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मेरा दोस्त ‘केविन’ – मासूमियत की मिसाल या कॉमन सेंस का संकट?

एक युवा पुरुष, जो हल्के ऑटिज्म से ग्रसित है, मुस्कुराते हुए और विचार में डूबा हुआ, दोस्ती और देखभाल का प्रतीक।
इस फोटो यथार्थवादी छवि में, हम केविन को देखते हैं, एक दयालु युवा जो गर्म मुस्कान के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना कर रहा है। उसकी सच्ची प्रकृति हमें दोस्ती की खूबसूरत जटिलताओं और उससे जुड़ी चुनौतियों की याद दिलाती है।

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा दोस्त है, जिसके साथ हर दिन कोई न कोई नयी मुसीबत जुड़ी होती है? कभी गैस पर दूध जलाना, कभी मोबाइल गिरा देना, तो कभी ATM में कार्ड उल्टा डाल देना – और हर बार उसकी मासूमियत पर हँसी भी आती है और दया भी। आज मैं आपको एक ऐसे ही दोस्त ‘केविन’ की कहानी सुनाने जा रही हूँ, जिसने मासूमियत के नाम पर कॉमन सेंस की ऐसी ऐसी मिसालें पेश की हैं कि आप चाहें तो सिर पकड़ लें या पेट पकड़कर हँस पड़ें।

केविन – मासूमियत का दूसरा नाम

केविन बीस की उम्र के आसपास है और उसे हल्का ऑटिज़्म है। उसकी माँ ने उसे हमेशा बहुत संभालकर रखा, इतना कि वो खुद से ज़िन्दगी जीने की बुनियादी बातें भी नहीं सीख पाया। घरवाले पहली बार उसे 2-3 दिन के लिए अकेला छोड़कर गए तो केविन को अपनी जिम्मेदारी पर खाना बनाना था। अब सोचिए, नूडल्स बनाने बैठा, बर्तन में पास्ता और नमक डाला, गैस जलाई और... हाँ, पानी डालना भूल गया! नतीजा – धुँआ, अलार्म की कर्कश आवाज़, और अलार्म बंद करने के चक्कर में पूरा डिवाइस ही तोड़ बैठा। लगता है, हमारी हिंदी फिल्मों के भोले ‘राजू’ भी इससे ज्यादा समझदार होते!

इसके बाद सोचा, माइक्रोवेव चलाकर खाना गर्म कर लेना चाहिए। लेकिन यहाँ भी केविन की मासूमियत ने कमाल कर दिखाया। आलू को एल्युमिनियम फॉयल में लपेटा, फिर उस पर टिशू पेपर लपेटा और सीधे 30 मिनट के लिए माइक्रोवेव में डाल दिया! जब चिंगारियाँ निकलने लगीं तो केविन सीधा पूछ बैठा – “क्या अब खाना बन गया?” सच पूछिए तो ये किस्सा सुनकर मुझे अपने गाँव के वो चाचा याद आ गए, जो मोबाइल की बैटरी खतम होने पर उसे चार्जर में लगाने की बजाय धूप में रख देते थे!

जिम्मेदारियों की जंग – जब केविन ने कपड़े धोए

अब बारी थी कपड़े धोने की। केविन ने कभी खुद से कपड़े नहीं धोए थे। जब सारे मोज़े गंदे हो गए, तो उसने खुद ही वॉशिंग मशीन चलाने की ठानी। लेकिन डिटर्जेंट डल गया आधी बोतल! नतीजा – साबुन का सैलाब पूरे घर में बह निकला। जब मैं पहुँचा, तो केविन स्विफर से फर्श पोंछ रहा था, लेकिन असली सफाई उसकी मासूमियत की थी।

कपड़े तो धुल गए, लेकिन उसकी सफेद शर्ट गुलाबी हो गई। ऊपर से डर गया कि कहीं गुलाबी पहनने से कोई ‘बड़ा’ बदलाव न आ जाए! और तो और, अपने पैंट में रखा मोबाइल भी मशीन में डाल आया – अब फोन भी शहीद हो गया।

