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मेरी मां का चिल्लर वाला बदला – पड़ोसी को सबक सिखाने की अनोखी कहानी

एक माँ का फोन पर खाना पकाने के गैस सिलेंडर का ऑर्डर करते हुए भावुक दृश्य, एक आरामदायक अपार्टमेंट में।
2005 का एक क्षण, जहां मेरी माँ का गैस सिलेंडर के लिए किया गया संसाधनपूर्ण फोन कॉल उनकी यादगार और कभी-कभी नटखट जादू को दर्शाता है। यह यादें परिवार के जीवन की छोटी-छोटी बातों को बहुत खास बनाती हैं।

हमारे समाज में छोटी-छोटी बातों को दिल से लगाने और फिर उसी अंदाज में जवाब देने की परंपरा पुरानी है। कभी-कभी ये जवाब इतने मजेदार और चुटीले होते हैं कि बरसों बाद भी उनकी चर्चा होती रहती है। आज हम एक ऐसी ही सच्ची घटना की बात कर रहे हैं, जिसमें एक मां ने अपने पड़ोसी को 'चिल्लर' में ऐसा सबक सिखाया कि उसका चेहरा देखने लायक हो गया।

जब जरूरत थी मदद की, पड़ोसी ने दिखा दी असली औकात

साल था 2005। स्कूल के दिनों की यादें वैसे भी हमेशा खास होती हैं, लेकिन उस दिन की बात तो कुछ अलग ही थी। घर में खाना बनाने वाला गैस का सिलेंडर खत्म हो गया था। मां ने तुरंत नया सिलेंडर मंगवाया, लेकिन डिलीवरी वाले भाई साहब अगले ही दिन सिलेंडर लेकर आ गए। उस समय की बात है, जब गैस की डिलीवरी के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ता था। मां के पास पूरे पैसे नहीं थे, सिर्फ 23 रुपये कम पड़ गए।

अब सोचिए, 23 रुपये के लिए किस-किस से मांगें? मां ने पड़ोसी से मदद मांगी, और वादा किया कि दो दिन में पैसे लौटा देंगी। पड़ोसी ने भी बड़े शान से पैसे दे दिए, पर अगले ही दिन जैसे ही मां बाहर निकलीं, पड़ोसी ने टोक दिया – “पैसे कब लौटाओगी?” मां ने कहा, “आज शाम तक दे दूंगी।” लेकिन भैया, उस पड़ोसी ने तो जैसे जिद पकड़ ली – “नहीं, अभी दो!”

मां का जवाब – चिल्लर में बदला, मुंह बन गया बेमिसाल

अब यहां से शुरू हुआ असली खेल! मां घर गईं और 23 रुपये की गिनती शुरू हो गई – 25 पैसे, 50 पैसे, 1-2 रुपये के सिक्के... जितनी चिल्लर थी, सब जमा कर दी। पड़ोसी को लाकर जब ये चिल्लर थमाई, तो उसका चेहरा देखने लायक था!

सोचिए, 25 पैसे और 50 पैसे के सिक्के तब आम थे, और हर कोई जानता है कि इन्हें गिनना और संभालना कितना झंझट भरा काम है। मां ने मुस्कुराकर पैसे थमाए, और पड़ोसी बेचारा उसे गिनता रह गया।

एक Reddit यूज़र ने बिल्कुल सही लिखा – “छोटा बदला, लेकिन असरदार!” (Petty revenge is the best sort. You're not really harming someone but you are pissing them off.) सच में, इसमें किसी का नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन सामने वाले का मूड जरूर खराब हो गया।

लोगों की प्रतिक्रिया – “मां तो लीजेंड निकलीं!”

इस कहानी ने इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोरीं। एक दूसरे यूज़र ने कमाल का कमेंट किया, “इतने सारे सिक्के गिनना! क्या मजेदार सीन रहा होगा!” सच कहूं तो, हमारे यहां चिल्लर में पैसे लौटाने का मतलब होता है – सामने वाले को घुमा-फिरा कर जवाब दे देना, और वो भी बिना कोई बड़ा झगड़ा किए।

एक और कमेंट में किसी ने लिखा, “आपकी मां तो लीजेंड हैं! सिक्कों में पैसे लौटाने का बदला हमेशा क्लासिक रहता है।” (lol, your mom's a legend! 😂 Payback in coins is just classic petty revenge.)

एक और यूज़र ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, “वो समय ही कुछ और था, जब 25 पैसे और 50 पैसे के सिक्कों की कीमत थी।” और ये बात बिल्कुल सही है। आज तो ये सिक्के चलन से बाहर हो चुके हैं, लेकिन तब इनका अपना ही रुतबा था।

छोटे-छोटे बदले, जिंदगी का असली मजा

हमारे समाज में कई बार बड़े-बड़े झगड़ों की बजाय ऐसी छोटी-छोटी छींटाकशी और बदले, रिश्तों में मिठास और मसाला ला देते हैं। 23 रुपये के लिए जिद करना शायद कुछ लोगों को छोटी बात लगे, लेकिन मां ने जिस तरह से अपने अंदाज में जवाब दिया, वो काबिल-ए-तारीफ है।

एक कमेंट में तो किसी ने मजाक में लिखा – “तुम्हें अभी चाहिए था, तो लो अभी! अब गिनते रहो!” (You want now - you got now.)

शायद यही छोटी-छोटी बातें हमारे परिवारों और मोहल्लों की असली खूबसूरती हैं। न कोई बड़ा नुकसान, न कोई बुरा लगना – बस जिंदगी के तड़के जैसा छोटा-सा बदला!

निष्कर्ष – आपको भी याद आई कोई ऐसी कहानी?

कहानी सुनकर आपके चेहरे पर भी मुस्कान जरूर आई होगी। क्या आपके साथ भी कभी किसी ने ऐसा मजेदार छोटा सा बदला लिया है? या आपने किसी को चिल्लर में पैसे लौटाकर चौंका दिया हो? कमेंट में जरूर बताइएगा!

हमारे समाज में ऐसी कहानियां हर गली-मोहल्ले में मिल जाएंगी। आज के दौर में तो डिजिटल पेमेंट का जमाना है, लेकिन चिल्लर में बदला देने का मजा ही कुछ और था।

तो अगली बार जब कोई पड़ोसी या दोस्त छोटी-सी बात पर जिद करे, तो मां की तरह थोड़ा सा 'चिल्लरपन' दिखाने में क्या हर्ज है?

अपनी मजेदार कहानियां हमारे साथ साझा करें, और ऐसी ही देसी किस्सों के लिए जुड़े रहिए!


मूल रेडिट पोस्ट: My mom’s petty sometimes and I’m here for it