मेरी माँ ‘केविना’ – जुगाड़ की रानी या मुसीबत की जड़?
अगर आपको लगता है कि आपकी माँ अजीबोगरीब काम करती हैं, तो ज़रा मेरी माँ ‘केविना’ की कारनामे सुनिए – आप भी माथा पकड़ लेंगे! कभी लकड़ी की भट्टी में गोलियाँ डालना, कभी सिंक में उबला पास्ता बहा देना, कभी पारिवारिक यात्रा पर मादक पदार्थ लाना – और इस सब पर उनका जवाब: “तो क्या हुआ, सब सही है!”
ऐसी माएँ सिर्फ फिल्मों में नहीं, असल ज़िंदगी में भी मिलती हैं। तो चलिए, आज आपको अपनी ‘केविना’ माँ की कुछ सबसे मज़ेदार और हैरान कर देने वाली हरकतें सुनाता हूँ, जिन पर पूरा इंटरनेट भी हैरान रह गया।
केविना की जुगाड़ू सोच: गोलियाँ भट्टी में!
अब ज़रा सोचिए, सर्दियों में गाँव के घर में लकड़ी की भट्टी (wood stove) जल रही हो और आपकी माँ उसमें गोलियाँ डाल दे! पूछने पर जवाब – “मुझे क्या पता, बस ऐसे ही!”
भई, यहाँ भारत में तो दादी-नानी लकड़ी की भट्टी में आलू-शकरकंदी सेंकती हैं, लेकिन गोलियों का क्या काम? Reddit पर लोग भी दंग रह गए। एक यूज़र ने मज़ाक में कहा, “ऐसे कारनामे सुनते रहिए!” सच में, अगर हमारी माँ ऐसा करतीं तो मोहल्ले में खबर फैल जाती, “अरे, शर्मा जी की बहू ने क्या कर दिया!”
सिंक में पास्ता – ‘घुल जाएगा पानी में!’
हमारे यहाँ जब बर्तन धोते हैं, तो माँ हमेशा कहती हैं – “बचे हुए खाने को कूड़ेदान में डालो, नाली जाम हो जाएगी!” लेकिन मेरी माँ को तो विज्ञान ने ही धोखा दे दिया। उबला पास्ता सीधा सिंक में डाल दिया – पूछो तो कहती हैं, “पास्ता तो पानी में घुल जाता है!”
रेडिट पर एक कमेंट पढ़कर हँसी छूट गई, “पास्ता पानी में फूलता है, घुलता नहीं!” एक और यूज़र ने सलाह दी, “पास्ता, चावल, छिलके – कुछ भी सिंक में मत डालो, वरना नाली का भगवान ही मालिक है!”
भारत में जहाँ नालियों की हालत खुद ही खराब रहती है, वहाँ अगर कोई ऐसी गलती कर दे तो पक्का घर में किचन की छुट्टी हो जाए!
विदेश यात्रा और मस्तिष्क की छुट्टी
अब बात करते हैं सबसे बड़ा धमाका – 90 के दशक में माँ ने परिवार के साथ अमेरिका यात्रा पर गांजा (weed) ले जाने की सोची! आप सोच रहे होंगे, “कोई माँ ऐसा क्यों करेगी?”
माँ का जवाब – “बस ऐसे ही, क्या फर्क पड़ता है!”
रेडिट पर लोगों ने अपने अनुभव बाँटे – “पहले के जमाने में बॉर्डर पर जाँच ढीली थी, लेकिन आज के वक्त में तो बचना मुश्किल है!”
एक यूज़र ने लिखा, “माँ तो बच गई, वरना बच्चों के सामने जेल हो जाती तो सारा सफर यादगार बन जाता!”
यहाँ भारत में भी, अगर कोई परिवारवाला ऐसी हरकत करे तो समाज में सालों तक बातें चलती रहेंगी – “फला की बहू तो गजब है!”
बैंक, लोन और जुगाड़ की सलाह
अब ज़रा आधुनिक जुगाड़ सुनिए – एक दिन मैंने माँ के लिए लोन पर साइन कर दिया। हफ्तों बाद पता चला, पैसों की कटौती मेरे खाते से हो रही है क्योंकि माँ ने किश्तें दी ही नहीं!
माँ की सलाह – “सारा पैसा निकाल लो, बैंक वाले कुछ ले ही नहीं पाएँगे!”
रेडिट पर एक कमेंट था: “भैया, माँ के लिए लोन पर साइन करना भी खुद ‘केविन’ वाला काम था!” और सच कहूँ तो, मेरे मन में भी यही था – “घरवाले हैं, मदद तो करनी पड़ेगी।”
यहाँ भी कई लोग अपने माता-पिता के लिए गारंटर बनते हैं, लेकिन जब चूना लगता है तो समझ आता है – “माँ-बाप का दिल रखते-रखते खुद फँस गए!”
‘केविना’ – मासूमियत या बचपना?
रेडिट पर एक यूज़र ने लिखा, “तुम्हारी माँ तो बच्चे जैसी हैं – हर बार देखती हैं, कहाँ तक बात बढ़ सकती है!”
वाकई, माँ की हरकतों में कभी-कभी मासूमियत झलकती है, तो कभी-कभी जिम्मेदारी की कमी।
हमारे यहाँ तो ऐसी माएँ मोहल्ले में हमेशा चर्चा का विषय होती हैं – “अरे, फलां की माँ ने फिर से कोई नई मुसीबत खड़ी कर दी!”
कोई कहता है – “बच्चों जैसी हैं,” कोई कहता है – “बिल्कुल बिगड़ैल!” लेकिन सच्चाई यही है, कुछ लोग उम्र भर नहीं बदलते।
पाठकों से सवाल – क्या आपके घर में भी कोई ‘केविना’ है?
तो दोस्तों, ये थे मेरी माँ ‘केविना’ के कुछ कारनामे। कभी-कभी गुस्सा आता है, कभी हँसी, लेकिन आखिरकार माँ तो माँ होती हैं – चाहे जैसी भी हों!
आपके घर में भी कोई ऐसा है जो ‘केविना’ की टक्कर दे सकता है? या आपने भी ऐसी कोई अतरंगी हरकत देखी है?
अपने अनुभव कमेंट में जरूर लिखिए, और पोस्ट को शेयर करना मत भूलिए – क्या पता आपके दोस्त के घर में भी एक छुपी हुई ‘केविना’ रहती हो!
आखिर, ऐसी कहानियाँ ही तो हमारी जिंदगी को मज़ेदार बनाती हैं!
मूल रेडिट पोस्ट: My mother is a Kevina