बाइक, फोन और मासूम गलतियाँ – केविन के किस्से

केविन की बाइक हमेशा खो जाती है। एक बार पैडल टूट गया, तो बाइक चर्च के बाहर छोड़कर बस से घर चला आया। हफ्ते भर बाद ही याद आया कि बाइक कहाँ है! दूसरी बार सुपरमार्केट गया, लॉकर नहीं था तो जूते का फीता ही बाँध दिया – और लौटकर देखा, बाइक गायब! केविन आज तक मानता है कि फीता सही से बाँधता तो चोरी न होती। कोई कमेंट में लिख रहा था – “भाई, ये तो कार्टून नेटवर्क वाले मोटू-पतलू के एपिसोड जैसा है!”

फोन का Waterproof बनाने का तरीका भी निराला – सारे पोर्ट में गोंद भर दी और उसके बाद शावर में फोन ले गया। अब भला, गोंद से फोन अगर पानी में चलने लगे तो टेक्नोलॉजी को भारत रत्न ही मिल जाए!

जब मासूमियत ने एम्बुलेंस बुला ली

सबसे मज़ेदार किस्सा तब हुआ जब मैं माहवारी में थी और कपड़ों पर हल्का सा धब्बा आ गया था। केविन ने बिना कुछ पूछे सीधा एम्बुलेंस बुला ली, सोच बैठा कि मैं कहीं अंदरूनी चोट से मरने वाली हूँ! जब पैरामेडिक्स आए तो मुझे उन्हें समझाना पड़ा कि ये हर महीने की आम बात है। और मज़े की बात, केविन के पापा खुद डॉक्टर हैं! कमेंट में किसी ने लिखा – “केविन का दिल सोने का है, लेकिन कॉमन सेंस की तो कसम से छुट्टी है।”

समुदाय की राय – मासूमियत या परवरिश की गलती?

रेडिट पर ज्यादातर लोग केविन की मासूमियत पर हँसे भी और चिंता भी जताई। एक यूज़र ने लिखा – “केविन में कोई बुरी नीयत नहीं, बस उसे दुनिया समझनी बाकी है।” कई लोगों ने माना कि माता-पिता की बहुत ज्यादा सुरक्षा ने केविन को बिना ज़िम्मेदारियाँ सिखाए बड़ा कर दिया। एक ने लिखा – “आप 18 की उम्र में अचानक सब सीख नहीं सकते, माता-पिता को धीरे-धीरे सिखाना चाहिए था।”

कुछ लोग तो केविन की तुलना हमारे देश के ‘गोल्डन रिट्रीवर’ कुत्ते से करने लगे – हमेशा खुश, मासूम और बिना किसी चालाकी के। कोई बोला, “ऐसे दोस्त अच्छे होते हैं, बस उन पर कभी उधार मत देना!” एक यूज़र ने सलाह दी, “केविन को लाइफ स्किल्स की क्लास भेजो, शायद उसकी ज़िन्दगी बच जाए!”

दोस्ती का असली मतलब

आखिर में, सवाल उठता है – ऐसी मासूमियत भरी मुसीबतों के बाद भी कोई केविन जैसा दोस्त क्यों रखे? जवाब बहुत सीधा है – उसकी नीयत हमेशा साफ है, दिल बड़ा है, और चाहे जितनी भी गड़बड़ कर ले, वो हमेशा सच्चा और ईमानदार रहता है। अगर आप उसकी मासूम गलतियों पर मुस्कुरा सकते हैं और हर बार उसकी मदद करने का धैर्य रखते हैं, तो केविन जैसा दोस्त असली खजाना है।

अंत में – आप क्या सोचते हैं?

क्या आपके जीवन में भी कोई केविन है? या कभी खुद ऐसी मासूमियत वाली गलती कर बैठे हैं? नीचे कमेंट में अपने किस्से जरूर साझा करें। कौन जाने, आपकी कहानी भी किसी की मुस्कान का कारण बन जाए!

दोस्ती में थोड़ी मस्ती और मासूमियत होना भी जरूरी है – वर्ना जिंदगी कब इतनी रंगीन होती?


मूल रेडिट पोस्ट: My best friend might be a Kevin