये दुनिया के सबसे बड़े शॉपिंग मॉल के साथ जुड़ा हुआ था। होटल के थीम्ड कमरे इतने खास थे कि लोग खास तौर पर छुट्टियों या त्योहारों पर यहां आने का प्लान बनाते थे। ट्रक रूम में 57 मॉडल की शेवी गाड़ी के पीछे बिस्तर, ट्रैफिक लाइट्स, साइन बोर्ड—जैसे बच्चों का सपना हो! वहीं रोम रूम में गोल बिस्तर, मूर्तियां और रोमांचक सजावट।
हर साल वेलेंटाइन डे पर होटल वाले दिल खोलकर प्रचार करते। इस बार भी रोमांटिक डिनर, ब्रेकफास्ट इन बेड, फूलों की पंखुड़ियां—सबका वादा था। पर होटल के मालिक इतने कंजूस थे कि प्रचार के लिए किसी सस्ते और नए प्रिंटिंग वाले को जिम्मेदारी दे दी। जब बैनर, पोस्टर, फ्लायर्स के डिब्बे आए तो पूरे होटल में ‘Vanlentine’s Day’ का बोलबाला हो गया!
जब दिमाग ने खेला खेल
शायद आपने भी महसूस किया होगा कि हम किसी बोर्ड या पोस्टर पर लिखे शब्दों को सचमुच पढ़ते नहीं, बस पहचान लेते हैं। यही वजह थी कि होटल के स्टाफ को भी कई दिन तक ये गलती दिखी ही नहीं! एक कमेंट में एक पाठक ने लिखा, “हमारे दिमाग ने जो उम्मीद की थी, वही शब्द जोड़ लिए। इसी कारण हम खुद की लिखी चीज़ों को प्रूफरीड करने में गलती कर जाते हैं।”
होटल के शिफ्ट इंचार्ज ने जब पोस्टर को गौर से देखा, तब जाकर ये गलती पकड़ी। उन्होंने तुरंत मैनेजमेंट को बताया, पर मालिकों ने कहा—“चलने दो, नया छपवाना बहुत महंगा पड़ेगा।”
छोटे शहरों में भी हमने देखा है—कभी-कभी दुकानदार, पानवाले या टेलर के बोर्ड पर वर्तनी की मज़ेदार गलतियाँ लिखी होती हैं, जैसे “फ्रेश जूस” की जगह “फरेस जूस” या “फोटो कापी” की जगह “फोटो कॉफी”! लोग मुस्कुरा कर आगे बढ़ जाते हैं, पर होटल के स्तर पर ऐसी गलती देखकर कोई भी चौंक जाए।
होटल के कर्मचारी और मेहमानों की प्रतिक्रियाएँ
हैरानी की बात ये रही कि इतनी बड़ी गलती के बावजूद बहुत कम लोगों ने शिकायत की। ओपी (यानी कहानी के लेखक) के मुताबिक पूरे सीजन में सिर्फ 5-6 लोगों ने ही नोटिस किया कि ‘वेलेंटाइन’ गलत लिखा है। होटल management ने भी सोचा, “चलो, सबका दिमाग तो वैसे भी काम चला लेता है!”
एक और पाठक ने मज़ेदार किस्सा शेयर किया—“हमारे ऑफिस के लिए प्रिंटिंग कंपनी ने ‘Plumbing’ की जगह ‘Plumbling’ छाप दिया था, और हमने वो शर्ट्स बड़े शौक से पहनीं!” इससे साफ है कि ऐसी गलतियाँ सिर्फ होटल या बड़े ब्रांड में ही नहीं, हर जगह हो सकती हैं।
प्रिंटिंग इंडस्ट्री से जुड़े एक कमेंट ने भी बताया कि ग्राहक कई बार प्रूफ पढ़ने का वक्त नहीं निकालते, और गलती पर ध्यान ही नहीं देते। बाद में छप जाने के बाद सुधारना मुश्किल ही नहीं, महंगा भी पड़ता है।
हिंदी समाज में वर्तनी की गलती—मजाक या मजबूरी?
हमारे देश में भी कई बार दुकानों, मिठाई की डिब्बियों या शादी के कार्ड में वर्तनी की ऐसी गलतियाँ दिख जाती हैं। “शादी का निमंत्रण” पर ‘निमंत्रन’ लिखा देखिए या ‘शुभ विवाह’ की जगह ‘सुभ विवाह’—कई बार तो लोग हंसते हैं, तो कभी-कभी यही यादों का हिस्सा बन जाती हैं।
इस होटल की कहानी से एक बात तो साफ है—हमारे दिमाग की आदतें बहुत दिलचस्प हैं। जब अपेक्षा होती है कि वेलेंटाइन लिखा होगा, तो ‘वैनलेंटाइन’ भी हमें सही ही लगता है। यही वजह थी कि होटल के मालिकों ने अगले साल भी वही पोस्टर फिर से इस्तेमाल कर लिए!
क्या आपने भी देखी है ऐसी गलती?
यह कहानी ना सिर्फ एक मजेदार होटल किस्से की तरह है, बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि कभी-कभी छोटी सी चूक भी बड़ी मजाकिया याद बन जाती है। अगली बार जब आप किसी बोर्ड या पोस्टर पर कुछ अजीब लिखा देखें, तो मुस्कुरा कर याद करें—शायद किसी होटल में अब भी ‘Vanlentine’s Day’ मनाया जा रहा हो!
क्या आपके साथ भी कभी ऐसी कोई मजेदार वर्तनी की गलती हुई है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं, या अपने दोस्तों को टैग करें जिनके नाम के स्पेलिंग अक्सर गलत लिखे जाते हैं!
मूल रेडिट पोस्ट: Happy Vanlentines Day everybody!