मेहमान ने कहा – “आपकी गलती है कि मैंने अलार्म नहीं लगाया!” होटल रिसेप्शन की अनोखी कहानी
होटल में काम करना कभी-कभी वैसा ही होता है जैसे बड़े-बड़े लोगों के नखरे उठाना – और वो भी तब, जब गलती खुद उन्हीं की हो! सोचिए, अगर किसी दिन आप सुबह की ट्रेन या बस मिस कर जाएँ और घर के लोगों को ही डाँटने लगें कि “मुझे जगाया क्यों नहीं?” कुछ ऐसा ही हुआ था एक होटल के रिसेप्शनिस्ट के साथ, जिसकी कहानी आज हम आपके लिए लेकर आए हैं।
जब मेहमान खुद सो रहे थे, रिसेप्शनिस्ट बेचारा क्यों जागता?
कहानी शुरू होती है एक होटल के नाइट ऑडिट शिफ्ट से, जहाँ रिसेप्शनिस्ट (चलो उसे अमित मान लेते हैं) अपने काम में व्यस्त था। होटल में हर आधे घंटे पर शटल (छोटी वैन) जाती है, जो मेहमानों को एयरपोर्ट छोड़ती है। नियम बड़ा साफ़ है – शटल टाइम पर जाती है, एक मिनट भी नहीं रुकती। अब एक परिवार, जो अपने-आप को 'शाइनी एलीट मेंबर' (यानि VIP) मानता था, शटल का समय मिस कर देता है। जैसे ही वो पाँच-सात मिनट लेट होकर नीचे आते हैं, तुरंत शिकायत शुरू – “हम अपने शटल के लिए आए हैं!”
अमित घबरा जाता है, क्योंकि शटल तो जा चुकी थी। वह politely जवाब देता है – “माफ़ कीजिए, आपकी शटल समय पर निकल गई है। अगली शटल 30 मिनट बाद है, उसमें आपका नाम लिख दूँ?” लेकिन साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर – “अभी ड्राइवर को फोन करो, शटल वापस बुलाओ! पाँच मिनट में आ जाएगी, ये सब बर्दाश्त नहीं होगा!”
“मुझे जगाने की ज़िम्मेदारी तुम्हारी है!” – हद है भाई!
अब बात यहीं नहीं रुकी। साहब रिसेप्शनिस्ट पर झपट पड़े – “हमारा होस्ट तुम हो, उठाने की ज़िम्मेदारी तुम्हारी थी! नाइट ऑडिट कर रहे हो तो यह तुम्हारी ड्यूटी है!” अमित फिर भी शांत, पूछता है – “क्या आपने वाकई वीक-अप कॉल की रिक्वेस्ट की थी?” मेहमान बोले – “नहीं, पर हमने शटल के लिए नाम लिखा था, तो हमें जगाना तो था!”
यह सुनकर तो अमित के पास शब्द ही नहीं बचे – मुस्कुराते हुए बस सॉरी बोलता रहा। मेहमान बोले – “हमारे पास बहुत सामान है, तुम्हारी वजह से हमें अब 30 डॉलर का टैक्सी लेना पड़ेगा, लेकिन हम पैसे नहीं देंगे!” अमित XL टैक्सी बुक करने का ऑप्शन देता है, मगर तब तक साहब गुस्से में चाबी पटकते हुए चेक-आउट की मांग करते हैं। जाते-जाते, रिसेप्शनिस्ट से कहते हैं – “तुम्हें बिल्कुल दुख नहीं है, मैं देख रहा हूँ!”
“बड़े लोग, बड़ी बातें – पर अलार्म लगाना भूल गए!”
इस किस्से पर Reddit पर मज़ेदार कमेंट्स आए। एक ने लिखा, “भाई, इंसान बड़ा हो गया, परिवार भी है, पर अलार्म लगाना अब भी नहीं आता। बीवी का, बच्चों का, किसी का तो अलार्म बजा लेते!” दूसरे ने तंज कसा – “हर किसी के पास मोबाइल होता है, उसमें अलार्म फ्री में आता है, फिर भी रिसेप्शनिस्ट को दोष?”
किसी ने कहा – “अगर रिसेप्शनिस्ट ने गलती से उनके रूम में कॉल कर दिया होता, और उन्हें ज़रूरत नहीं थी, तो यही लोग शिकायत कर देते – हमें क्यों डिस्टर्ब किया!” एक अनुभवी होटल स्टाफ ने सलाह दी – “माफ़ी मांगने से बेहतर है कि सहानुभूति दिखाओ – ‘आपका दिन खराब हो गया, समझ सकता हूँ, चलिए आगे क्या किया जा सकता है?’ सीधी माफ़ी से लोग और चिढ़ जाते हैं, समाधान बताओ तो बात बनती है।”
एक और कमेंट में मज़ेदार बात थी – “हमारे यहाँ तो मेहमान को बस ये बता दो – भाई, अगर जगना है तो खुद अलार्म लगाओ, वरना भगवान के भरोसे रहो!”
हमारी संस्कृति में भी ‘समय की पाबंदी’ का है बड़ा महत्व
अगर भारतीय संदर्भ में देखें, तो यहाँ भी बड़ी-बड़ी शादियों, ट्रेन या बस पकड़ने जैसे मौकों पर अक्सर लोग लेट हो जाते हैं। लेकिन क्या हम स्टेशन मास्टर या ड्राइवर को दोष देते हैं? नहीं! यहाँ तो लोग खुद कहते हैं – “भई, हमारी गलती है, आगे से ध्यान रखेंगे।”
पर आजकल ‘कस्टमर इज़ किंग’ का नारा इतना ज़्यादा हो गया है कि कुछ लोग अपनी लापरवाही का भी ठीकरा दूसरों पर फोड़ने लगे हैं। होटल वाले बेचारे तो वैसे भी मेहमानों की सेवा में लगे रहते हैं – लेकिन हर चीज़ की हद होती है। अगर आप VIP हैं भी, तो भी नियम सबके लिए बराबर हैं।
“मुस्कान रखो, लेकिन सम्मान भी माँगो!”
इस घटना में सबसे अच्छी सीख ये है – मुस्कुराकर पेश आओ, लेकिन अपनी गरिमा बनाए रखो। रिसेप्शनिस्ट ने जैसे शांत रहकर सब संभाला, वैसे ही हमें भी अपनी ज़िम्मेदारियों की सीमा समझनी चाहिए। किसी की ग़लती पर बार-बार “सॉरी” बोलना ज़रूरी नहीं। समाधान बताओ, सहानुभूति दिखाओ, लेकिन झूठा दोष अपने सिर मत लो।
और हाँ, अगली बार कहीं भी समय पर पहुँचना हो – चाहे ऑफिस हो, इंटरव्यू हो, या होटल की शटल – तो अपने मोबाइल में अलार्म लगा लो! वरना "रिसेप्शनिस्ट ने नहीं उठाया" कहने से बेहतर है कि खुद समय से उठ जाओ।
निष्कर्ष – आप क्या सोचते हैं?
दोस्तों, क्या आपके साथ भी कभी ऐसा वाकया हुआ है? क्या आपने कभी किसी और की गलती खुद पर ले ली? या कभी ग्राहक बनकर सीमा लाँघ दी? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए – और हाँ, अगली बार रिसेप्शनिस्ट से सच्चे दिल से मुस्कुरा कर ही मिलिएगा, वो भी इंसान है!
मूल रेडिट पोस्ट: Guest says I need to take responsibility for not waking them up